ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव से पहले लूला दा सिल्वा और फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच मुकाबला कड़ा है। अंतिम दिनों में धार्मिक विवाद, सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के आरोप, अपराध, महंगाई और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे चुनावी अभियान पर हावी हैं।
ब्रासीलिया: ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले सत्तारूढ़ वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच मुकाबला बेहद कड़ा बना हुआ है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में दोनों खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप, सोशल मीडिया विवाद और धार्मिक मुद्दे प्रमुख हो गए हैं। हालिया सर्वेक्षणों में दोनों के बीच पहले चरण और संभावित दूसरे चरण की तस्वीर करीबी दिखाई दे रही है।
लूला बनाम फ्लावियो बोल्सोनारो की सीधी टक्कर
80 वर्षीय लूला चौथी बार, हालांकि गैर-लगातार कार्यकाल के लिए, राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं। उनके सामने 45 वर्षीय सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो हैं, जो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं।
ब्राजील में पहले चरण का मतदान 4 अक्टूबर को होना है। मौजूदा सर्वेक्षणों में लूला पहले चरण में आगे दिखाई देते हैं, लेकिन कई सर्वेक्षणों में उनका अंतर सीमित है। यदि कोई उम्मीदवार आवश्यक बहुमत हासिल नहीं करता है तो 25 अक्टूबर को दूसरे चरण का मतदान होगा।
हालिया Datafolha सर्वेक्षण में संभावित दूसरे चरण के मुकाबले में लूला को 48% और फ्लावियो को 45% समर्थन मिला। वहीं अन्य सर्वेक्षणों में दोनों के बीच अंतर अलग-अलग रहा है और कुछ में फ्लावियो मामूली बढ़त पर भी दिखाई दिए। इन आंकड़ों को चुनाव परिणाम की भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अंतिम बहस से दोनों प्रमुख उम्मीदवार दूर
चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में लूला और फ्लावियो दोनों ने गुरुवार को टीवी ग्लोबो की प्रस्तावित अंतिम टेलीविजन बहस में हिस्सा नहीं लिया। इसके चलते बहस रद्द करनी पड़ी।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि चुनाव से पहले दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के बीच सीधा सार्वजनिक संवाद मतदाताओं को उनके कार्यक्रमों और नीतियों की तुलना का अवसर दे सकता था। Associated Press के अनुसार, दोनों उम्मीदवारों ने इसके बजाय अलग-अलग ऑनलाइन प्रसारण किए।
धार्मिक विवाद बना चुनावी मुद्दा
अंतिम दिनों में ब्राजील की संरक्षक संत मानी जाने वाली नोसा सेन्योरा अपारेसिदा को लेकर विवाद चुनाव अभियान के केंद्र में आ गया।
सोशल मीडिया पर दावा फैलाया गया कि यदि फ्लावियो बोल्सोनारो राष्ट्रपति बने तो वह अपारेसिदा को ब्राजील की संरक्षक संत के पद से हटाने की कोशिश करेंगे। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड में फ्लावियो या उनकी टीम की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव या घोषणा नहीं मिली है। संबंधित दावा एक पुराने विधेयक से जुड़ा था, जिसे 2007 में एक अन्य सांसद ने पेश किया था और 2008 में वह प्रस्ताव ही समाप्त हो गया था।
फ्लावियो ने इस दावे को खारिज किया और इसे झूठी सूचना बताया। मामले में ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट यानी TSE को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। अदालत ने उन पोस्ट को हटाने का आदेश दिया, जिनमें फ्लावियो को संत का दर्जा हटाने की कथित योजना से तथ्य के रूप में जोड़ा गया था।
इस विवाद ने चुनाव में धर्म की भूमिका को फिर चर्चा में ला दिया है। लूला कैथोलिक पृष्ठभूमि से आते हैं, जबकि फ्लावियो को ब्राजील की तेजी से बढ़ती इवेंजेलिकल आबादी के बीच समर्थन मिलता है।
लूला ने धार्मिक प्रतीकों के साथ दिया संदेश
विवाद के बीच लूला चुनावी कार्यक्रमों में नोसा सेन्योरा अपारेसिदा की तस्वीर और प्रतिमा के साथ दिखाई दिए। उन्होंने संत से जुड़े प्रतीक और परंपरा के सम्मान पर जोर दिया।
इस घटनाक्रम को उनके अभियान की ओर से धार्मिक मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के रूप में देखा गया। दूसरी ओर, फ्लावियो और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
लूला की टिप्पणी पर भी विवाद
अभियान के अंतिम दिनों में लूला की पुरुषों के प्रोस्टेट जांच को लेकर की गई टिप्पणी भी विवाद में आ गई।
