Budget Session से पहले कांग्रेस का हमला, इमरान मसूद बोले– देश किस रास्ते पर जा रहा है

Budget Session से पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने धार्मिक पहचान और मतदान अधिकार को लेकर सरकार को घेरा।

Budget Session से पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने धार्मिक पहचान, मतदान अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता के मुद्दे उठाते हुए पूछा कि सरकार देश में किस तरह का बदलाव लाना चाहती है।

Budget Session 2026: संसद के Budget Session से ठीक पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को बजट और राजकोषीय प्रस्तावों से पहले देश के ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। मसूद ने उत्तर प्रदेश से जुड़े हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए धार्मिक पहचान, मतदान अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर सरकार के रुख की आलोचना की। उनके बयान से सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल

Budget Session के पहले दिन मीडिया से बातचीत में इमरान मसूद ने कहा कि देश आज कई गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार बजट पेश करने से पहले इन मुद्दों पर चर्चा और समाधान क्यों नहीं कर रही है। मसूद ने कहा कि संसद केवल आर्थिक आंकड़ों और घोषणाओं का मंच नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों की चिंताओं को उठाने का सबसे बड़ा मंच है। ऐसे में सरकार को यह बताना चाहिए कि वह देश को किस दिशा में ले जाना चाहती है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा क्यों अहम

इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक व्यक्ति से उसकी उपाधि या पहचान को लेकर सवाल करना सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। मसूद के अनुसार यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने पूछा कि सरकार को यह तय करने का अधिकार किसने दिया कि कौन किस नाम या उपाधि से जाना जाएगा।

धर्म को जोड़ने पर चिंता

कांग्रेस सांसद ने पहचान, धर्म और मतदान अधिकार को जोड़ने की कोशिशों को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में वोट डालने का अधिकार नागरिकता और वैध मतदाता होने से जुड़ा होता है। किसी व्यक्ति से यह पूछना कि वह किस धर्म का है, संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। मसूद ने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकार देश में किस तरह का बदलाव लाना चाहती है और लोकतांत्रिक मूल्यों को किस दिशा में ले जाया जा रहा है।

देश में किस तरह का बदलाव चाहती है सरकार

इमरान मसूद ने सीधे शब्दों में पूछा कि सरकार आखिर देश में क्या बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि क्या यह बदलाव सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का है या समाज को बांटने का। उनके मुताबिक, बजट से पहले सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी नीतियां आम लोगों के जीवन को कैसे बेहतर बनाएंगी। केवल आर्थिक आंकड़े पेश करना पर्याप्त नहीं है, जब तक सामाजिक और संवैधानिक सवालों का समाधान न हो।

Budget Session की शुरुआत

भारत की संसद का Budget Session राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के साथ शुरू होगा। इसके बाद 29 जनवरी को Economic Survey पेश किया जाएगा, जिसमें 2025–26 के लिए अर्थव्यवस्था की स्थिति और अगले वित्तीय वर्ष के अनुमान रखे जाएंगे। केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाना है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

दो चरणों में चलेगा सत्र

यह सत्र कुल 65 दिनों में फैले 30 बैठकों के साथ 2 अप्रैल को समाप्त होगा। दोनों सदन 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होंगे और 9 मार्च को दोबारा सत्र शुरू होगा। इस दौरान स्थायी समितियों को विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान मांगों की जांच करने का अवसर मिलेगा। सरकार और विपक्ष दोनों के लिए यह सत्र बेहद अहम माना जा रहा है।

विपक्ष की रणनीति

Budget Session से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक भी हुई। इस बैठक में सत्र को सुचारू रूप से चलाने पर चर्चा की गई। कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने कहा कि पार्टी संसद की कार्यवाही में सहयोग करेगी, लेकिन साथ ही जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगी। इनमें कथित वोट चोरी, SIR अभ्यास, धान खरीद, मनरेगा फोकस की बहाली जैसे मुद्दे शामिल हैं।

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