Rahul Gandhi ने नए CBI डायरेक्टर चयन पर असहमति जताते हुए प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताया। पीएम आवास पर हुई बैठक के बाद राहुल ने कहा कि उम्मीदवारों की पूरी जानकारी साझा नहीं की गई और विपक्ष की भूमिका सिर्फ औपचारिक बनाकर रख दी गई।
नई दिल्ली: भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) के नए निदेशक की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी औपचारिक असहमति दर्ज कराई है।
प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल औपचारिकता बनाकर रख दिया है और उम्मीदवारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं की गई।
यह बैठक प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता की उस समिति का हिस्सा थी, जो नए CBI डायरेक्टर के चयन के लिए जिम्मेदार होती है।
चयन समिति की बैठक में क्या हुआ
बैठक में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant और राहुल गांधी शामिल हुए। बैठक लगभग डेढ़ घंटे चली। मीटिंग के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने चयन प्रक्रिया को “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि चयन के लिए 69 अधिकारियों की सूची दी गई, लेकिन उनकी विस्तृत प्रोफाइल, मूल्यांकन रिपोर्ट और 360-डिग्री असेसमेंट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गईं।
राहुल गांधी ने लिखा कि विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल करने का उद्देश्य प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है, लेकिन इस मामले में उन्हें कोई वास्तविक भूमिका नहीं दी गई।
राहुल गांधी के प्रमुख आरोप
राहुल गांधी ने अपने असहमति पत्र में पांच मुख्य बिंदु उठाए:
1. CBI के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अतीत में CBI का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों के खिलाफ किया है।
2. चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी
राहुल के अनुसार, उम्मीदवारों की महत्वपूर्ण गोपनीय रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे निष्पक्ष मूल्यांकन संभव नहीं था।
3. विपक्ष की भूमिका सीमित
उन्होंने कहा कि चयन समिति में विपक्ष के नेता की मौजूदगी केवल औपचारिक बनाकर रख दी गई है।
4. पहले से तय उम्मीदवार का संकेत
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जानकारी न देना इस बात का संकेत है कि सरकार पहले से तय उम्मीदवार को चुनना चाहती है।
5. पहले भेजे गए सुझावों पर जवाब नहीं
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी उन्होंने निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के लिए सुझाव दिए थे, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
CBI डायरेक्टर चयन प्रक्रिया क्या है
भारत में CBI डायरेक्टर की नियुक्ति एक विशेष समिति द्वारा की जाती है। इस समिति में शामिल होते हैं:
- भारत के प्रधानमंत्री
- भारत के मुख्य न्यायाधीश
- लोकसभा में विपक्ष के नेता
समिति द्वारा नाम फाइनल होने के बाद गृह मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) नियुक्ति आदेश जारी करते हैं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य जांच एजेंसी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना है।

CBI डायरेक्टर का कार्यकाल और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
Supreme Court of India ने 2019 में निर्देश दिया था कि जिन वरिष्ठ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में छह महीने से कम समय बचा हो, उन्हें CBI निदेशक पद के लिए विचार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि:
CBI डायरेक्टर का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष होना चाहिए।
नियुक्ति समिति की सहमति के बिना उनका तबादला नहीं किया जा सकता। हालांकि विशेष परिस्थितियों में कार्यकाल को एक-एक वर्ष बढ़ाकर अधिकतम पांच साल तक किया जा सकता है।
मौजूदा CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद का कार्यकाल समाप्ति पर
वर्तमान CBI निदेशक Praveen Sood का कार्यकाल 24 मई को समाप्त होने वाला है।
प्रवीण सूद ने 25 मई 2023 को CBI प्रमुख का पद संभाला था। पिछले वर्ष उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था।
प्रवीण सूद का करियर प्रोफाइल
- 1986 बैच के IPS अधिकारी
- कर्नाटक कैडर
- मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से
- IIT दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech
- IIM बेंगलुरु से MBA
- कर्नाटक पुलिस और राज्य DGP के रूप में लंबा अनुभव
- उन्हें कई राष्ट्रीय पुलिस सम्मान भी मिल चुके हैं।
नए CBI डायरेक्टर की रेस में प्रमुख नाम
1. पराग जैन
Parag Jain वर्तमान में RAW प्रमुख हैं।
प्रमुख तथ्य:
- 1989 बैच, पंजाब कैडर IPS
- खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में विशेषज्ञ
- एविएशन रिसर्च सेंटर का नेतृत्व कर चुके
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रणनीतिक भूमिका की चर्चा
- जुलाई 2025 में RAW प्रमुख नियुक्त
राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया मामलों में उनका अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
2. शत्रुजीत कपूर
Shatrujeet Kapoor इस समय ITBP के महानिदेशक हैं।
प्रमुख तथ्य:
- 1990 बैच, हरियाणा कैडर IPS
- पंजाब के फगवाड़ा से संबंध
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि
- हरियाणा पुलिस में कई अहम जिम्मेदारियां
- फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर और हरियाणा DGP रह चुके
उनका प्रशासनिक अनुभव और अर्धसैनिक बलों में नेतृत्व उन्हें महत्वपूर्ण उम्मीदवार बनाता है।
3. जीपी सिंह
GP Singh वर्तमान में CRPF के महानिदेशक पद पर तैनात हैं।
प्रमुख तथ्य:
- 1994 बैच IPS, छत्तीसगढ़ कैडर
- नक्सल विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव
- इंटेलिजेंस नेटवर्किंग में विशेषज्ञता
- EOW और एंटी करप्शन ब्यूरो का नेतृत्व किया
- 2024 में छत्तीसगढ़ DGP बने
आंतरिक सुरक्षा और उग्रवाद विरोधी अभियानों में उनकी विशेषज्ञता उन्हें मजबूत उम्मीदवार बनाती है।
संस्थागत स्वतंत्रता पर बढ़ती बहस
CBI निदेशक चयन को लेकर उठे विवाद ने भारत में संस्थागत स्वतंत्रता और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर बहस को फिर तेज कर दिया है।
विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि CBI प्रमुख की नियुक्ति केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है।










