भारत में बेरोजगारी दर छह महीने के उच्च स्तर पर, अप्रैल में 5.2% पहुंची

अप्रैल 2026 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2% हो गई, जो पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। युवाओं के रोजगार, अर्थव्यवस्था और नौकरी बाजार पर

देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर अप्रैल में बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई, जो पिछले छह महीनों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। मार्च में यह दर 5.1 प्रतिशत थी। इससे पहले अक्तूबर 2025 में भी बेरोजगारी दर 5.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

बिजनेस न्यूज़: भारत में रोजगार बाजार को लेकर जारी चुनौतियों के बीच अप्रैल 2026 में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि शहरी क्षेत्रों, विशेषकर महिलाओं की रोजगार स्थिति में मामूली सुधार देखने को मिला है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में देश की बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में बढ़ गई। इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी बेरोजगारी दर 5.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन रोजगार सृजन की रफ्तार को लेकर लगातार बहस जारी है।

3.74 लाख से अधिक लोगों पर आधारित सर्वे

Ministry of Statistics and Programme Implementation द्वारा जारी इस सर्वे में देशभर के 3,74,243 लोगों से जुटाई गई जानकारी का विश्लेषण किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण भारत में बेरोजगारी की स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण रही। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मार्च के 4.3 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.6 प्रतिशत हो गई।

इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में मामूली सुधार देखने को मिला। शहरों में बेरोजगारी दर मार्च के 6.8 प्रतिशत से घटकर अप्रैल में 6.6 प्रतिशत रही। यह संकेत देता है कि शहरी अर्थव्यवस्था में रोजगार अवसरों में कुछ स्थिरता आई है।

पुरुषों और महिलाओं की बेरोजगारी दर में अंतर

सर्वे के अनुसार, पुरुषों की बेरोजगारी दर अप्रैल में 5.1 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में यह 5 प्रतिशत थी। ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत से बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गई। हालांकि, शहरी पुरुषों की बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.9 प्रतिशत दर्ज की गई। महिलाओं की स्थिति मिश्रित रही। कुल महिला बेरोजगारी दर मार्च के 5.3 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 5.4 प्रतिशत हो गई।

हालांकि शहरी महिलाओं के लिए कुछ सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। शहरी महिला बेरोजगारी दर घटकर 8.5 प्रतिशत रही, जो पिछले एक वर्ष में सबसे कम स्तरों में से एक है। इससे संकेत मिलता है कि शहरों में महिलाओं की रोजगार भागीदारी धीरे-धीरे सुधर रही है। दूसरी ओर, ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार अवसरों की कमी को दर्शाती है।

कार्यरत आबादी अनुपात में गिरावट

रिपोर्ट में वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) यानी कार्यरत आबादी अनुपात में भी गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल में यह आंकड़ा 52.2 प्रतिशत रहा, जबकि मार्च में यह 52.6 प्रतिशत था। शहरी क्षेत्रों में WPR 46.8 प्रतिशत पर स्थिर रहा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह घटकर 54.9 प्रतिशत पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि आधारित रोजगार में मौसमी उतार-चढ़ाव और ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित औद्योगिक अवसर इस गिरावट की प्रमुख वजह हो सकते हैं।

भारत की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) भी अप्रैल में घटकर 55 प्रतिशत रह गई, जबकि मार्च में यह 55.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 57.5 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में 50.1 प्रतिशत दर्ज की गई। महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर में भी गिरावट देखी गई। अप्रैल 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं का LFPR घटकर 33.9 प्रतिशत रह गया, जो मार्च में 34.4 प्रतिशत था। ग्रामीण महिलाओं का LFPR 38.2 प्रतिशत और शहरी महिलाओं का 25 प्रतिशत दर्ज किया गया।

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