भाजपा लगातार बढ़ा रही हरीश द्विवेदी का कद राष्ट्रीय महामंत्री के बाद अब युवा मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त

भाजपा ने राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया है। बस्ती के पूर्व सांसद की संगठन में जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है।
भाजपा लगातार बढ़ा रही हरीश द्विवेदी का कद राष्ट्रीय महामंत्री के बाद अब युवा मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त
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भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के स्तर पर एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता हरीश द्विवेदी को सौंपी है। बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हरीश द्विवेदी को अब भाजपा युवा मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी की ओर से विभिन्न मोर्चों के नए प्रभारियों की घोषणा के बाद यह नियुक्ति सामने आई है। इसके साथ ही हरीश द्विवेदी की संगठन में बढ़ती भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इससे पहले अगस्त में उन्हें भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी।

हरीश द्विवेदी के लिए युवा मोर्चा की यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने खुद अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी से की थी और भाजपा युवा मोर्चा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली थी। ऐसे में युवा संगठन के साथ उनका पुराना जुड़ाव और संगठनात्मक अनुभव इस नई जिम्मेदारी में उनके लिए उपयोगी हो सकता है। जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार वह एबीवीपी से राजनीति में आए और बाद में युवा मोर्चा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष रहे।

हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश के बस्ती क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बस्ती सीट से जीत दर्ज की थी। 2014 में उन्होंने पहली बार लोकसभा में पहुंच बनाई और 2019 में लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में वह बस्ती से चुनाव हार गए, लेकिन इसके बाद भी पार्टी संगठन में उनकी भूमिका बनी रही और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

अगस्त 2026 में भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने को भी पार्टी संगठन में उनके बढ़ते कद के संकेत के तौर पर देखा गया था। भाजपा ने 17 अगस्त को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम की घोषणा की थी। इसी टीम में हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद अब उन्हें युवा मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी बनाए जाने से पार्टी के भीतर उनकी संगठनात्मक भूमिका और व्यापक होती दिखाई दे रही है।

भाजपा के लिए युवा मोर्चा केवल पार्टी की एक सहयोगी इकाई नहीं है, बल्कि युवा मतदाताओं और नए कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। देश की राजनीति में युवा मतदाताओं की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में युवा मोर्चा की गतिविधियों को चुनावी राजनीति, संगठन विस्तार और सोशल मीडिया अभियान से जोड़ना पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हरीश द्विवेदी को इस मोर्चे की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनसे युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन के विस्तार में भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा सकती है।

यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और यहां 403 विधानसभा सीटें हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को संगठन के हर स्तर पर सक्रियता बढ़ानी है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर युवा मोर्चे की जिम्मेदारी संभालने वाले नेता का उत्तर प्रदेश से होना भी राजनीतिक रूप से ध्यान खींचता है।

हालांकि हरीश द्विवेदी की नई जिम्मेदारी केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं होगी। युवा मोर्चा का संगठन पूरे देश में फैला हुआ है और राष्ट्रीय प्रभारी के तौर पर उन्हें अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों, युवा कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और पार्टी के कार्यक्रमों के समन्वय में भूमिका निभानी होगी। इसलिए यह जिम्मेदारी उनके राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव की व्यापक परीक्षा भी होगी।

भाजपा ने युवा मोर्चा के अलावा महिला, किसान, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और OBC मोर्चों के लिए भी नए प्रभारियों की घोषणा की है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार डी पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चा, गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चा, लाल सिंह आर्य को किसान मोर्चा, सतीश पूनिया को अनुसूचित जनजाति मोर्चा, संजय भाटिया को अनुसूचित जाति मोर्चा और वैजयंती पांडा को OBC मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है।

इस पूरी नियुक्ति को भाजपा के संगठनात्मक पुनर्गठन और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। युवा मोर्चा की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को देना इसी व्यापक संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी आने वाले समय में युवाओं को लेकर बड़े अभियान और कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में भी है।

