प्रयागराज में आने वाले समय में बस से सफर करने का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। सिविल लाइंस में प्रस्तावित आधुनिक बस पोर्ट को पारंपरिक बस अड्डे की तरह नहीं, बल्कि एक बहुमंजिला और वर्टिकल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की योजना है। खास बात यह है कि इस आधुनिक बस पोर्ट में यात्रियों को केवल बस पकड़ने और उतरने की सुविधा ही नहीं मिलेगी, बल्कि एक ही परिसर में होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग, मनोरंजन और दूसरी प्रीमियम सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। ताजा जानकारी के अनुसार प्रस्तावित इमारत 18 मंजिल तक ऊंची होगी और इसकी 18वीं मंजिल पर स्विमिंग पूल जैसी सुविधा विकसित करने की योजना बताई गई है।
सिविल लाइंस बस स्टेशन के पुनर्विकास की योजना पिछले कुछ समय से प्रयागराज की बड़ी शहरी परियोजनाओं में शामिल रही है। पहले सामने आए प्रोजेक्ट प्लान में इसे एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक बस पोर्ट के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी। अप्रैल 2025 में सामने आई जानकारी के मुताबिक उस समय 13 मंजिला इमारत का खाका तैयार किया गया था और इसमें होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, फूड कोर्ट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, एसी वेटिंग लाउंज, वीआईपी लाउंज, अंडरग्राउंड पार्किंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं प्रस्तावित थीं।
अब परियोजना की नई तस्वीर में वर्टिकल बस पोर्ट को और ज्यादा ऊंचाई तथा सुविधाओं के साथ विकसित करने की बात सामने आई है। इसका सबसे बड़ा कारण प्रयागराज के सिविल लाइंस जैसे घनी और व्यस्त शहरी क्षेत्र में जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना भी माना जा सकता है। सामान्य बस अड्डे के लिए बहुत बड़े भूखंड की जरूरत पड़ती है, जबकि वर्टिकल मॉडल में अलग-अलग गतिविधियों को कई मंजिलों पर व्यवस्थित किया जा सकता है। नीचे के हिस्से में बस संचालन और यात्रियों की आवाजाही रहेगी, जबकि ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल व्यावसायिक और मनोरंजक सुविधाओं के लिए किया जा सकता है।
प्रयागराज में महाकुंभ के बाद शहर में पर्यटन, धार्मिक यात्रा और व्यावसायिक गतिविधियों का महत्व और बढ़ा है। ऐसे में सिविल लाइंस जैसे प्रमुख क्षेत्र में आधुनिक बस पोर्ट बनने से शहर में आने वाले यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। सिविल लाइंस शहर के प्रमुख कारोबारी और व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल है और यहां बस अड्डे की मौजूदगी लंबे समय से यातायात व्यवस्था का अहम हिस्सा रही है। नए प्रोजेक्ट का उद्देश्य इसी स्थान को आधुनिक सुविधाओं के साथ दोबारा विकसित करना है।
इस बस पोर्ट की सबसे खास बात इसका बहुउद्देश्यीय स्वरूप होगा। यात्रियों को बस पकड़ने के लिए पारंपरिक प्लेटफॉर्म और प्रतीक्षालय के साथ-साथ एसी वेटिंग एरिया, बेहतर बैठने की व्यवस्था और अन्य आधुनिक सुविधाएं मिलने की योजना है। पहले जारी परियोजना विवरण में दिव्यांग यात्रियों के लिए फ्रेंडली काउंटर, एसी वेटिंग रूम और वीआईपी लाउंज का भी उल्लेख किया गया था। यात्रियों और व्यावसायिक हिस्से में आने वाले लोगों की आवाजाही को अलग रखने के लिए लिफ्ट और एस्केलेटर की व्यवस्था की जानी है।
यानी कोई यात्री बस पकड़ने के लिए पहुंचे तो उसे भीड़भाड़ वाले पुराने बस अड्डे जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े, बल्कि एक व्यवस्थित ट्रांसपोर्ट हब का अनुभव मिले। दूसरी ओर होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग या अन्य सुविधाओं के लिए आने वाले लोगों की आवाजाही भी बस यात्रियों से अलग रखी जा सकेगी। इस तरह एक ही परिसर में परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
