सोने की कीमतों में हाल के दिनों में तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड फ्यूचर्स 14 मई के बाद पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया है।
बिजनेस न्यूज़: सोने की कीमत में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड फ्यूचर्स 24 अगस्त 2026 को 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया। यह मई के बाद सोने का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब 4,706 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा। इस तेजी के पीछे कमजोर अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड को लेकर बदली उम्मीदें और सुरक्षित निवेश की मांग जैसे कई कारण हैं।
सोने की तेजी में चीन की भूमिका भी निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दुनिया के सबसे बड़े आधिकारिक सोना खरीदारों में शामिल चीन लगातार अपने रिजर्व में गोल्ड बढ़ा रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने जुलाई में करीब 20 टन सोना खरीदा और उसका आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,366 टन हो गया।
कमजोर डॉलर ने सोने को दिया सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत आमतौर पर डॉलर में तय होती है। ऐसे में जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है तो दूसरी मुद्राओं में निवेश करने वाले खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इससे इसकी मांग बढ़ सकती है। हालिया तेजी में डॉलर की कमजोरी अहम वजह रही है। 21 अगस्त को भी कमजोर डॉलर के बीच सोना तीन महीने से ज्यादा के उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद 24 अगस्त को अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स ने 4,700 डॉलर का स्तर पार कर लिया।
इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में सरकारी बॉन्ड बायबैक योजना और आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों को लेकर बाजार की नजर फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर है। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और कमजोर डॉलर ने गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति सोने को आकर्षक बनाया है।
चीन क्यों बढ़ा रहा है सोने का भंडार?

चीन के केंद्रीय बैंक ने लगातार 21 महीने तक अपने आधिकारिक गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की है। जुलाई की खरीद के बाद उसका भंडार 2,366 टन हो गया, जो उसके कुल आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 8 प्रतिशत है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, यह खरीदारी चीन की रिजर्व डायवर्सिफिकेशन रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
चीन के लिए सोना रणनीतिक रिजर्व एसेट भी है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितता और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्रीय बैंक सोने को क्रेडिट जोखिम से मुक्त और अपेक्षाकृत सुरक्षित संपत्ति के रूप में देखते हैं।
चीन की सोने की कुल खरीद कितनी है?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, चीन ने 2026 की पहली छमाही में आधिकारिक तौर पर अपने गोल्ड रिजर्व में 40 टन की बढ़ोतरी की थी। जून में ही पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 15 टन सोना खरीदा था। जुलाई में 20 टन की अतिरिक्त खरीद के बाद आधिकारिक भंडार 2,366 टन तक पहुंच गया। इसके अलावा चीन के भौतिक सोने के आयात में भी मजबूती दिखाई दी।
जून में चीन ने लगभग 152 टन नेट गोल्ड आयात किया, जो मार्च 2024 के बाद सबसे अधिक था। 2026 की पहली छमाही में कुल नेट आयात लगभग 764 टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 138 प्रतिशत अधिक था।
भारत में भी सोने की कीमत पर पड़ेगा असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। घरेलू कीमतें तय होने में अंतरराष्ट्रीय गोल्ड रेट के साथ-साथ रुपये की विनिमय दर, आयात लागत और घरेलू मांग की भूमिका रहती है। इसलिए वैश्विक बाजार में लगातार तेजी रहने पर भारत में सोना महंगा होने का दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय निवेशकों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय गोल्ड रेट के साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम और डॉलर की दिशा पर रहेगी। अमेरिका में आने वाले महंगाई आंकड़े और फेड चेयर के आगामी भाषण से ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं, जिसका सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ सकता है।










