राजस्थान निकाय चुनाव में बड़े उलटफेर, गहलोत-शेखावत के वार्ड हारे; बारां में AAP का बोर्ड

राजस्थान निकाय चुनाव में गहलोत और शेखावत के वार्ड में हार हुई। टोंक में कांग्रेस जीती, अजमेर में 36 साल बाद सबसे बड़ी पार्टी बनी और बारां में AAP ने बहुमत पाया।

राजस्थान निकाय चुनाव में कई बड़े उलटफेर हुए। अशोक गहलोत और गजेंद्र सिंह शेखावत अपने वार्ड नहीं बचा सके। टोंक में कांग्रेस आगे रही, जबकि बारां में AAP ने 31 सीटें जीतकर पहली बार नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

जोधपुर: राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों में कई ऐसे नतीजे सामने आए हैं, जिन्होंने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कुल मिलाकर मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन कई बड़े नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी को झटके भी लगे। इसी तरह कांग्रेस ने कुछ महत्वपूर्ण निकायों में बढ़त हासिल की।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अपने-अपने वार्ड में अपनी पार्टी के उम्मीदवार को जीत नहीं दिला सके। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में कांग्रेस ने बढ़त बनाई। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में भी कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया।

इस चुनाव की एक और बड़ी खबर बारां नगर परिषद से सामने आई, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यह राजस्थान में किसी नगर परिषद में AAP के बहुमत के साथ बोर्ड बनाने की पहली स्थिति बताई जा रही है।

अजमेर में 36 साल बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी

अजमेर नगर निगम के परिणाम कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहे। कुल 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को 32 सीटें मिलीं। इस तरह कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

अजमेर को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी का राजनीतिक प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यहां कांग्रेस का सबसे बड़ी पार्टी बनना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।

उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार अजमेर में करीब 36 साल बाद कांग्रेस नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनी है। हालांकि, बोर्ड गठन के लिए अंतिम स्थिति पार्षदों के समर्थन और मेयर चुनाव के समीकरण पर निर्भर करेगी।

बीकानेर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत

10 नगर निगमों में बीकानेर ऐसा प्रमुख निगम रहा, जहां कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कुल 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतीं। इस आंकड़े के साथ पार्टी नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने की स्थिति में पहुंच गई।

बीकानेर केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल है। चुनाव परिणामों में भाजपा को यहां अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

कांग्रेस के लिए बीकानेर की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के अन्य कई प्रमुख शहरी निकायों में भाजपा ने बढ़त बनाई है।

जोधपुर में BJP और कांग्रेस बराबरी पर

जोधपुर नगर निगम में मुकाबला बेहद करीबी रहा। उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्डों में जीत दर्ज की। वहीं 11 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए, जबकि एक वार्ड का परिणाम लंबित बताया गया।

ऐसे में जोधपुर में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वे दोनों प्रमुख दलों के बीच निर्णायक स्थिति में हैं।

जोधपुर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दोनों के राजनीतिक प्रभाव वाला क्षेत्र है। लेकिन इस चुनाव में दोनों नेताओं के अपने-अपने वार्ड में उनकी पार्टी को जीत नहीं मिली।

शेखावत के वार्ड 56 में भाजपा उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि गहलोत के वार्ड 88 में कांग्रेस उम्मीदवार जीत नहीं सका। बड़े नेताओं के अपने वार्ड में हारने का परिणाम राजनीतिक रूप से खास चर्चा में है।

भरतपुर में निर्दलीय बने किंगमेकर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भाजपा बहुमत हासिल नहीं कर सकी। कुल 65 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 सीटें जीतीं।

भाजपा को 20 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 7 सीटें आईं। इसके अलावा बसपा और RLP ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की।

इन आंकड़ों के बाद भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो गई है। भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि भरतपुर के परिणाम को स्थानीय राजनीति में निर्दलीयों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

उदयपुर और भीलवाड़ा में BJP मजबूत

उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया। उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में भाजपा ने 53 सीटें जीतीं। वहीं भीलवाड़ा के 70 वार्डों में भाजपा ने 45 सीटें अपने नाम कीं।

