बॉलीवुड की दमदार अभिनेत्री भूमि पेडनेकर इन दिनों अपनी वेब सीरीज “दलदल” को लेकर चर्चा में हैं। इस सीरीज में वह पुलिस अधिकारी रीटा फरेरा का किरदार निभा रही हैं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: बॉलीवुड में महिलाओं के मुद्दों पर बनी फिल्मों की बात की जाए, तो भूमि पेडनेकर का नाम सबसे आगे आता है। अपनी डेब्यू फिल्म 'दम लगा के हईशा' से लेकर 'टॉइलेट एक प्रेम कथा', 'शुभ मंगल सावधान', 'सांड की आंख', 'भीड़' और 'भक्षक' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता है। इन दिनों वह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी सीरीज दलदल को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें वह पुलिस अधिकारी रीटा फरेरा का किरदार निभा रही हैं।
मुंबई में जन्मी 36 साल की भूमि एक राजनीतिक परिवार से आती हैं और वह राज्य के पूर्व गृह मंत्री दिवंगत सतीश पेडनेकर की बेटी हैं। हालांकि, उन्होंने कभी अपने परिवार के रसूख का इस्तेमाल नहीं किया और खुद अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपने करियर की राह बनाई। मीडिया से खास बातचीत में भूमि पेडनेकर ने महिलाओं के मुद्दों, महिला प्रधान फिल्मों में अपनी भूमिका और निजी जिंदगी की चुनौतियों के बारे में खुलकर चर्चा की।
महिला प्रधान फिल्मों की झंडाबरदार
भूमि पेडनेकर ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म “दम लगा के हईशा” से की थी। इसके बाद उन्होंने “टॉइलेट एक प्रेम कथा”, “शुभ मंगल सावधान”, “सांड की आंख”, “भीड़” और “भक्षक” जैसी महिला केंद्रित फिल्मों में अपनी भूमिका निभाकर महिलाओं के मुद्दों पर अपनी छाप छोड़ी। भूमि कहती हैं:
'सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज है महिलाओं के खिलाफ हिंसा। यह घिनौना सच आज भी हमारे समाज में मौजूद है और इसे नॉर्मलाइज कर दिया गया है। ऐसे मामलों को केवल रूटीन की खबरें बनाना बेहद निराशाजनक है।'
भूमि का मानना है कि महिलाओं से जुड़ी समस्याओं पर स्क्रीन पर और ऑफस्क्रीन दोनों जगह जागरूकता लाना जरूरी है।

समाज में सेक्सिज्म और बुलिंग का सामना
भूमि ने कहा कि आज भी सेक्सुअल पैट्रियार्की और कैजुअल सेक्सिज्म आम हैं, लेकिन अक्सर लोगों को यह एहसास ही नहीं होता कि वे इसका सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म सेट पर उन्हें इस तरह के अनुभव कम ही हुए हैं, लेकिन जब उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में कदम रखा, तो लोगों ने कभी-कभी उन्हें गंभीरता से नहीं लिया।
लोग सोचते थे कि कोई पुरुष ही बिजनेस मीटिंग में बोलेगा। मुझे समझाना पड़ा कि जेंडर मायने नहीं रखता, काम की गुणवत्ता मायने रखती है। भूमि पेडनेकर ने सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और बुलिंग के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इसे केवल नेगेटिविटी और फेक न्यूज से भरा दलदल बताया। इस दुनिया में कुछ भी रियल नहीं है। हर चीज़ बनावटी है। जो जानकारी हमें मिलती है, वह अक्सर वास्तविकता से दूर होती है। मेरा घड़ा भर चुका है। इसे ट्रोलिंग नहीं बल्कि बुलिंग कहूंगी।
उन्होंने कहा कि स्कूल में भी बुलिंग का शिकार रही हैं, और अब सोशल मीडिया पर यह अनुभव और गहरा हो गया है। अगर कोई मुझे कहता है ‘आइ होप यू विल डाय’, तो यह बुलिंग है। मजबूत होने के बावजूद इसका असर होता है। इंटरनेट पर किसी को बुलिंग होते देख समाज की जिम्मेदारी बनती है कि उसे रोकें।
भूमि ने सोशल मीडिया पर “लाइक्स और शेयर” के पीछे के वेलिडेशन कल्चर की भी आलोचना की। उनका कहना है कि लोगों को किसी भी विषय पर प्रतिक्रिया देने से पहले समझदारी और संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य और परिवार का सहारा
भूमि ने बताया कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग के दौरान उनका परिवार, दोस्तों और चाहने वालों का समर्थन उनके लिए कवच बनकर खड़ा रहा। अगर आपका परिवार और दोस्त आपके साथ हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर कम होता है। यह जरूरी है कि आप अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखें। भूमि ने कहा कि उनकी वेब सीरीज का नाम “दलदल” उनके निजी अनुभवों से भी जुड़ा है।
उन्होंने याद किया कि अपने पिता की लंबी बीमारी के दौरान परिवार की चिंता और सोशल मीडिया पर बुलिंग ने उन्हें बिल्कुल दलदल में धंसा हुआ महसूस कराया।