लूला ने कहा था कि पुरुष स्वास्थ्य जांच के मामले में डरते हैं, जबकि महिलाएं कम उम्र से ही स्त्री रोग संबंधी जांच की प्रक्रिया से परिचित होती हैं। इस टिप्पणी के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर अलग संदर्भ में प्रसारित हुए।
फ्लावियो ने इसे महिलाओं और पुरुषों को लेकर अनुचित टिप्पणी बताते हुए लूला पर निशाना साधा। इस विवाद ने चुनावी अभियान में सोशल मीडिया की भूमिका और राजनीतिक बयानों के छोटे वीडियो क्लिप के प्रसार को भी उजागर किया।

लूला का दावा- पहले चरण में ही जीत
लूला ने चुनाव प्रचार के दौरान पहले चरण में जीत का भरोसा जताया। एक पॉडकास्ट में उन्होंने फ्लावियो पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके प्रतिद्वंद्वी में इमारत के मैनेजर की नौकरी के लिए भी पर्याप्त योग्यता नहीं है।
हालांकि, मौजूदा सर्वेक्षणों में पहले चरण में किसी उम्मीदवार के लिए स्पष्ट बहुमत दिखाई नहीं दे रहा है। 13 उम्मीदवारों वाली दौड़ में लूला और फ्लावियो सबसे आगे चल रहे हैं, लेकिन दोनों के बीच अंतर सीमित है।
महंगाई और अपराध बने मतदाताओं की चिंता
लूला के समर्थक उनके कार्यकाल में रोजगार, सामाजिक कल्याण और अमेजन क्षेत्र में वनों की कटाई कम होने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।
वहीं, सरकार के सामने जीवन-यापन की लागत और अपराध जैसी चुनौतियां भी हैं। चुनावी अभियान में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
लूला ने चुनाव से पहले सामाजिक कल्याण से जुड़े भुगतान बढ़ाने और खेल सट्टेबाजी पर रोक लगाने सहित कई कदम उठाए। उनकी पार्टी के नेताओं का कहना है कि लूला के पास सुधार लागू करने के लिए राजनीतिक अनुभव और समर्थन मौजूद है।
फ्लावियो ने अपराध और सुरक्षा को बनाया मुद्दा
फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा को अपने अभियान के प्रमुख मुद्दों में रखा है। उनके समर्थकों का कहना है कि वह अपराध के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएंगे।
फ्लावियो के अभियान में उनके पिता जायर बोल्सोनारो की राजनीतिक विरासत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पूर्व राष्ट्रपति ब्राजील के दक्षिणपंथी और रूढ़िवादी मतदाताओं के बीच अब भी प्रभाव रखते हैं।
फ्लावियो ने अपने पिता की तस्वीर के साथ कई चुनावी कार्यक्रम किए हैं और खुद को उस राजनीतिक धारा के उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया है।
डोनाल्ड ट्रंप की भी ब्राजील चुनाव पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ब्राजील के चुनाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह मतदान पर “बहुत करीब से” नजर रख रहे हैं।
ट्रंप और जायर बोल्सोनारो के बीच राजनीतिक निकटता पहले से चर्चा में रही है। फ्लावियो के अभियान में भी अंतरराष्ट्रीय दक्षिणपंथी राजनीति के संदर्भों का इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि, ब्राजील के चुनाव में अंतिम फैसला वहां के मतदाता करेंगे और किसी बाहरी नेता की टिप्पणी चुनाव परिणाम का संकेत नहीं देती।
फ्लावियो पर भ्रष्टाचार मामले की जांच
चुनाव प्रचार के दौरान फ्लावियो को एक अन्य विवाद का सामना भी करना पड़ा। उनके पिता पर आधारित बायोपिक Dark Horse की फंडिंग को लेकर उनका नाम जांच में आया।
फ्लावियो ने स्वीकार किया कि उन्होंने जेल में बंद बैंकर डेनियल वोरकारो से फिल्म के लिए वित्तीय सहायता मांगी थी। वोरकारो ब्राजील के एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले के केंद्र में हैं।
यह मुद्दा चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में फ्लावियो के लिए राजनीतिक विवाद का एक हिस्सा बन गया है।
ध्रुवीकृत राजनीति के बीच निर्णायक चरण
ब्राजील का चुनाव लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच हो रहा है। लूला सामाजिक कल्याण और आर्थिक नीतियों को अपने अभियान में प्रमुखता दे रहे हैं, जबकि फ्लावियो सुरक्षा, अपराध और रूढ़िवादी राजनीतिक मूल्यों पर जोर दे रहे हैं।
धार्मिक विवाद, सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के आरोप, व्यक्तिगत हमले और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों ने चुनावी चर्चा को और तीखा बना दिया है।
पहले चरण के मतदान में यदि कोई उम्मीदवार आवश्यक बहुमत हासिल नहीं करता है तो लूला और फ्लावियो के बीच 25 अक्टूबर को संभावित दूसरे चरण में मुकाबला हो सकता है। मौजूदा सर्वेक्षणों में संभावित दूसरे चरण की तस्वीर बेहद करीबी है, इसलिए अंतिम परिणाम मतदान और आधिकारिक मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।












