उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में करीब 3 हजार किसान रेशम उत्पादन से जुड़े हैं। रेशम विभाग ने 88 हजार DLF अंडों से कीट तैयार किए हैं और इस सीजन में 30 हजार किलो कोया उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
कुमाऊं: उत्तराखंड में किसान पारंपरिक खेती के साथ रेशम उत्पादन को भी आय का जरिया बना रहे हैं। रेशम विभाग की सहायता से कुमाऊं मंडल में करीब 3 हजार काश्तकार सेरीकल्चर से जुड़े हैं। मानसून के बाद शुरू हुए इस सीजन में विभाग ने 88 हजार DLF अंडों से रेशम के कीट तैयार किए हैं। अब करीब 30 हजार किलो कोया उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
कुमाऊं के 3 हजार किसान रेशम उत्पादन से जुड़े
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में रेशम की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन रही है। पारंपरिक खेती के साथ किसान सेरीकल्चर यानी रेशम उत्पादन को अपना रहे हैं। रेशम विभाग की मदद से मंडल में करीब 3 हजार काश्तकार इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।
रेशम उत्पादन के लिए किसानों को विभाग की ओर से तकनीकी सहायता और जरूरी मार्गदर्शन दिया जाता है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खेती के साथ आय का एक अतिरिक्त स्रोत विकसित करने में मदद मिल रही है।
88 हजार DLF अंडों से तैयार किए गए रेशम के कीट
मानसून सीजन के बाद रेशम उत्पादन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस सीजन के लिए रेशम विभाग ने करीब 88 हजार DLF अंडों से कीट तैयार किए हैं। इन कीटों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पालकर कोया तैयार किया जाएगा।
रेशम के कीटों के पालन में मौसम और तापमान का विशेष महत्व होता है। किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि कीट पालन में नुकसान को कम किया जा सके और उत्पादन बेहतर हो।
30 हजार किलो कोया उत्पादन का लक्ष्य
इस सीजन में कुमाऊं मंडल में करीब 30 हजार किलो कोया उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। विभाग और किसानों की कोशिश है कि तय लक्ष्य को हासिल कर रेशम उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को और मजबूत किया जाए।
कोया रेशम उत्पादन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके उत्पादन में बढ़ोतरी होने से इससे जुड़े किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना रहती है। यही वजह है कि विभाग किसानों को पारंपरिक कृषि के साथ रेशम उत्पादन अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बना सेरीकल्चर
कुमाऊं में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों को खेती के अतिरिक्त आय का विकल्प उपलब्ध कराना भी है। करीब 3 हजार किसानों का इस क्षेत्र से जुड़ना बताता है कि सेरीकल्चर धीरे-धीरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहा है।
रेशम विभाग की निगरानी में कीट पालन और कोया उत्पादन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। यदि निर्धारित 30 हजार किलो उत्पादन का लक्ष्य हासिल होता है, तो इससे क्षेत्र में रेशम आधारित गतिविधियों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।










