Drishyam 3 Review: अजय देवगन ने फिर जीता दिल, जयदीप अहलावत की एंट्री से बढ़ा सस्पेंस

Drishyam 3 Review: अजय देवगन की विजय सलगांवकर के रूप में वापसी और जयदीप अहलावत की दमदार एंट्री ने फिल्म के सस्पेंस और टेंशन को बढ़ाया है। जानें कैसी है फिल्म

'शब्दों में झूठ छिप सकता है, लेकिन दृश्य कभी झूठ नहीं बोलते'—इसी सोच के साथ 2015 में विजय सलगांवकर ने 'दृश्यम' में ऐसा जाल बुना था कि पुलिस और पूरा सिस्टम उसके सामने उलझ गया। विजय का किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।

  • मूवी रिव्यू: दृश्यम 3 - द कन्क्लूजन
  • ऐक्टर: अजय देवगन, जयदीप अहलावत, श्रिया सरन, तब्बू, रजत कपूर, प्रकाश राज, सौरभ शुक्ला, इश‍िता दत्ता
  • श्रेणी: Hindi, Crime, Suspense, Thriller
  • डायरेक्टर: अभिषेक पाठक
  • अवधि: 2 Hrs 30 Min

एंटरटेनमेंट न्यूज़: अजय देवगन, तब्बू, जयदीप अहलावत, प्रकाश राज और श्रिया सरन स्टारर 'दृश्यम 3: द कन्क्लूजन' 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी यह फिल्म चर्चित 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी की कहानी को आगे बढ़ाती है। विजय सलगांवकर के किरदार को एक बार फिर ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है, जहां परिवार को बचाने के लिए उसे अपनी बनाई हुई कहानी और पुलिस की जांच के बीच संतुलन कायम करना है।

क्या है 'दृश्यम 3' की कहानी?

फिल्म की कहानी पिछली दोनों फिल्मों की घटनाओं से जुड़ी हुई है। इसलिए अगर आपने 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' नहीं देखी हैं, तो तीसरे पार्ट की कहानी और किरदारों के बीच के रिश्तों को समझने में परेशानी हो सकती है। कहानी की शुरुआत मीरा देशमुख के इर्द-गिर्द होती है। अपने बेटे समीर को खोने के बाद वह भावनात्मक रूप से बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए पति महेश देशमुख पुराने मामले को दोबारा खोलने की कोशिश करते हैं। इसी के बाद क्राइम ब्रांच के एसपी राजवीर सिंह तोमर की कहानी में एंट्री होती है।

जयदीप अहलावत द्वारा निभाया गया राजवीर विजय सलगांवकर और उसके परिवार की जिंदगी में एक नई चुनौती लेकर आता है। इस बार पुलिस के पास कुछ नए सबूत और गवाह हैं। साथ ही विजय के खिलाफ कोर्ट में पैरवी करने के लिए अनुभवी वकील इंद्रजीत शेट्टी भी मौजूद हैं। अब कहानी का केंद्रीय सवाल पिछली फिल्मों के चर्चित 2 अक्टूबर से आगे बढ़कर 23 जुलाई को हुई घटना पर टिक जाता है।

स्क्रीनप्ले में है धैर्य, लेकिन असली रोमांच बाद में

अभिषेक पाठक ने फिल्म की कहानी को हिंदी वर्जन के लिए अलग तरीके से विकसित किया है। शुरुआती हिस्से में केस और किरदारों की जमीन तैयार करने में काफी समय लगाया गया है। इस वजह से कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार धीमी महसूस हो सकती है। हालांकि, फिल्म का तनाव लगातार बना रहता है। इंस्पेक्टर गायतोंडे के हल्के-फुल्के पल गंभीर कहानी के बीच मनोरंजन जोड़ते हैं। इंटरवल के बाद कोर्टरूम ड्रामा शुरू होने के साथ फिल्म ज्यादा दिलचस्प हो जाती है और विजय के सामने खड़ी मुश्किलें कहानी को आगे खींचती हैं।

फिल्म में कुछ घटनाक्रम ऐसे भी हैं जो कहानी को सुविधाजनक तरीके से विजय के पक्ष में जाते हुए दिखाते हैं। यही वजह है कि कुछ मोड़ पूरी तरह स्वाभाविक महसूस नहीं होते। जयदीप अहलावत और प्रकाश राज के किरदारों को शुरुआत में बड़ी चुनौती के रूप में पेश किया गया है, लेकिन उनका प्रभाव हर जगह समान नहीं रहता।

अजय देवगन की आंखों में दिखता है विजय का आत्मविश्वास

'दृश्यम' फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत विजय सलगांवकर और दर्शकों के बीच बना भावनात्मक जुड़ाव है। दर्शक जानते हैं कि वह किस तरह परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करता है और इसी वजह से उसकी हर चाल कहानी का अहम हिस्सा बन जाती है। अजय देवगन ने एक बार फिर कम संवाद और ज्यादा एक्सप्रेशन वाले अभिनय से विजय के किरदार को मजबूत बनाया है। उनकी गंभीरता, चेहरे के भाव और आंखों का अभिनय फिल्म के कई दृश्यों में खास असर छोड़ता है।

जयदीप अहलावत एसपी राजवीर के रूप में प्रभावशाली नजर आते हैं। प्रकाश राज भी वकील के किरदार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। श्रिया सरन को नंदिनी के रूप में कुछ महत्वपूर्ण दृश्य मिले हैं, जिन्हें उन्होंने प्रभावी ढंग से निभाया है। तब्बू और रजत कपूर अपने किरदारों में ठीक लगते हैं, जबकि इशिता दत्ता को इस बार अपेक्षाकृत कम स्क्रीन स्पेस मिला है।

तकनीकी पक्ष भी मजबूत

सुधीर चौधरी की सिनेमेटोग्राफी फिल्म के माहौल को बनाए रखने में मदद करती है। अमर मोहिले का बैकग्राउंड स्कोर तनावपूर्ण दृश्यों को सपोर्ट करता है, जबकि संदीप फ्रांसिस की एडिटिंग कहानी को संभालने में अहम भूमिका निभाती है।

क्यों देखें 'दृश्यम 3'?

अगर आप अजय देवगन और 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी के फैन हैं, तो विजय सलगांवकर की कहानी के अगले अध्याय को देखने की वजह जरूर है। फिल्म में सस्पेंस, कोर्टरूम ड्रामा, पारिवारिक भावनाएं और अजय देवगन का इंटेंस अभिनय प्रमुख आकर्षण हैं। हालांकि, कहानी की कुछ सुविधाजनक घटनाओं और शुरुआती धीमी गति को ध्यान में रखना होगा।

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