युवा मतदाताओं पर भाजपा का फोकस हाल के कार्यक्रमों में भी दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से भाजपा ने एक महीने के 'सेवा संकल्प अभियान' की घोषणा की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अभियान में युवाओं को प्रमुखता दी जाएगी और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उनसे संपर्क बढ़ाने की कोशिश होगी। अभियान में रक्तदान, स्वच्छता अभियान, प्रदर्शनियां, सेमिनार और सरकारी योजनाओं से जुड़े शिविर जैसे कार्यक्रम शामिल किए जाने हैं।

ऐसे समय में हरीश द्विवेदी की युवा मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी के रूप में नियुक्ति का महत्व और बढ़ जाता है। पार्टी के पास अब युवा मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने के लिए एक ऐसे नेता की जिम्मेदारी होगी जिसका राजनीतिक प्रशिक्षण छात्र संगठन और युवा मोर्चा के माध्यम से हुआ है। उनके सामने युवा कार्यकर्ताओं को पार्टी के साथ जोड़ने के साथ-साथ संगठन को बूथ और मंडल स्तर तक सक्रिय रखने की चुनौती भी होगी।

हरीश द्विवेदी की संगठनात्मक शैली को लेकर भाजपा के भीतर लंबे समय से चर्चा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने से पहले वह असम के प्रभारी की भूमिका भी संभाल चुके हैं। उनकी राजनीतिक गतिविधियों का दायरा उत्तर प्रदेश से बाहर भी रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रीय महामंत्री के बाद उन्हें एक बड़े राष्ट्रीय मोर्चे की जिम्मेदारी दिया जाना पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के भरोसे के रूप में देखा जा सकता है।

हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर भी सामान्य चुनावी राजनीति से अलग संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाला रहा है। एबीवीपी से शुरुआत, युवा मोर्चा की जिम्मेदारी, दो बार लोकसभा सांसद और इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना उनके लंबे राजनीतिक सफर को दर्शाता है। अब युवा मोर्चा की राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलने से उनके सामने संगठन के उसी अनुभव को देशभर में लागू करने का अवसर होगा।

भाजपा में राष्ट्रीय महामंत्री का पद संगठन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। राष्ट्रीय महामंत्री पार्टी के संगठनात्मक अभियानों, राज्यों के समन्वय और विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे पद पर नियुक्ति के कुछ ही सप्ताह बाद किसी बड़े राष्ट्रीय मोर्चे का प्रभारी बनाए जाने से हरीश द्विवेदी की जिम्मेदारियों का दायरा और बढ़ गया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति के संदर्भ में भी यह नियुक्ति खास मानी जा सकती है। बस्ती से सांसद रहने के कारण हरीश द्विवेदी को पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक-सामाजिक समीकरणों की अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। हालांकि युवा मोर्चे के राष्ट्रीय प्रभारी के तौर पर उनकी जिम्मेदारी पूरे देश की होगी, लेकिन उत्तर प्रदेश से आने के कारण राज्य के युवा संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ उनका जुड़ाव पार्टी के लिए अतिरिक्त लाभ दे सकता है।

आने वाले समय में भाजपा के युवा मोर्चे के सामने कई स्तरों पर काम करने की चुनौती होगी। कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्रों से संवाद, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं तक पहुंच, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखना, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं से संपर्क और नए कार्यकर्ताओं को संगठन में अवसर देना इसके प्रमुख हिस्से हो सकते हैं। इन सभी क्षेत्रों में युवा मोर्चा की सक्रियता बढ़ाने की जिम्मेदारी अब हरीश द्विवेदी के नेतृत्व में आगे बढ़ सकती है।

राजनीतिक तौर पर युवाओं को साधना किसी भी पार्टी के लिए आसान काम नहीं है। युवा मतदाताओं के मुद्दे लगातार बदलते रहते हैं और सोशल मीडिया के कारण राजनीतिक संवाद भी पहले की तुलना में ज्यादा तेज हो गया है। ऐसे में केवल पारंपरिक संगठनात्मक कार्यक्रमों के सहारे युवाओं को जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। युवा मोर्चे को रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप, तकनीक, खेल और डिजिटल अवसरों जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय संवाद करना होगा।

