मध्य पूर्व तनाव और ईरान युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने और LNG की सीधे आपूर्ति पर सहमति बनाने का कदम उठाया है।
Iran Conflict: ईरान युद्ध और मध्य पूर्व में तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूस के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने का कदम उठाया है। इसके तहत भारत रूस से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सीधे आपूर्ति पर सहमति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर है।
रूस से तेल आयात बढ़ने की संभावना
भारत ने पहले रूस से कच्चे तेल का बड़ा आयात किया था, जिससे मॉस्को की अर्थव्यवस्था को समर्थन मिला। जनवरी में अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीद में कटौती की थी। इसे तत्कालीन सरकार ने एक “कठिन समझौता” बताया। हालांकि, अब हालात बदल चुके हैं। नई दिल्ली और मॉस्को के बीच हाल ही में हुई बातचीत के अनुसार, रूस से तेल आयात एक महीने के भीतर दोगुना होकर कुल आयात का 40 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।
LNG की सीधी आपूर्ति पर सहमति
Jerusalem Post की रिपोर्ट के अनुसार भारत और रूस LNG की सीधे आपूर्ति शुरू करने पर भी सहमत हो गए हैं। यह यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार होगा जब रूस सीधे भारत को LNG बेचेगा। इस “मौखिक सहमति” का संकेत 19 मार्च को दिल्ली में हुई बैठक में मिला, जिसमें रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन और भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल थे। इस बैठक में तेल की सप्लाई बढ़ाने और LNG की सीधी आपूर्ति पर विस्तार से चर्चा हुई।

पश्चिम एशिया संकट का असर
ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमले, इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा। भारत का लगभग आधा तेल और LNG इसी मार्ग से आता है। इसका असर घरेलू स्तर पर भी देखने को मिला। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, कुकिंग गैस की कमी और ईंधन कीमतों में तेज वृद्धि ने आम जनता और उद्योगों दोनों को प्रभावित किया।
पहले रूस से बड़ी मात्रा में तेल क्यों खरीदा गया था
भारत ने पहले रूस से कच्चे तेल का बड़ा आयात किया था। यह कदम भारत के ऊर्जा जरूरतों और रूस की आर्थिक स्थिरता दोनों के लिए सहायक साबित हुआ। रूस की अर्थव्यवस्था को इस आपूर्ति से काफी मदद मिली। हालांकि, जनवरी में अमेरिका द्वारा व्यापारिक टैरिफ बढ़ाने के दबाव में भारत ने रूस से तेल आयात घटा दिया था। यह निर्णय उस समय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर लिया गया था।
अब क्यों रूस की तरफ झुकाव
हालांकि, वर्तमान में हालात बदल चुके हैं। मध्य पूर्व में तनाव और तेल आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए रूस की ओर बढ़ने का निर्णय लिया है। भारत ने रणनीतिक और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस के साथ पुराने भरोसेमंद संबंधों को फिर से सक्रिय किया है। इसके तहत कच्चे तेल के आयात के साथ-साथ LNG की सीधी आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।