18वीं मंजिल पर स्विमिंग पूल की योजना इस पूरे प्रोजेक्ट को और खास बनाती है। आमतौर पर बस अड्डों में यात्री प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, प्लेटफॉर्म, दुकानें और भोजनालय जैसी सुविधाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन किसी बस पोर्ट की ऊपरी मंजिल पर स्विमिंग पूल जैसी सुविधा इसे सामान्य परिवहन केंद्र से अलग पहचान दे सकती है। हालांकि अंतिम डिजाइन, संचालन व्यवस्था और सभी सुविधाओं की स्थिति निर्माण और परियोजना के अंतिम स्वीकृत प्लान के अनुसार स्पष्ट होगी।
सिविल लाइंस बस पोर्ट का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल से किए जाने की योजना है। पहले की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने आधुनिक बस टर्मिनल, शॉपिंग मॉल और लग्जरी होटल को शामिल करने वाली परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी निजी डेवलपर को दी है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। होटल संचालन के लिए अंतरराष्ट्रीय हॉस्पिटैलिटी कंपनी Wyndham Hotels & Resorts के Ramada ब्रांड के साथ समझौते की जानकारी भी सामने आई थी।
इसका मतलब यह परियोजना केवल रोडवेज बस अड्डे के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी। इसे एक ऐसे इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां परिवहन के साथ होटल और व्यावसायिक गतिविधियां भी चलेंगी। इससे सरकारी परिवहन ढांचे को आधुनिक बनाने के साथ-साथ जमीन के व्यावसायिक उपयोग से राजस्व पैदा करने का मॉडल भी तैयार हो सकता है।
पांच सितारा सुविधाओं से जुड़े दावे को भी इसी व्यापक परियोजना के संदर्भ में समझना जरूरी है। बस से यात्रा करने वाला हर यात्री होटल की सुविधाओं का इस्तेमाल करेगा, यह जरूरी नहीं है, लेकिन परिसर में विकसित होने वाला होटल और प्रीमियम कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर पूरे बस पोर्ट की सुविधाओं का स्तर सामान्य बस अड्डों से अलग कर सकता है। यात्रियों के लिए एसी वेटिंग, बेहतर साफ-सफाई, आधुनिक टिकटिंग, पार्किंग और भोजन की सुविधाएं उपलब्ध कराना इस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
प्रयागराज जैसे शहर में ऐसी परियोजना की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि यहां सालभर धार्मिक और पर्यटन गतिविधियां बनी रहती हैं। संगम, बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट, अलोपी देवी मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थलों के अलावा महाकुंभ के कारण शहर में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। बस परिवहन इनके लिए सबसे सुलभ माध्यमों में से एक है। ऐसे में आधुनिक बस पोर्ट शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकता है।
शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में दूसरी पहलें भी देखने को मिल रही हैं। अगस्त 2026 में सिविल लाइंस से अलोपीबाग के बीच एसी डबल डेकर बस के सफल ट्रायल की जानकारी सामने आई थी। इस बस में 65 सीटें, CCTV कैमरे और महिलाओं की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन जैसी सुविधाएं हैं। शुरुआती किराया 20 से 30 रुपये के बीच तय किया गया था।
ऐसे में सिविल लाइंस क्षेत्र में एक तरफ आधुनिक बस पोर्ट और दूसरी तरफ हाईटेक बस सेवा का विस्तार प्रयागराज की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। डबल डेकर बस जैसे प्रयोग सड़क पर यात्रियों की क्षमता बढ़ाने का प्रयास हैं, जबकि वर्टिकल बस पोर्ट जमीन के सीमित उपयोग को ध्यान में रखकर परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियों को ऊंचाई में व्यवस्थित करने का मॉडल पेश करता है।
