BMC चुनाव से पहले राज ठाकरे का "हम हिंदू हैं, हिंदी नहीं" बयान राजनीति में गरमाई। नितेश राणे ने पलटवार किया, कहा "हम हिंदू हैं… उर्दू नहीं।" भाषा और सांस्कृतिक पहचान चुनावी मुद्दों में मुख्य रही।
Mumbai: महाराष्ट्र में आगामी निकाय चुनाव के बीच राजनीतिक बयानबाजी और वार-पलटवार तेज हो गया है। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के एक बयान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। राज ठाकरे ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, "हम हिंदू हैं, हिंदी नहीं।" इस बयान के बाद बीजेपी नेता नितेश राणे ने पलटवार करते हुए कहा, "हम हिंदू हैं… उर्दू नहीं! मुंबई महादेव।" इस बयान से चुनावी राजनीति में भाषा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा फिर से उभर गया है।
राज ठाकरे का बयान और प्रतिक्रिया
रविवार को हुए एक कार्यक्रम में राज ठाकरे ने हिंदू धर्म और हिंदी भाषा के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए यह बयान दिया। उनका कहना था कि मनसे का हिंदू समाज से संबंध है, लेकिन यह हिंदी भाषा तक सीमित नहीं है। इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने आलोचना और मजाक दोनों की सीमा पर प्रतिक्रिया दी।
बीजेपी के फायरब्रांड नेता नितेश राणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज करते हुए लिखा, "हम हिंदू हैं… उर्दू नहीं! मुंबई महादेव।" राणे के इस बयान से साफ है कि चुनाव में भाषा और धर्म को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो रहे हैं।
फडणवीस के बयान पर राउत का पलटवार
इससे पहले, बीजेपी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा था कि मुंबई का अगला मेयर हिंदू और मराठी होगा। इस बयान पर शिवसेना-यूबीटी नेता संजय राउत ने रविवार को पलटवार किया। उन्होंने कहा, "सीधे कहो कि मराठी मेयर बनेगा। आप बीच में 'हिंदू' शब्द क्यों ला रहे हो? मराठी कहते हुए आपकी जीभ क्यों लड़खड़ा रही है? मुंबई महाराष्ट्रियों की है, हिंदुत्व मत सिखाओ।"

संजय राउत ने फडणवीस और शिंदे गुट पर भी निशाना साधते हुए कहा, "शिवाजी महाराज और बाल ठाकरे महाराष्ट्र में पैदा हुए थे। औरंगजेब गुजरात में पैदा हुआ था, इसलिए हमें फडणवीस जैसे लोग हिंदुत्व नहीं सिखाएंगे। शिंदे गुट दिल्ली की नीतियों के बूट चाटने वाले हैं। उनका हिंदुत्व से कोई संबंध नहीं है।"
भाषा और सांस्कृतिक पहचान बन रही चुनावी मुद्दा
बता दें कि इस बार BMC चुनाव में भाषा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर राजनीतिक लड़ाई अधिक तेज है। मराठी और हिंदी भाषियों के बीच टकराव का मुद्दा चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहा है।
राज ठाकरे की बात में हिंदू पहचान पर जोर है, जबकि नितेश राणे ने इसे उर्दू और हिंदी के मुद्दे से जोड़कर पलटवार किया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयानबाजी वोटरों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है, खासकर उन मराठी और हिंदू मतदाताओं को लक्षित करते हुए जो सांस्कृतिक और भाषा संबंधी मुद्दों पर संवेदनशील हैं।
महायुति गठबंधन के निर्विरोध उम्मीदवार
इस चुनाव से पहले ही सत्ताधारी महायुति गठबंधन के 68 उम्मीदवार निर्विरोध जीत चुके हैं। इनमें बीजेपी के 44, शिवसेना (शिंदे गुट) के 22 और एनसीपी (अजित पवार गुट) के 2 उम्मीदवार शामिल हैं। यह स्पष्ट करता है कि चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन का प्रभाव मजबूत है, लेकिन इसके बावजूद भाषा और सांस्कृतिक मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान की तैयारी
महाराष्ट्र में कुल 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान 15 जनवरी को निर्धारित किया गया है। इसके नतीजे अगले दिन 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। मतदान से पहले ही राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बार का चुनाव मुख्य रूप से 'भाषा', 'धर्म' और 'सांस्कृतिक पहचान' के मुद्दों पर केंद्रित नजर आ रहा है।












