सीबीएसई 12वीं फिजिक्स पेपर 2026 के कठिनाई स्तर को लेकर विवाद हुआ। शिक्षक प्रशांत किराड ने PIL दायर की। अलग-अलग केंद्रों में पेपर का स्तर समान नहीं था। छात्र और शिक्षक न्याय, ग्रेस मार्क्स और निष्पक्ष मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं।
CBSE: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 के तहत 12वीं क्लास का भौतिक विज्ञान (Physics) पेपर 20 फरवरी को आयोजित हुआ। पेपर संपन्न होने के बाद छात्रों और शिक्षकों ने इसके कठिनाई स्तर को लेकर चिंता जताई है। छात्रों और टीचर्स के अनुसार अलग-अलग केंद्रों में आयोजित पेपर में प्रश्नों का स्तर समान नहीं रखा गया। कुछ प्रश्नपत्र अत्यधिक कठिन रहे, जबकि कुछ प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत सरल। इस असमानता को देखते हुए शिक्षक प्रशांत किराड ने जनहित याचिका (PIL) दायर की है।
शिक्षक का कहना है कि इस असमानता के कारण छात्र अपनी मेहनत के बजाय किस्मत पर निर्भर हो गए हैं। इससे छात्रों के बीच असमानता पैदा हो रही है और यह उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
प्रश्नपत्र में समानता न रहने का मुद्दा
PIL में कहा गया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को अब या तो छात्रों को ग्रेस मार्क्स (Grace Marks) प्रदान करने चाहिए या कॉपियों के मूल्यांकन (Evaluation) के दौरान ढिलाई बरतनी चाहिए। शिक्षक का कहना है कि अगर प्रश्नपत्र का स्तर सभी छात्रों के लिए समान नहीं है तो मूल्यांकन निष्पक्ष नहीं हो पाएगा।
छात्रों और शिक्षकों के अनुसार कुछ केंद्रों में पेपर बेहद कठिन था, जिससे छात्र अधिक समय और प्रयास के बावजूद अच्छे अंक नहीं ला पाए। वहीं, कुछ केंद्रों के पेपर अपेक्षाकृत आसान रहे। इससे परिणाम में असमानता पैदा हो सकती है।
ऑनलाइन मूल्यांकन से जुड़े बदलाव
इस साल CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षाओं का मूल्यांकन डिजिटल मोड में करने का निर्णय लिया है। बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएगी। इस बार 17 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं परीक्षा में भाग लेंगी। इन सभी छात्रों की 1 करोड़ से अधिक कॉपियों के लगभग 32 करोड़ पन्नों का मूल्यांकन ऑनस्क्रीन किया जाएगा।
सभी कॉपियों को बोर्ड द्वारा स्कैन किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक अपने स्कूल लैब में बैठकर आवंटित कॉपियों की जांच करेंगे। इस प्रक्रिया में रोल नंबर या छात्र का नाम नहीं दिखेगा, जिससे मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहेगी।
CBSE परीक्षा नियंत्रक के अनुसार ऑनस्क्रीन मूल्यांकन से करोड़ों कॉपियों को इधर-उधर भेजने में लगने वाला समय और ट्रांसपोर्ट खर्च भी बचेगा। शिक्षक अपने स्कूल लैब में ही कंप्यूटर पर कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे।
क्यों हुई PIL
शिक्षक प्रशांत किराड ने कहा कि फिजिक्स पेपर का कठिनाई स्तर समान नहीं था। इससे छात्रों की मेहनत का उचित मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है। PIL में यह भी कहा गया कि बोर्ड को तुरंत कदम उठाना चाहिए ताकि छात्रों के अधिकार सुरक्षित रहें। इसके तहत या तो ग्रेस मार्क्स देने की व्यवस्था की जाए या मूल्यांकन में ढिलाई बरती जाए।
छात्रों की चिंता
छात्रों ने भी फिजिक्स पेपर को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अलग-अलग केंद्रों में पेपर की कठिनाई में अंतर होने से उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन नहीं हो पाएगा। कुछ छात्र बेहतर तैयारी के बावजूद कठिन पेपर की वजह से कम अंक ला पाए हैं।
इसके अलावा, छात्रों को यह भी डर है कि परीक्षा का परिणाम उनके कॉलेज एडमिशन और आगे की पढ़ाई पर असर डाल सकता है। ऐसे में PIL ने छात्रों की आवाज़ को कानूनी रूप से सामने लाया है।









