BRICS बैठक में भारत की कूटनीतिक सफलता, सदस्य देशों ने औद्योगिक सहयोग बढ़ाने वाले संयुक्त घोषणापत्र को अपनाया

BRICS बैठक में भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। सदस्य देशों ने औद्योगिक सहयोग, व्यापार और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने वाले संयुक्त घोषणापत्र को अपनाया।

भारत को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 10वीं ब्रिक्स (BRICS) उद्योग मंत्रियों की बैठक गुरुवार को जयपुर में संपन्न हुई।

नई दिल्ली: भारत ने वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 10वीं BRICS उद्योग मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र को मंजूरी दी है। जयपुर में आयोजित इस बैठक में BRICS देशों के उद्योग मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। 

बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना, नई तकनीकों का लाभ उठाना और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशना था। भारत के नेतृत्व में इस घोषणापत्र को स्वीकार किया जाना देश की कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक बदलाव तेजी से हो रहे हैं।

भारत की अध्यक्षता में औद्योगिक सहयोग पर जोर

भारत ने वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इसी वर्ष नई दिल्ली में BRICS का वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होना प्रस्तावित है। ऐसे में उद्योग मंत्रियों की बैठक को भारत की प्राथमिकताओं और वैश्विक आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि BRICS देशों को अपनी क्षमताओं और संसाधनों का उपयोग करते हुए नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को अपनी साझा ताकत का लाभ उठाकर मजबूत, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी उद्योगों का निर्माण करना होगा।

PartNIR पहल के तहत बढ़ेगा सहयोग

बैठक में New Industrial Revolution on BRICS Partnership (PartNIR) पहल पर भी चर्चा हुई। यह पहल BRICS देशों के बीच नई औद्योगिक तकनीकों, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। अधिकारियों के अनुसार, भारत की अध्यक्षता में PartNIR के तहत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति हुई है। इनमें:

  • छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए सहयोग का ढांचा तैयार करना।
  • सौर ऊर्जा और फोटोवोल्टिक उद्योग के लिए कार्ययोजना बनाना।
  • स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना।
  • औद्योगिक बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।

बैठक में GIS आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर योजना और शहरी लॉजिस्टिक्स सुधार जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई, ताकि सदस्य देशों के बीच व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

जितिन प्रसाद ने सहयोग और विश्वास पर दिया जोर

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री Jitin Prasada ने BRICS देशों के बीच मजबूत औद्योगिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहयोग, नवाचार और आपसी विश्वास के आधार पर ही एक समावेशी औद्योगिक भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उनके अनुसार, BRICS देशों को अपनी विविध क्षमताओं को जोड़कर वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

BRICS की स्थापना मूल रूप से पांच देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के समूह के रूप में हुई थी। समय के साथ इस समूह का विस्तार हुआ है और इसमें नए सदस्य शामिल हुए हैं। हाल के वर्षों में BRICS में ईरान, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कई अन्य देशों को साझेदार देशों के रूप में जोड़ा गया है।

इस विस्तार ने BRICS को एक व्यापक वैश्विक आर्थिक मंच के रूप में स्थापित किया है, जिसका प्रभाव एशिया, अफ्रीका, मध्य एशिया और लैटिन अमेरिका तक बढ़ रहा है।

BRICS की आर्थिक ताकत कितनी बड़ी है?

BRICS समूह की आर्थिक और जनसांख्यिकीय ताकत इसे वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनाती है। BRICS देशों की संयुक्त आबादी लगभग 390 करोड़ है, जो दुनिया की करीब 48 प्रतिशत आबादी के बराबर है। क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर इन देशों का कुल GDP लगभग 78 ट्रिलियन डॉलर है। यह वैश्विक GDP का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा है।

तुलना में G7 देशों का PPP आधारित GDP लगभग 61 ट्रिलियन डॉलर बताया जाता है। BRICS देश वैश्विक तेल उत्पादन में भी लगभग 30 प्रतिशत योगदान देते हैं।  BRICS उद्योग मंत्रियों की बैठक में अपनाया गया संयुक्त घोषणापत्र भारत की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है। भारत लगातार विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

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