दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे विदाई की ओर बढ़ रहा है। आमतौर पर मानसून की वापसी 17 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से शुरू होती है। इस साल भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन सकती हैं।
Monsoon Withdrawal 2026: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे वापसी की दिशा में बढ़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए मौसम परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। आम तौर पर भारत में मानसून की वापसी सितंबर के मध्य से शुरू होती है और इसकी शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से होती है।
हालांकि, मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं होगा। मौसम में बदलाव धीरे-धीरे आएगा और अलग-अलग क्षेत्रों से मानसून की वापसी अलग समय पर होगी। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में बारिश देखने को मिल सकती है।
सामान्य से 15 फीसदी कम रही बारिश
इस साल मानसून की वापसी ऐसे समय हो रही है, जब देशभर में अब तक दर्ज बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 15 फीसदी कम है। मानसून सीजन के अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद कुल बारिश सामान्य स्तर से नीचे बनी हुई है। मानसून की शुरुआत भी इस साल अपेक्षाकृत कमजोर रही थी। जून में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
इसके बाद जुलाई में बारिश की गतिविधियों में तेजी आई और कुछ हद तक शुरुआती कमी की भरपाई हुई। हालांकि, अगस्त और सितंबर के दौरान फिर कई इलाकों में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई। देशभर में बारिश के कुल आंकड़े के साथ-साथ इसके वितरण में भी अंतर देखने को मिला है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि कई इलाकों में बारिश की कमी बनी रही। इसका असर खेती और जल संसाधनों पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरीके से पड़ सकता है।
राजस्थान से क्यों शुरू होती है मानसून की वापसी?

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी आमतौर पर उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होती है। पश्चिमी राजस्थान और कच्छ का क्षेत्र मानसून की वापसी के शुरुआती क्षेत्रों में शामिल है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून देश के अन्य हिस्सों से पीछे हटता है। आम परिस्थितियों में मानसून की वापसी सितंबर के मध्य के आसपास शुरू होती है। इस साल मौसम विभाग ने 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने का अनुमान जताया है।
हालांकि, मानसून की वापसी एक दिन में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है। किसी क्षेत्र से मानसून के हटने की घोषणा मौसम की कई परिस्थितियों का लगातार आकलन करने के बाद की जाती है।
कैसे तय होती है मानसून की वापसी?
मौसम विभाग मानसून की वापसी का आकलन करने के लिए कई मौसम संकेतों को देखता है। इनमें बारिश की गतिविधि, हवा की दिशा और वातावरण में नमी का स्तर प्रमुख हैं। जब किसी क्षेत्र में लगातार कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां नहीं होतीं, हवाओं का पैटर्न मानसून के विपरीत दिशा में बदलने लगता है और वातावरण में नमी कम होने लगती है, तब मौसम वैज्ञानिक मानसून की वापसी की परिस्थितियों का आकलन करते हैं।
इसका अर्थ यह है कि किसी इलाके में एक-दो दिन बारिश नहीं होने मात्र से मानसून की विदाई घोषित नहीं की जाती। इसके लिए लगातार मौसम संबंधी संकेतों का एक साथ अनुकूल होना जरूरी होता है।










