झारखंड के मंत्री-विधायकों का सरकारी अस्पतालों पर भरोसा कम, इलाज के लिए दिल्ली-वेल्लोर का रुख

झारखंड के मंत्री-विधायक गंभीर इलाज और फुल बॉडी चेकअप के लिए दिल्ली-वेल्लोर जाते हैं। RIMS में बेड और वेंटिलेटर की कमी से सवाल उठ रहे हैं।

झारखंड के मंत्री और विधायक सामान्य जांच के लिए रांची के अस्पतालों पर निर्भर हैं, लेकिन गंभीर इलाज और फुल बॉडी चेकअप के लिए दिल्ली व वेल्लोर को प्राथमिकता देते हैं। इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

रांची: झारखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राज्य के मंत्री और विधायक सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए रांची के अस्पतालों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन गंभीर बीमारी के इलाज और फुल बॉडी चेकअप के लिए दिल्ली और वेल्लोर का रुख करते हैं। दूसरी ओर, राज्य के सबसे बड़े अस्पताल RIMS में संसाधनों की कमी मरीजों की मुश्किलें बढ़ा रही है।

सरकारी अस्पतालों पर मंत्री-विधायकों का भरोसा क्यों कम

झारखंड में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के भरोसे के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। राज्य के मंत्री और विधायक सामान्य जांच के लिए रांची के अस्पतालों में जाते हैं, लेकिन जब मामला गंभीर बीमारी के इलाज या विस्तृत स्वास्थ्य जांच का होता है, तो उनकी पहली पसंद दिल्ली और वेल्लोर के बड़े अस्पताल बनते हैं।

यह स्थिति ऐसे समय सामने आ रही है, जब राज्य के आम मरीज सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज और पर्याप्त सुविधाओं के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं। जनप्रतिनिधियों के इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की प्रवृत्ति सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता और सुविधाओं पर सवाल खड़े करती है।

RIMS में बेड की कमी से मरीजों की परेशानी

झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स यानी Rajendra Institute of Medical Sciences भी संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। यहां कई बार बेड उपलब्ध नहीं होने की वजह से गंभीर मरीजों को फर्श पर इलाज कराने की स्थिति सामने आती है।

न्यूरो सर्जरी जैसे गंभीर मामलों में भी मरीजों को पर्याप्त बेड नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। गंभीर हालत वाले मरीजों के लिए अस्पताल में जरूरी संसाधनों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

वेंटिलेटर की कमी से गंभीर मरीज प्रभावित

RIMS में वेंटिलेटर की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक वेंटिलेटर की कमी के कारण रोजाना करीब 8 से 10 गंभीर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

गंभीर मरीजों के इलाज में वेंटिलेटर जैसी जीवनरक्षक सुविधा की भूमिका अहम होती है। ऐसे में इसकी पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने पर मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ सकता है। अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को समय पर जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन जाता है।

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

एक तरफ राज्य के मंत्री और विधायक गंभीर इलाज के लिए दिल्ली और वेल्लोर जैसे मेडिकल हब को प्राथमिकता देते हैं, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों की निर्भरता सरकारी अस्पतालों पर बनी हुई है। इससे राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा संसाधनों को लेकर बहस तेज हो सकती है।

सरकारी अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा संसाधनों को मजबूत करना जरूरी है। यदि राज्य में ही गंभीर बीमारियों के इलाज की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों, तो मरीजों को दूसरे राज्यों का रुख करने की जरूरत कम हो सकती है।

RIMS जैसे प्रमुख सरकारी संस्थान में सुविधाओं का विस्तार केवल मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

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