बिहार: बिहार में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और कई इलाकों में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच सरकार ने राहत और बचाव को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने नवगछिया-राघोपुर दियारा, कोसी-गंगा संगम क्षेत्र, बेगूसराय और बख्तियारपुर समेत कई संवेदनशील इलाकों का जायजा लिया। इसी बीच बिहार सरकार के आग्रह पर पश्चिम बंगाल सरकार ने फरक्का बराज के सभी गेट खोल दिए हैं। इससे गंगा के पानी का डिस्चार्ज बढ़ने और बिहार में पानी का दबाव कम होने की उम्मीद जताई गई है।
मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण के दौरान गंगा की मुख्य धारा, सहायक नदियों, दियारा क्षेत्रों, निचले इलाकों और संवेदनशील तटबंधों की स्थिति को देखा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे। प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, राहत सामग्री और दूसरी जरूरी सुविधाएं समय पर पहुंचाने को कहा गया है।
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण भागलपुर, बेगूसराय, मुंगेर, पटना समेत कई इलाकों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ा हुआ है। भागलपुर में गंगा के दबाव के कारण तटबंध टूटने की घटना भी सामने आई है, जबकि बेगूसराय के कुछ इलाकों में बांध क्षतिग्रस्त होने से पानी फैलने की स्थिति बनी है। मुंगेर के कुछ गांवों में भी लोग बाढ़ की आशंका को देखते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया था। इसके बाद फरक्का के सभी गेट खोले जाने की जानकारी सामने आई। बिहार सरकार को उम्मीद है कि इससे पानी का डिस्चार्ज तेज होगा और गंगा के किनारे के इलाकों में जलस्तर का दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है।
हालांकि, फरक्का बराज के गेट खुलने के बाद भी प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जलस्तर कम होने के संकेत मिलने के बावजूद संवेदनशील इलाकों में निगरानी में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। तटबंधों की लगातार जांच, जलस्तर की मॉनिटरिंग और राहत-बचाव टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने भागलपुर एयरपोर्ट पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी की। बैठक में बाढ़ की स्थिति, गंगा के जलस्तर, राहत-बचाव कार्य और प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि कुछ इलाकों में पानी का दबाव तेजी से कम होने लगा है और आने वाले समय में स्थिति में सुधार की उम्मीद है। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी जारी रखने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों को मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP के अनुसार हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। यदि किसी इलाके में स्थिति बिगड़ती है तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पहले से तैयारी रखी जाए। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया।
गंगा के उफान के बीच मौसम विभाग ने भी बिहार के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। उपलब्ध ताजा मौसम पूर्वानुमान में 24 अगस्त को 24 जिलों में बारिश का अनुमान था और राज्य में 29 अगस्त तक बारिश की गतिविधि जारी रहने की संभावना बताई गई थी। मंगलवार यानी 25 अगस्त को भी कई जिलों में बारिश की संभावना है। ऐसे में पहले से बाढ़ और जलभराव से जूझ रहे इलाकों में बारिश प्रशासन की चुनौती बढ़ा सकती है।
बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर निचले इलाकों में सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। कई जगह खेतों में पानी पहुंच गया है, जबकि गांवों और मुख्य सड़कों के बीच संपर्क प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को लगातार जलस्तर पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
पटना में भी गंगा का जलस्तर चिंता का कारण बना हुआ है। गंगा के साथ पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर ने भी निचले इलाकों में परेशानी बढ़ाई है। कई जगह जलभराव और आवागमन से जुड़ी दिक्कतों की स्थिति सामने आई है।
भागलपुर की स्थिति फिलहाल खास तौर पर संवेदनशील बनी हुई है। गंगा के तटबंध टूटने के बाद कई इलाकों में पानी फैल गया है। यहां तक कि बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के गांव और आवास तक बाढ़ का पानी पहुंचने की खबर सामने आई है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें मौके पर निगरानी और राहत कार्य में जुटी हैं।
बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा चिंता आवागमन, पीने के पानी, पशुओं के चारे और खाद्य सामग्री को लेकर है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच तटबंधों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने कमजोर और संवेदनशील स्थानों पर तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन विभाग को लगातार पेट्रोलिंग और निगरानी करने को कहा गया है, ताकि कहीं भी रिसाव या कटाव की स्थिति पैदा होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन की ओर से यह भी कोशिश की जा रही है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में देरी न हो। नावों और बचाव दलों को जरूरत वाले इलाकों में तैयार रखने पर जोर है। गंभीर स्थिति वाले क्षेत्रों में जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर तत्काल निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा का पानी बढ़ने के कारण दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें ज्यादा बढ़ी हैं। इन इलाकों में नदी के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी का असर भी बड़े क्षेत्र में देखने को मिलता है। खेती की जमीन डूबने के साथ-साथ ग्रामीण सड़कों और संपर्क मार्गों पर भी पानी फैलने का खतरा रहता है।
हालांकि अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में कुछ क्षेत्रों में पानी का दबाव कम होने की जानकारी दी है। इससे प्रशासन को थोड़ी राहत मिली है। फरक्का के सभी गेट खुलने के बाद आने वाले समय में जलस्तर और पानी के बहाव में क्या बदलाव आता है, इस पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
मौसम विभाग की ओर से बारिश की संभावना के कारण प्रशासन के सामने एक और चुनौती है। यदि बाढ़ प्रभावित इलाकों में तेज बारिश होती है तो स्थानीय जलभराव और नदियों के जलस्तर पर इसका अतिरिक्त असर पड़ सकता है। इसलिए जिला प्रशासन को बारिश और नदी दोनों की स्थिति पर साथ-साथ निगरानी रखने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री के हवाई सर्वेक्षण और समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी संभावित आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल बिहार में गंगा के किनारे बसे जिलों में प्रशासन हाई अलर्ट पर है। एक तरफ नदी का जलस्तर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है, दूसरी तरफ बारिश की संभावना के कारण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फरक्का बराज के सभी गेट खुलने से पानी का दबाव कम होने की उम्मीद है, लेकिन इसका असर जमीन पर कितनी तेजी से दिखाई देता है, यह आने वाले घंटों और दिनों में स्पष्ट होगा।
कुल मिलाकर, बिहार में गंगा का उफान अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे कर हालात का जायजा लिया है और अधिकारियों को राहत-बचाव, तटबंधों की सुरक्षा तथा लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। फरक्का बराज के सभी गेट खुलने से जलनिकासी बेहतर होने की उम्मीद है। वहीं 25 अगस्त को राज्य के कई जिलों में बारिश की संभावना के बीच प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी