बिहार कैबिनेट विस्तार: 32 मंत्रियों ने ली शपथ, कई चर्चित नाम रह गए बाहर

बिहार कैबिनेट विस्तार पूरा हो गया है, जिसमें 32 मंत्रियों ने शपथ ली। हालांकि इस बार कई चर्चित नामों को जगह नहीं मिली, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। जानें पूरी

Bihar की राजधानी Patna के Gandhi Maidan में गुरुवार को आयोजित “सम्राट कैबिनेट” के विस्तार में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मंत्रिमंडल में Bharatiya Janata Party के 15 और Janata Dal (United) के 13 नेता शामिल हुए।

बिहार: पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार को बिहार की नई कैबिनेट का भव्य विस्तार हुआ, जिसमें कुल 32 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। यह विस्तार राज्य की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सत्ता संतुलन के साथ-साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश साफ दिखाई दी।

नई सरकार में बीजेपी, जेडीयू और सहयोगी दलों के बीच सीटों का संतुलन बनाया गया है। बीजेपी के 15, जेडीयू के 13, जबकि RLJP के 2, और हम तथा आरएलएम से एक-एक नेता को कैबिनेट में जगह मिली है। हालांकि, इस सूची से कई ऐसे चर्चित नाम गायब रहे, जिनकी मंत्रिमंडल में एंट्री को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं।

चर्चित चेहरों को नहीं मिला मौका

कैबिनेट विस्तार से पहले कई नेताओं के मंत्री बनने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज थी। इनमें बीजेपी और जेडीयू दोनों के कई प्रमुख नाम शामिल थे, लेकिन अंतिम सूची में इनका नाम नहीं आया। बीजेपी खेमे से जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा थी, उनमें शामिल थे—

  • Maithili Thakur (अलीनगर विधायक)
  • नीरज सिंह बबलू
  • जीवेश मिश्रा
  • मनोज शर्मा (अरवल विधायक)
  • रजनीश सिंह (तेघड़ा विधायक)

इनमें से कई नेताओं को मंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अंततः कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी। महादलित वर्ग से जुड़े जिन नामों की चर्चा थी, उनमें कृष्ण कुमार ऋषि और संगीता कुमार शामिल थे, लेकिन वे भी शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में जगह नहीं बना पाए।

जेडीयू के कई चेहरे भी बाहर

जेडीयू खेमे में भी कई नेताओं को लेकर अटकलें थीं, लेकिन अंतिम सूची ने सभी को चौंका दिया। जिन नामों की चर्चा थी, उनमें शामिल हैं—

  • रूहैल रंजन
  • अतिरेक कुमार
  • चेतन आनंद
  • कोमल सिंह
  • ऋतुराज कुमार
  • नचिकेता मंडल

इन सभी नेताओं को मंत्री पद की दौड़ में माना जा रहा था, लेकिन किसी को भी कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने OBC, EBC, दलित और सवर्ण वर्गों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।

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