भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने टाटा स्टील, JSW और SAIL पर आरोप लगाया है कि उन्होंने स्टील कीमतें मिलकर तय की। CCI ने कंपनियों से जवाब और वित्तीय विवरण मांगे हैं। जांच 2021 से चल रही है और अंतिम आदेश जल्द आएगा।
New Delhi: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने प्रमुख स्टील कंपनियों टाटा स्टील, JSW स्टील और सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात निर्माता SAIL पर आरोप लगाया है कि उन्होंने आपस में मिलकर उत्पादों की कीमतें तय की। इस तरह की गोलबंदी को भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के खिलाफ माना जाता है और यह बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बाधित करती है। सूत्रों ने बताया कि CCI ने जांच रिपोर्ट के नतीजों पर कंपनियों से जवाब मांगा है और साथ ही वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
CCI की जांच और प्रक्रियागत आदेश
सूत्रों के अनुसार, प्रतिस्पर्धा आयोग ने अभी तक इस मामले में अंतिम आदेश नहीं जारी किया है। जांच महानिदेशक द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद CCI सभी पक्षों को आपत्तियां और सुझाव देने का मौका देता है। इसके बाद ही अंतिम आदेश तैयार किया जाता है। यदि कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाता है, तो उसकी गणना के लिए CCI संबंधित कंपनियों से वित्तीय विवरण मांगता है।
एक सूत्र ने कहा कि जांच की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और आयोग ने अभी तक कोई अंतिम राय नहीं बनाई है। इस मामले में JSW स्टील ने कोई टिप्पणी नहीं दी। टाटा स्टील और SAIL से भी संपर्क किया गया, लेकिन रिपोर्ट लिखे जाने तक उनका जवाब नहीं आया।
CCI ने 2021 से की थी जांच
CCI ने 2021 से स्टील सेक्टर में गोलबंदी और सांठगांठ की जांच शुरू की थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जांच तब शुरू हुई जब बिल्डरों के एक समूह ने अदालत में आरोप लगाया कि 9 कंपनियां मिलकर स्टील आपूर्ति को नियंत्रित कर रही थीं और कीमतें बढ़ा रही थीं।
शुरुआत में CCI ने केवल कुछ कंपनियों पर जांच की थी, लेकिन अक्टूबर 2025 तक जांच का दायरा बढ़ाकर 31 कंपनियों और उद्योग समूहों के साथ-साथ उद्योग के दर्जनों अधिकारियों तक कर दिया गया। इस दौरान छोटी स्टील कंपनियों पर भी छापे मारे गए।
केंद्रीय मंत्री का बयान
पिछले साल जनवरी में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में कहा था कि स्टील और सीमेंट उद्योग में सांठगांठ देश और इसके बुनियादी ढांचे के लिए बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि ये उद्योग कुछ ही हाथों में केंद्रित हैं और अक्सर मिलकर कीमत तय करते हैं।
मंत्री के अनुसार यह स्थिति देश के निर्माण और विकास पर गंभीर असर डालती है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे कदमों से आम उपभोक्ता और उद्योग दोनों प्रभावित होते हैं।
स्टील उद्योग में भारत की स्थिति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश है। देश के बड़े स्टील उत्पादक कुल उत्पादन का आधे से ज्यादा हिस्सा तैयार करते हैं। बिगमिंट के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत की कुल क्रूड स्टील क्षमता 21 करोड़ टन थी। इसमें JSW स्टील की हिस्सेदारी 17.48 फीसदी, टाटा स्टील की 13.29 फीसदी और SAIL की 10.10 फीसदी थी।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह तीनों कंपनियां देश के स्टील उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी वजह से उनकी कीमतों में सांठगांठ का प्रभाव पूरे बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
CCI की कार्रवाई
CCI की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कंपनियों का व्यवहार प्रतिस्पर्धा कानून के खिलाफ है और कुछ अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। आयोग अब सभी वित्तीय और कानूनी दस्तावेजों का मूल्यांकन कर रहा है।
जांच के अंतिम आदेश में यदि CCI कंपनियों पर जुर्माना लगाता है, तो इसकी राशि उनके वित्तीय विवरण और कारोबार के आधार पर तय की जाएगी। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा के नियमों का पालन सुनिश्चित होगा और अन्य कंपनियों के लिए भी एक संदेश जाएगा कि अनैतिक प्रथाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।










