2026 पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली कर्नाटक की पैरा एथलीट केएस शिल्पा को राज्य सरकार ₹15 लाख नकद पुरस्कार, ग्रुप-बी सरकारी नौकरी और खेल नीति के तहत सभी प्रोत्साहन प्रदान करेगी।
बेंगलुरु: भारत की पैरा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में कर्नाटक सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 2026 पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स की कांस्य पदक विजेता केएस शिल्पा को ₹15 लाख की नकद पुरस्कार राशि और ग्रुप-बी श्रेणी की सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने उन्हें खेल नीति के तहत मिलने वाले सभी प्रोत्साहन और सुविधाएं प्रदान करने का भी आश्वासन दिया है।
यह घोषणा युवा सशक्तिकरण एवं खेल विभाग के आयुक्त एम.एन. अनुचेत ने बेंगलुरु स्थित श्री कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान की। उन्होंने कहा कि शिल्पा की उपलब्धि केवल कर्नाटक ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है और उनकी सफलता भविष्य की पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का बढ़ाया सम्मान
2026 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स में केएस शिल्पा ने महिला पैरा स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन पैरा खिलाड़ियों के लिए यह संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का प्रतीक भी माना जाता है। शिल्पा की इस सफलता ने कर्नाटक को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। राज्य सरकार ने इसे खेल क्षेत्र में प्रेरणादायक उपलब्धि बताते हुए उनके सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया।
₹15 लाख नकद पुरस्कार की घोषणा
सम्मान समारोह में एम.एन. अनुचेत ने बताया कि ग्लासगो पैरा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले कर्नाटक के सभी आठ खिलाड़ियों को पहले ही उनकी भागीदारी के लिए ₹5 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि कांस्य पदक जीतने के कारण केएस शिल्पा को अतिरिक्त सम्मान स्वरूप कुल ₹15 लाख की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह पुरस्कार उनकी उत्कृष्ट उपलब्धि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के लिए दिया जा रहा है।
ग्रुप-बी सरकारी नौकरी भी मिलेगी
कर्नाटक सरकार ने शिल्पा को केवल आर्थिक पुरस्कार तक सीमित नहीं रखा है। सरकार ने उनके लिए ग्रुप-बी श्रेणी की सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की है। राज्य सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा और स्थायी करियर उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य में भी खेलों पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें। सरकारी नौकरी के साथ उन्हें राज्य की खेल नीति के अंतर्गत मिलने वाले सभी विशेष लाभ भी दिए जाएंगे।

खेल नीति के तहत सभी सुविधाएं
एम.एन. अनुचेत ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित सहायता नहीं देना चाहती, बल्कि उनके दीर्घकालिक विकास और भविष्य को भी सुरक्षित करना चाहती है। इसी उद्देश्य से शिल्पा को खेल नीति के तहत उपलब्ध सभी प्रोत्साहन, सुविधाएं और सहायता प्रदान की जाएगी। इनमें खिलाड़ियों के लिए निर्धारित आर्थिक लाभ, प्रशिक्षण सहायता और अन्य सरकारी योजनाएं शामिल हैं।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री करेंगे अलग से सम्मान
आयुक्त ने यह भी जानकारी दी कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर जल्द ही केएस शिल्पा को अलग से सम्मानित करेंगे। राज्य सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का सार्वजनिक सम्मान युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करता है और खेल संस्कृति को मजबूत बनाता है।
पैरा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनीं शिल्पा
सम्मान समारोह के दौरान एम.एन. अनुचेत ने कहा कि केएस शिल्पा की सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और समर्पण के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शारीरिक सीमाएं किसी खिलाड़ी की सफलता में बाधा नहीं बनतीं, यदि उसे सही अवसर, प्रशिक्षण और समर्थन मिले। शिल्पा की उपलब्धि देशभर के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
भारत में पैरा खेलों को मिल रहा नया महत्व
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पैरा खेलों में उल्लेखनीय प्रगति की है। पैरालंपिक, पैरा एशियन गेम्स और पैरा कॉमनवेल्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। सरकारों द्वारा पुरस्कार, रोजगार और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह समर्थन मिलता रहा तो भारत आने वाले वर्षों में पैरा खेलों में विश्व की अग्रणी ताकतों में शामिल हो सकता है।
खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की सकारात्मक पहल
खेल विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पदक जीतने के बाद सम्मान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा भी आवश्यक है। कर्नाटक सरकार द्वारा नकद पुरस्कार, सरकारी नौकरी और खेल नीति के लाभ देने का निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है। इस तरह की नीतियां युवा खिलाड़ियों को खेलों को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।












