कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनकी सरकार की योजना की नकल की है। उन्होंने चुनाव के बाद युवाओं को 50 हजार डॉलर दिए जाने के ट्रंप के वादे का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान और बिहार ने भी उनकी योजना की नकल की।
DK Shivakumar on Trump: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चुनावी वादे का हवाला देते हुए कांग्रेस की योजनाओं और नीतियों को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया है। बेंगलुरु में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने कहा कि जिन योजनाओं और विचारों को लेकर कांग्रेस भारत में काम कर रही है, उनका प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनकी सरकार की सोच की नकल कर रहे हैं।
शिवकुमार का यह बयान ट्रंप के उस प्रस्ताव के संदर्भ में आया, जिसमें उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिधि सभा और सीनेट में जीत हासिल करने की स्थिति में अमेरिकी नागरिकों को 5,000 डॉलर देने की बात कही है।
‘अब ट्रंप हमारी नकल कर रहे हैं’
डीके शिवकुमार ने अपने संबोधन में कांग्रेस की योजनाओं को लेकर कहा कि पार्टी की सोच केवल भारत तक सीमित नहीं है। उन्होंने लोगों से सवाल करते हुए ट्रंप के 5,000 डॉलर वाले प्रस्ताव का जिक्र किया और इसे कांग्रेस की नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि अब यह विचार दुनिया के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच रहा है।
शिवकुमार ने दावा किया कि देश के कई राज्यों ने कर्नाटक की योजनाओं से प्रेरणा ली है। उन्होंने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में भी ऐसी नीतियां देखने को मिलीं। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि अब ट्रंप भी इसी तरह के वादे कर रहे हैं।
हालांकि, शिवकुमार की ओर से की गई यह तुलना एक राजनीतिक बयान है। ट्रंप के प्रस्ताव और कर्नाटक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बीच प्रत्यक्ष संबंध होने की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
बीजेपी पर भी साधा निशाना

कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए हिंदुत्व के मुद्दे का इस्तेमाल करती है। शिवकुमार ने राम मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे को लेकर भी सवाल उठाए और इसके इस्तेमाल पर आरोप लगाए। उन्होंने केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना का जिक्र करते हुए LPG की बढ़ती कीमतों पर भी सवाल उठाया। शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति जाति और धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि लोगों के कल्याण और सार्वजनिक सेवा पर केंद्रित है।
कैश ट्रांसफर और ‘रेवड़ी कल्चर’ पर बहस
भारत की राजनीति में चुनावी वादों के तहत सीधे आर्थिक लाभ देने वाली योजनाओं को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। अलग-अलग राजनीतिक दल अपने घोषणापत्रों में महिलाओं, युवाओं, किसानों और अन्य वर्गों के लिए नकद सहायता या सब्सिडी जैसी योजनाओं का ऐलान करते रहे हैं। आलोचक ऐसी घोषणाओं को अक्सर ‘रेवड़ी कल्चर’ से जोड़ते हैं और इनके सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को लेकर सवाल उठाते हैं। वहीं, राजनीतिक दलों का तर्क रहता है कि कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सहायता देना सामाजिक कल्याण का हिस्सा है।
क्या है डोनाल्ड ट्रंप का 5,000 डॉलर वाला प्रस्ताव?
ट्रंप ने Truth Social पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि यदि रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट में जीत हासिल करती है, तो वह वयस्क अमेरिकी नागरिकों के लिए 5,000 डॉलर के भुगतान का रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे। उन्होंने मतदाताओं से चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान करने की अपील भी की।
ट्रंप इससे पहले भी इस प्रस्ताव का संकेत दे चुके हैं। सितंबर में उन्होंने पहली बार रिपब्लिकन जीत की स्थिति में नागरिकों को 5,000 डॉलर दिए जाने की बात कही थी। इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्त पर संभावित असर को लेकर भी चर्चा हुई है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, यदि बड़ी संख्या में नागरिकों को यह राशि दी जाती है तो सरकार पर 1 ट्रिलियन डॉलर या उससे अधिक का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हालांकि, इस तरह की योजना को लागू करने के लिए कानूनी, बजटीय और प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।










