भिवंडी बिल्डिंग हादसा: चार मंजिला इमारत का हिस्सा ढहा, तीन की मौत, कई लोग मलबे में फंसे; राहत अभियान जारी

महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग का हिस्सा ढहने से तीन लोगों की मौत हुई। कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका, NDRF का राहत अभियान जारी।

महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग का हिस्सा ढहने से तीन लोगों की मौत हो गई। कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। NDRF, फायर ब्रिगेड और पुलिस संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।

भिवंडी: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब एक पुरानी चार मंजिला इमारत का हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका के बीच राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), फायर ब्रिगेड, पुलिस और नगर निगम की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। यह घटना एक बार फिर देश के पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

रात करीब 11:30 बजे हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार यह हादसा भिवंडी के नारपोली क्षेत्र स्थित भंडारी कंपाउंड की कोहिनूर बिल्डिंग में गुरुवार रात करीब 11:30 बजे हुआ। चार मंजिला इमारत के 'बी' विंग का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। उस समय इमारत के अंदर मरम्मत का कार्य चल रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक वहां कुछ मजदूर काम कर रहे थे और एक परिवार भी मौजूद था, जो मरम्मत संबंधी कार्यों की निगरानी कर रहा था। इमारत गिरते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं।

तीन लोगों की मौत, कई के फंसे होने की आशंका

प्रशासन द्वारा जारी शुरुआती जानकारी के अनुसार हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं छह से आठ लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई है। राहत दलों ने अब तक एक महिला को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। घायलों का इलाज नजदीकी अस्पतालों में जारी है, जबकि अन्य लोगों की तलाश के लिए मलबा हटाने का कार्य लगातार चल रहा है। बचाव दल आधुनिक उपकरणों और खोजी तकनीकों की मदद से मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि राहत अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लोगों का पता नहीं चल जाता।

पहले से खतरनाक घोषित की गई थी इमारत

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार कोहिनूर बिल्डिंग को पहले ही खतरनाक श्रेणी में रखा गया था। भवन को 'कैटेगरी-सी' घोषित किया गया था, जिसका अर्थ है कि उसकी संरचना कमजोर हो चुकी थी और उसमें रहना सुरक्षित नहीं था। नगर निगम ने पहले ही अधिकांश परिवारों को इमारत खाली करने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि अधिकांश निवासी इमारत छोड़ चुके थे, लेकिन मरम्मत कार्य के चलते कुछ मजदूर और एक परिवार उस समय भवन के भीतर मौजूद थे। इसी दौरान भवन का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और वे लोग मलबे में दब गए।

इमारत में थे 48 कमरे

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक चार मंजिला इस भवन में कुल 48 कमरे थे और प्रत्येक मंजिल पर 12 कमरे बने हुए थे। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इसे पहले ही जोखिमपूर्ण घोषित किया था। इसके बावजूद मरम्मत कार्य के दौरान यह हादसा हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत की स्थिति लंबे समय से खराब थी। हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने अन्य परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की, जिससे संभावित बड़ा नुकसान टल गया।

NDRF और फायर ब्रिगेड चला रही संयुक्त अभियान

घटना की सूचना मिलते ही NDRF, फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गई। भारी मशीनों के साथ मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया। राहतकर्मी सावधानीपूर्वक मलबे को हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं ताकि किसी भी फंसे हुए व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। बचाव कार्य के दौरान आसपास के इलाके को पूरी तरह घेर लिया गया है और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और बचाव अभियान में सहयोग करने की अपील की है।

प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए प्रभावित लोग

भिवंडी नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इमारत से सुरक्षित निकाले गए लोगों को अस्थायी रूप से गायत्री मंदिर-गीता हॉल में ठहराया गया है। वहां उनके रहने, भोजन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन प्रभावित परिवारों की हरसंभव सहायता करने का दावा कर रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दी जानकारी

भिवंडी नगर निगम के मेयर नारायण चौधरी ने कहा कि प्रशासन की सभी एजेंसियां पूरी क्षमता के साथ राहत कार्य में लगी हुई हैं। उनके अनुसार प्रारंभिक जानकारी में छह या सात लोगों के फंसे होने की आशंका है और सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। वहीं भिवंडी पश्चिम के विधायक महेश चौगुले ने बताया कि भवन को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था। अधिकांश लोग भवन छोड़ चुके थे, लेकिन मरम्मत कार्य के कारण कुछ मजदूर और अन्य लोग अंदर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता सभी फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है।

पुराने भवनों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

भिवंडी जैसे घनी आबादी वाले औद्योगिक शहरों में बड़ी संख्या में पुरानी और जर्जर इमारतें मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर इन भवनों का संरचनात्मक परीक्षण और आवश्यक मरम्मत बेहद जरूरी है। कई बार चेतावनी जारी होने के बावजूद भवनों का उपयोग जारी रहता है, जिससे इस तरह की दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। यह हादसा एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में भवन सुरक्षा, नियमित निरीक्षण और जोखिमपूर्ण इमारतों को समय रहते खाली कराने की आवश्यकता को उजागर करता है।

जांच और राहत कार्य पर सभी की नजर

फिलहाल प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जाएगा कि भवन के ढहने की वास्तविक वजह क्या थी और क्या सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था। राहत एवं बचाव अभियान जारी है और मृतकों तथा घायलों की संख्या में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन ने कहा है कि आधिकारिक जानकारी समय-समय पर जारी की जाएगी और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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