प्रस्तावित बस पोर्ट में अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा भी महत्वपूर्ण होगी। सिविल लाइंस जैसे व्यस्त क्षेत्र में पार्किंग हमेशा बड़ी चुनौती रहती है। बस यात्रियों के अलावा होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आने वाले लोगों के वाहनों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना जरूरी होगा। भूमिगत पार्किंग का इस्तेमाल होने से सड़क के ऊपर का हिस्सा यातायात और पैदल यात्रियों के लिए अधिक व्यवस्थित रखा जा सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की योजना भी परियोजना को भविष्य की परिवहन जरूरतों से जोड़ती है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक बसों और दूसरे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को परिवहन केंद्रों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सिविल लाइंस बस पोर्ट में ऐसी सुविधा होने से इसे केवल मौजूदा बस संचालन के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के परिवहन ढांचे के अनुरूप तैयार करने की कोशिश दिखाई देती है।
दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाओं का होना भी आधुनिक बस पोर्ट की महत्वपूर्ण जरूरत है। पहले सामने आए डिजाइन में दिव्यांग फ्रेंडली काउंटर का उल्लेख किया गया था। बहुमंजिला इमारत में लिफ्ट और एस्केलेटर के साथ ऐसे यात्रियों के लिए सुगम रास्ते सुनिश्चित करना जरूरी होगा। बस पोर्ट जितना बड़ा और बहुउद्देश्यीय होगा, उतना ही जरूरी होगा कि हर वर्ग के यात्रियों के लिए पहुंच आसान रखी जाए।
प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग में सबसे बड़ी चुनौती बस संचालन और कमर्शियल गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। बस पोर्ट का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और बसों का सुचारु संचालन है। यदि उसी परिसर में होटल, शॉपिंग, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट और अन्य सुविधाएं होंगी तो अलग-अलग प्रकार की भीड़ बढ़ेगी। इसलिए प्रवेश और निकास, बसों की पार्किंग, यात्रियों की आवाजाही, फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण होंगी।
18 मंजिल की ऊंची इमारत में अग्नि सुरक्षा भी प्रमुख विषय होगा। बहुमंजिला भवन में फायर एग्जिट, फायर फाइटिंग सिस्टम, आपातकालीन सीढ़ियां, लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था और पर्याप्त निकासी मार्ग जैसे मानकों का पालन करना जरूरी होगा। यात्रियों के साथ-साथ होटल और व्यावसायिक हिस्से में आने वाले लोगों की संख्या को ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था डिजाइन करनी होगी।
स्विमिंग पूल जैसी सुविधा को लेकर भी तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होगा। ऊंची मंजिल पर पूल बनाने के लिए भवन की संरचनात्मक क्षमता, जल भार, वाटरप्रूफिंग, ड्रेनेज और आपातकालीन सुरक्षा की विशेष योजना जरूरी होती है। इसलिए 18वीं मंजिल की यह सुविधा आकर्षण का केंद्र जरूर बन सकती है, लेकिन इसका अंतिम स्वरूप स्वीकृत डिजाइन और निर्माण मानकों के अनुसार ही तय होगा।
इस परियोजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू रोजगार से जुड़ा है। होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग, सुरक्षा, रखरखाव और परिवहन संचालन जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि परियोजना पूरी क्षमता से संचालित होती है तो स्थानीय स्तर पर व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी फायदा मिलने की संभावना है।
सिविल लाइंस क्षेत्र में इस तरह का बड़ा कमर्शियल-ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट आसपास के कारोबार को भी प्रभावित कर सकता है। होटल और रेस्टोरेंट आने से पर्यटकों और यात्रियों की आवाजाही बढ़ सकती है। शॉपिंग और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं स्थानीय लोगों को भी आकर्षित कर सकती हैं। हालांकि इससे क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की संभावना भी रहेगी, इसलिए परियोजना के साथ यातायात प्रबंधन की योजना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