इन दोनों शहरों में भाजपा बहुमत के साथ बोर्ड बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। परिणामों ने शहरी क्षेत्रों में पार्टी के संगठनात्मक आधार को भी मजबूत दिखाया है।

अलवर और कोटा में भी भाजपा मजबूत स्थिति में बताई जा रही है। इन दोनों निकायों में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस आगे

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में भाजपा को बड़ा झटका लगा। नगर परिषद के 45 वार्डों में कांग्रेस ने 39 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा केवल 13 सीटों पर सिमट गई।

झालावाड़ का परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे लंबे समय से वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाता रहा है। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की बढ़त ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा बढ़ा दी है।

हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में कांग्रेस की 39 और भाजपा की 13 सीटों का योग 45 से अधिक है। इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही सीटों की संख्या का निर्धारण किया जाना चाहिए।

टोंक में सचिन पायलट के क्षेत्र में कांग्रेस की जीत

पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया। टोंक नगर परिषद के 60 वार्डों में कांग्रेस ने 32 सीटें जीतीं। भाजपा को 19 सीटें मिलीं, जबकि बाकी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं।

टोंक का परिणाम कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने यहां भाजपा को पीछे छोड़ते हुए बहुमत के करीब मजबूत स्थिति बनाई है।

स्थानीय चुनावों में उम्मीदवारों और स्थानीय मुद्दों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, इसलिए इस परिणाम को सीधे किसी एक नेता के प्रभाव का परिणाम मानने के बजाय क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखना उचित होगा।

बारां में AAP ने रचा नया रिकॉर्ड

राजस्थान निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बारां नगर परिषद में बड़ा प्रदर्शन किया। कुल 60 वार्डों में AAP ने 31 सीटें जीतीं। भाजपा को 9 और कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं।

31 सीटों के साथ AAP स्पष्ट बहुमत हासिल करने की स्थिति में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह राजस्थान में किसी नगर परिषद में AAP के बहुमत के साथ बोर्ड बनाने की पहली स्थिति है।

बारां का परिणाम राजस्थान की स्थानीय राजनीति में AAP के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पार्टी के लिए अब इस प्रदर्शन को अन्य स्थानीय निकायों और आगामी चुनावों में विस्तार देने की चुनौती होगी।

कई बड़े नेता अपने वार्ड में नहीं दिला सके जीत

निकाय चुनाव में कई बड़े राजनीतिक चेहरों के अपने वार्ड में पार्टी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी अपने-अपने वार्ड में पार्टी उम्मीदवार को जीत नहीं दिला सके।

इसके अलावा राजस्थान सरकार के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, मदन दिलावर और जोराराम कुमावत से जुड़े वार्डों में भी भाजपा उम्मीदवारों को हार मिली। अलवर में चुनाव से पहले नाराजगी जताने वाले भाजपा नेता संजय शर्मा के मतदान वाले वार्ड में भी पार्टी उम्मीदवार की हार हुई।

कांग्रेस में भी बड़े नेताओं के प्रभाव वाले वार्डों में उलटफेर हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के वार्डों में पार्टी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।

निकाय चुनावों ने बदले स्थानीय राजनीतिक समीकरण

राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों में एक तरफ भाजपा ने कई प्रमुख शहरों में मजबूत स्थिति बनाई, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने अजमेर, बीकानेर, टोंक और झालावाड़ जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। निर्दलीयों ने भरतपुर और जोधपुर समेत कई निकायों में निर्णायक भूमिका हासिल की।

बारां में AAP की सफलता ने चुनाव परिणामों को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सभी दलों की नजर नगर निकायों में बोर्ड गठन के अगले चरण पर होगी।

इन चुनाव परिणामों के बाद राजस्थान की राजनीति में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर भी मुकाबला तेज होने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर किस दल को कितना समर्थन मिलता है, इसका असर आगे की चुनावी रणनीतियों पर दिखाई दे सकता है।

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