महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले पुणे जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ ने डेयरी किसानों को राहत देते हुए गाय और भैंस के दूध के खरीद मूल्य में 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। संघ के मुताबिक, चारा, वैरण और परिवहन लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
बिजनेस न्यूज़: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले डेयरी किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है। पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने किसानों से खरीदे जाने वाले गाय और भैंस के दूध की कीमत में 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई खरीद दरें अगले दिन से लागू होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इस फैसले की खास बात यह है कि इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।
डेयरी संघ ने स्पष्ट किया है कि किसानों को दूध के लिए मिलने वाली कीमत बढ़ाई जा रही है, लेकिन दुकानों पर ग्राहकों को बेचे जाने वाले पैकेट दूध के खुदरा दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में दूध उत्पादकों को अतिरिक्त भुगतान मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं को अपनी रोजमर्रा की खरीदारी के लिए पहले जितनी ही कीमत चुकानी होगी।
किसानों को क्यों बढ़ाकर दिया जाएगा दूध का दाम?
पुणे जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के अनुसार, पिछले कुछ समय में पशुओं के चारे, पशु आहार और परिवहन से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। इन लागतों का सीधा असर डेयरी किसानों की कमाई और मुनाफे पर पड़ा है। ऐसे में खरीद मूल्य में 1 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि का उद्देश्य किसानों को बढ़ती उत्पादन लागत के बीच कुछ राहत देना है।
नई व्यवस्था के तहत सहकारी केंद्रों पर दूध उपलब्ध कराने वाले किसानों को पहले की तुलना में प्रति लीटर एक रुपये अधिक भुगतान मिलेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के कारण दूध और उससे जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है।
खरीद मूल्य और खुदरा कीमत में क्या अंतर है?
दूध की कीमत में हुई इस बढ़ोतरी को समझने के लिए procurement price यानी खरीद मूल्य और retail price यानी खुदरा मूल्य के बीच अंतर समझना जरूरी है। खरीद मूल्य वह रकम है जो डेयरी या सहकारी संस्था किसानों से कच्चा दूध खरीदते समय उन्हें देती है। इस मामले में इसी कीमत को 1 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया है।
इसके विपरीत, खुदरा मूल्य वह कीमत है जिस पर पैकेट में दूध ग्राहकों को दुकानों या अन्य बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध कराया जाता है। कात्रज डेयरी ने स्पष्ट किया है कि खुदरा कीमत में फिलहाल कोई वृद्धि नहीं की गई है। इसका मतलब है कि अतिरिक्त 1 रुपये का खर्च डेयरी संस्था खुद वहन करेगी। इसलिए खरीद मूल्य बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं के मासिक दूध बजट पर तत्काल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
अब किसानों को कितना मिलेगा?
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नई दर लागू होने के बाद 3.5 प्रतिशत फैट और 8.5 प्रतिशत SNF वाले गाय के दूध का खरीद मूल्य 39.80 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 40.80 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। यह दर किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दूध उत्पादन की लागत में चारे और पशु आहार का बड़ा हिस्सा होता है। इसके अलावा पशुओं की देखभाल, श्रम और दूध को संग्रह केंद्र तक पहुंचाने की लागत भी किसानों की कुल लागत को प्रभावित करती है। खरीद मूल्य में यह वृद्धि किसानों की आय को कुछ हद तक सहारा देने के उद्देश्य से की गई है।
गणेशोत्सव से पहले बढ़ती है दूध की मांग
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के दौरान दूध की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। इस अवधि में घरों के साथ-साथ मिठाई और डेयरी उत्पाद बनाने वाले कारोबारों में भी दूध की खपत बढ़ती है। पेड़ा, मोदक, बर्फी और अन्य पारंपरिक मिठाइयों के उत्पादन में दूध तथा उससे बने उत्पादों की जरूरत अधिक होती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, त्योहार के दौरान दूध और मावे की मांग में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे समय में किसानों को बेहतर खरीद मूल्य मिलने से उन्हें बढ़ी मांग का लाभ मिल सकता है।
मुंबई में भैंस के दूध की कीमत भी बढ़ी
त्योहारों से पहले महाराष्ट्र के डेयरी बाजार में कीमतों को लेकर कई बदलाव देखने को मिले हैं। हाल ही में मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की ओर से भैंस के दूध की खरीद कीमत में भी बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई थी। इसके मुकाबले पुणे के कात्रज डेयरी से जुड़ा फैसला उपभोक्ताओं के लिए राहत देने वाला है, क्योंकि किसानों को अतिरिक्त भुगतान देने के बावजूद खुदरा दूध की कीमत को स्थिर रखा गया है।