प्रयागराज नगर निगम का मुख्यालय भी सिविल लाइंस में सरोजिनी नायडू मार्ग पर स्थित है, जिससे यह इलाका शहर के प्रशासनिक और व्यावसायिक ढांचे में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे क्षेत्र में इतनी बड़ी बहुमंजिला परियोजना का असर केवल बस यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था, पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
परियोजना के पूरा होने के बाद प्रयागराज में बस अड्डे की पारंपरिक तस्वीर बदल सकती है। जहां पुराने बस स्टेशनों में यात्रियों के लिए सीमित प्रतीक्षालय और दुकानें होती हैं, वहीं नया मॉडल परिवहन, आतिथ्य, मनोरंजन और खरीदारी को एक ही परिसर में जोड़ने की कोशिश करेगा। यही वजह है कि इसे शहर के शहरी विकास और परिवहन ढांचे में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए निर्माण की समयसीमा, अंतिम मंजूर डिजाइन और चरणबद्ध काम की स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी होगा। अप्रैल 2025 में निर्माण को अगले दो वर्षों में आकार लेने की बात कही गई थी और उस समय एक 13 मंजिला भवन का पूरा खाका तैयार होने की जानकारी थी। अब 18 मंजिल की नई योजना सामने आने से परियोजना का अंतिम स्वरूप पहले के मुकाबले और विस्तृत दिखाई दे रहा है।
प्रयागराज के लिए यह परियोजना इसलिए भी खास है क्योंकि शहर तेजी से बदलते शहरी परिवहन और पर्यटन ढांचे के दौर से गुजर रहा है। महाकुंभ के बाद शहर में आने वाले यात्रियों के लिए स्थायी सुविधाओं की जरूरत और अधिक महसूस की जा रही है। आधुनिक बस पोर्ट इस जरूरत को पूरा करने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हो सकता है।
आने वाले समय में जब यात्री सिविल लाइंस पहुंचेंगे तो उन्हें केवल बसों के प्लेटफॉर्म और टिकट काउंटर ही नहीं, बल्कि एक बड़े मल्टीलेवल कॉम्प्लेक्स का अनुभव मिलने की उम्मीद है। नीचे बसों और यात्रियों की आवाजाही होगी, अलग-अलग मंजिलों पर होटल और व्यावसायिक गतिविधियां चलेंगी और सबसे ऊपरी हिस्से में प्रस्तावित स्विमिंग पूल इस पूरे परिसर को अलग पहचान दे सकता है।
फिलहाल इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह पारंपरिक बस अड्डे की अवधारणा को बदलकर उसे वर्टिकल और बहुउद्देश्यीय रूप देने की कोशिश है। यात्रियों की सुविधा, होटल, शॉपिंग, भोजन, पार्किंग और आधुनिक परिवहन सुविधाओं को एक जगह लाने की योजना अगर तय डिजाइन के मुताबिक जमीन पर उतरती है तो सिविल लाइंस का यह बस पोर्ट प्रयागराज के सबसे चर्चित सार्वजनिक परिवहन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
प्रयागराज में बस यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण होगा। आधुनिक प्रतीक्षालय, बेहतर सुविधाएं, डिजिटल और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था तथा अन्य सेवाओं के एक ही परिसर में मिलने से यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के दौरान ज्यादा सुविधा मिल सकती है। वहीं शहर में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए भी यह आधुनिक प्रवेश द्वार जैसा काम कर सकता है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रस्तावित 18 मंजिला वर्टिकल बस पोर्ट का अंतिम डिजाइन किस रूप में सामने आता है, निर्माण कार्य किस गति से आगे बढ़ता है और यात्रियों के लिए बताई जा रही सुविधाएं कब तक जमीन पर उतरती हैं। अगर योजना पूरी तरह लागू होती है तो प्रयागराज का सिविल लाइंस बस अड्डा देश के उन चुनिंदा बस टर्मिनलों में शामिल हो सकता है जहां परिवहन के साथ होटल, शॉपिंग और प्रीमियम मनोरंजन सुविधाओं को एक ही बहुमंजिला परिसर में समाहित किया गया है।