हरीश द्विवेदी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब भाजपा अपने संगठन को आगामी चुनावों के लिए लगातार सक्रिय कर रही है। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और पार्टी नेतृत्व बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। भाजपा के नए उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े भी हाल में नेताओं और कार्यकर्ताओं से अनुशासन तथा जमीन पर काम करने पर जोर दे चुके हैं।

ऐसे माहौल में युवा मोर्चे की राष्ट्रीय जिम्मेदारी का असर आने वाले महीनों में पार्टी के कार्यक्रमों में दिखाई दे सकता है। भाजपा पहले से ही युवाओं को केंद्र में रखकर विभिन्न अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। हरीश द्विवेदी की नई जिम्मेदारी इन अभियानों को संगठनात्मक स्तर पर गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पार्टी ने एक साथ कई मोर्चों के प्रभारियों में बदलाव किया है। इसका मतलब यह है कि भाजपा अपने अलग-अलग सामाजिक और आयु वर्गों के बीच संगठनात्मक संपर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। युवा मोर्चा इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि युवा वर्ग भविष्य के कार्यकर्ताओं और नेताओं का आधार भी तैयार करता है।

हरीश द्विवेदी के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी बड़ी है क्योंकि अब उन्हें केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र में संगठन संभालने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर युवा संगठन के साथ काम करना होगा। अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां, युवा मतदाताओं की प्राथमिकताएं और संगठनात्मक ढांचे अलग होते हैं। इन सभी के बीच समन्वय स्थापित करना उनकी नई भूमिका की बड़ी चुनौती होगी।

भाजपा में लंबे समय तक काम करने वाले नेताओं के लिए संगठनात्मक जिम्मेदारियां चुनावी राजनीति से अलग एक महत्वपूर्ण भूमिका तय करती हैं। हरीश द्विवेदी का उदाहरण भी इसी तरह देखा जा सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बस्ती से हार के बाद भी उनकी राजनीतिक भूमिका कमजोर होने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी। पहले उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया और अब युवा मोर्चे की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने उन्हें संगठन के एक अहम हिस्से से जोड़ दिया है।

इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उनके संगठनात्मक अनुभव को महत्व दे रहा है। हालांकि किसी नेता के बढ़ते कद का वास्तविक आकलन केवल पदों से नहीं, बल्कि उसे दी गई जिम्मेदारियों के परिणाम और पार्टी संगठन में उसके प्रभाव से होता है। युवा मोर्चा की नई जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को इसी कसौटी पर परखेगी।

आने वाले महीनों में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती युवा मोर्चे को चुनावी और संगठनात्मक अभियानों के साथ प्रभावी तरीके से जोड़ने की होगी। भाजपा के पास देशभर में मजबूत संगठनात्मक ढांचा है, लेकिन युवाओं की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप संवाद बनाए रखना लगातार चुनौती बना रहेगा। हरीश द्विवेदी के पुराने युवा मोर्चा और एबीवीपी अनुभव का इस्तेमाल पार्टी इसी दिशा में करना चाहती है, ऐसा राजनीतिक तौर पर माना जा सकता है।

फिलहाल हरीश द्विवेदी की राजनीतिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया है। बस्ती से दो बार सांसद रहे नेता से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और अब युवा मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी तक पहुंचना उनके संगठनात्मक कद में लगातार विस्तार को दिखाता है। पार्टी ने उन्हें जिस समय यह जिम्मेदारी दी है, वह भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा देशभर में युवा संपर्क अभियान को बढ़ाने और आने वाले चुनावों के लिए संगठन को सक्रिय करने में जुटी है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि हरीश द्विवेदी युवा मोर्चे की राष्ट्रीय जिम्मेदारी को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और पार्टी के युवा संगठन को आने वाले चुनावी अभियानों में कितनी प्रभावी भूमिका दिला पाते हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भाजपा संगठन में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है और नई जिम्मेदारी ने राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता का दायरा और विस्तृत कर दिया है।

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