Budget 2026 से पहले सोने और चांदी के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई। 10 ग्राम सोना ₹1,43,300 और चांदी ₹2,65,652 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। डॉलर मजबूती और मुनाफा सुरक्षित करने की प्रवृत्ति गिरावट का मुख्य कारण मानी जा रही है।
Gold-Silver Rate: बजट 2026 के पेश होने से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। वायदा बाजार में दोनों बहुमूल्य धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर से फिसलाव दिखाया है। निवेशक और व्यापारी बाजार में शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट-बुकिंग के कारण सावधान नजर आ रहे हैं।
सोने की कीमत में बड़ी गिरावट
1 फरवरी को सुबह 9 बजकर 52 मिनट पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी अनुबंध के लिए सोने की कीमत में बीते सत्र की तुलना में 5.94 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली। इस समय 10 ग्राम सोने का भाव 1,43,300 रुपये दर्ज किया गया। गिरावट का मुख्य कारण निवेशकों का मुनाफा सुरक्षित करना और वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही।
चांदी की कीमत में भी भारी टूट
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमत में भी तेज गिरावट देखी गई। मार्च डिलीवरी अनुबंध के अनुसार चांदी का भाव बीते सत्र के मुकाबले 9 प्रतिशत गिरकर 2,65,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नई नीतियों और डॉलर की मजबूती ने सोने-चांदी के भाव पर दबाव बनाया है।
महानगरों में आज का सोने का हाजिर भाव
भारत के प्रमुख शहरों में आज सोने का हाजिर भाव अलग-अलग दर्ज किया गया है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹16,073, 22 कैरेट ₹14,735 और 18 कैरेट ₹12,059 प्रति ग्राम है। मुंबई में 24 कैरेट सोना ₹16,058, 22 कैरेट ₹14,720 और 18 कैरेट ₹12,044 प्रति ग्राम पर आया है। कोलकाता और बैंगलुरु में भी यही भाव दर्ज किया गया, जबकि चेन्नई में 24 कैरेट सोना ₹16,255, 22 कैरेट ₹14,900 और 18 कैरेट ₹12,800 प्रति ग्राम पर पहुंचा।
शॉर्ट-टर्म करेक्शन जारी रहने की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी में यह गिरावट शॉर्ट-टर्म करेक्शन का हिस्सा है। लॉन्ग-टर्म में सोने और चांदी की मजबूत मांग और स्ट्रक्चरल कारण जैसे आर्थिक अनिश्चितता, निवेश का सुरक्षित विकल्प और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बने हुए हैं।
गिरावट के पीछे वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मुनाफा सुरक्षित करने की प्रवृत्ति प्रमुख कारण रहे हैं। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व के पूर्व गवर्नर केविन वॉर्श को प्रमुख बनाने का ऐलान भी निवेशकों के बीच सतर्कता पैदा कर रहा है। केविन वॉर्श को रेट कट के खिलाफ कड़े रुख वाला माना जाता है, जिससे गोल्ड मार्केट पर दबाव आया।
इंटरनेशनल मार्केट में हालात
अंतरराष्ट्रीय बाजार में रविवार को ट्रेडिंग बंद थी। हालांकि शुक्रवार को सोने में मुनाफावसूली के दबाव में 8 प्रतिशत से अधिक गिरावट देखने को मिली। उस समय सोने का भाव करीब 4,900 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। गिरावट गुरुवार को रिकॉर्ड 5,608 डॉलर प्रति औंस के स्तर के बाद हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि ताज़ा गिरावट के बावजूद दीर्घकालिक रुझान मजबूत बना हुआ है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूती दी है। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और बाजार में मांग बढ़ने से सोने की कीमत में दीर्घकालिक बढ़त की संभावना बनी हुई है। यह प्रदर्शन 1980 के दशक के बाद सोने का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन माना जा रहा है।








