Canada PGWP Row: वर्क परमिट की मांग पर भारतीय छात्रों की भूख हड़ताल, नेताओं ने लौटने की दी सलाह

कनाडा में PGWP नहीं मिलने पर भारतीय समेत 1,000 छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। भूख हड़ताल के बीच नेताओं ने वैध स्टेटस न होने पर लौटने की सलाह दी।

कनाडा के अल्बर्टा में PGWP नहीं मिलने से नाराज भारतीय समेत करीब 1,000 विदेशी छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जबकि स्थानीय नेताओं ने वैध इमिग्रेशन स्टेटस नहीं होने पर देश छोड़ने की सलाह दी है।

अल्बर्टा: Canada PGWP विवाद को लेकर भारतीय छात्रों का विरोध तेज हो गया है। पोर्टेज कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने वाले कई छात्र पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) नहीं मिलने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है और उनका कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद नियम बदलने से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

PGWP नहीं मिलने पर छात्रों का प्रदर्शन तेज

अल्बर्टा के कैलगरी स्थित पोर्टेज कॉलेज के बाहर भारतीय छात्रों सहित करीब एक हजार विदेशी छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने कनाडा में पढ़ाई पूरी करने के बाद पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) मिलने की उम्मीद में लाखों रुपये खर्च किए थे, लेकिन अब उनके आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।

छात्रों का कहना है कि वे कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन जब उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उनका कहना है कि यदि वर्क परमिट नहीं मिला तो उनका करियर और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।

कनाडाई नेताओं के बयान से बढ़ा विवाद

मामले पर जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास कनाडा में रहने का वैध अधिकार नहीं है, उन्हें निर्धारित इमिग्रेशन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

वहीं अल्बर्टा की प्रीमियर डैनियल स्मिथ ने कहा कि जिन विदेशी छात्रों के पास वैध वीजा या कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस नहीं है, उन्हें अपने देश लौट जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद छात्र संगठनों और सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई है।

क्या है पूरा PGWP विवाद?

यह विवाद पोर्टेज कॉलेज और कैनेडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑस्टियोपैथिक थेरेपी के कुछ डिप्लोमा प्रोग्राम से जुड़ा है। छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने दाखिला लिया था, तब उनके कोर्स और संस्थान को PGWP के लिए पात्र बताया गया था। इसी आधार पर उन्होंने करीब 32,000 कनाडाई डॉलर (लगभग 22 लाख रुपये) की फीस जमा कर दो वर्षीय कोर्स पूरा किया।

हालांकि पढ़ाई पूरी होने के बाद Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) ने उनके आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिए कि संबंधित डिप्लोमा प्रोग्राम वर्क परमिट के लिए योग्य नहीं है। छात्रों का दावा है कि पात्रता संबंधी बदलाव बाद में किए गए, जबकि उन्होंने पुराने नियमों के आधार पर प्रवेश लिया था।

पोर्टेज कॉलेज ने इस मामले में कहा है कि PGWP जारी करने का अधिकार केवल IRCC के पास है और कॉलेज इस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। हालांकि कॉलेज ने इमिग्रेशन विभाग से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है।

वर्क परमिट की समीक्षा की मांग

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांग है कि उनके वर्क परमिट आवेदनों की दोबारा समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि उन्होंने कनाडा के नियमों के अनुसार पढ़ाई पूरी की है और उन्हें पढ़ाई के बाद काम करने का अवसर मिलना चाहिए। छात्रों का आरोप है कि दो साल तक उन्हें यह नहीं बताया गया कि उनका डिप्लोमा नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम माना जाएगा।

फिलहाल सभी की नजर IRCC के अगले फैसले पर है। यदि सरकार इस मामले की दोबारा समीक्षा करती है, तो हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों को राहत मिल सकती है। वहीं यदि मौजूदा फैसला बरकरार रहता है, तो प्रभावित छात्रों के सामने कनाडा छोड़ने या अन्य कानूनी विकल्प अपनाने की चुनौती बनी रहेगी।

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