Cement Sector Outlook: हाउसिंग में सुस्ती के बावजूद मजबूत डिमांड, क्या है बड़ा ट्रिगर

हाउसिंग सेक्टर में सुस्ती के बावजूद सीमेंट की मांग मजबूत। सरकारी पूंजीगत खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बने बड़ा ट्रिगर। चौथी तिमाही में वॉल्यूम।

Cement industry में हाउसिंग सुस्ती के बावजूद जनवरी में मांग मजबूत रही। सरकारी पूंजीगत खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से सेक्टर को सहारा मिला। JK Cement को ब्रोकरेज ने बेहतर संभावनाओं के साथ टॉप पिक बताया।

Cement Sector: सीमेंट सेक्टर में पिछले कुछ समय से सुस्ती का माहौल था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में सीमेंट की मांग और कीमतों दोनों में सुधार दर्ज किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह सुधार ऐसे समय में आया है जब जनवरी में केंद्र सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों का पूंजीगत खर्च सालाना आधार पर गिरावट में था। इसके बावजूद डिमांड का मजबूत रहना इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

ब्रोकरेज फर्म Nuvama Institutional Equities की रिपोर्ट बताती है कि आने वाले महीनों में सरकारी कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां सीमेंट सेक्टर के लिए बड़ा ट्रिगर साबित हो सकती हैं।

FY26 में बदली तस्वीर

रिपोर्ट के मुताबिक FY25 में सरकारी कैपेक्स की रफ्तार कुछ सुस्त रही थी, लेकिन FY26 में यह फिर से पटरी पर लौट आई है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों के पूंजीगत खर्च में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

केंद्र सरकार ने FY26 के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स बजट रखा है। दिसंबर तक इसमें से लगभग 70 प्रतिशत खर्च किया जा चुका है। यह संकेत देता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी बनी हुई है।

इसके अलावा FY27 के लिए कैपेक्स आवंटन बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे साफ है कि सरकार आने वाले समय में भी इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण गतिविधियों पर जोर बनाए रखना चाहती है।

हालांकि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के खर्च में हल्की कमी देखी गई है, लेकिन कुल मिलाकर सरकारी निवेश का रुख सकारात्मक है। यही निवेश सीमेंट की मांग को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।

हाउसिंग सेक्टर में ठंडापन

दूसरी ओर रियल एस्टेट सेक्टर में अभी भी दबाव दिख रहा है। 2025 में देशभर में नए घरों की लॉन्चिंग करीब 9 प्रतिशत घटी। यह लगातार दूसरा साल है जब हाउसिंग लॉन्च में गिरावट दर्ज की गई है।

हाउसिंग की सुस्ती आमतौर पर सीमेंट की मांग पर असर डालती है, क्योंकि आवासीय निर्माण सीमेंट खपत का बड़ा हिस्सा होता है। फिर भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सरकारी खर्च ने कुल मांग को संतुलित बनाए रखा है।

सड़क, रेल, शहरी विकास और सार्वजनिक परियोजनाओं में बढ़ती गतिविधियों से सीमेंट कंपनियों को लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। यही वजह है कि हाउसिंग में कमजोरी के बावजूद सेक्टर पूरी तरह दबाव में नहीं आया।

चौथी तिमाही में दिख सकती है मजबूती

ब्रोकरेज के चैनल चेक के अनुसार जनवरी में सीमेंट की मांग मजबूत रही है और Q4FY26 में भी यह रफ्तार जारी रहने की संभावना है। पूरे वित्त वर्ष 2026 में उद्योग की वॉल्यूम ग्रोथ मिड सिंगल डिजिट रहने का अनुमान है।

अक्टूबर और नवंबर 2025 में कीमतों में गिरावट देखी गई थी, लेकिन दिसंबर से सुधार शुरू हो चुका है। जनवरी में भी कई क्षेत्रों में कीमतों में स्थिरता और बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं।

ईंधन कीमतों में नरमी और कंपनियों द्वारा अपनाई गई लागत नियंत्रण रणनीति से मार्जिन पर दबाव कम हो सकता है। यदि कीमतों में स्थिरता बनी रहती है तो कंपनियों की लाभप्रदता में सुधार देखने को मिल सकता है।

मार्जिन सुधार की उम्मीद

सीमेंट कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट बड़ा कारक होती है। कोयला और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे मार्जिन को प्रभावित करता है। हाल के महीनों में लागत में कुछ राहत मिली है।

अगर मांग मजबूत रहती है और कंपनियां कीमतों को बनाए रखने में सफल रहती हैं तो ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार संभव है। यही कारण है कि ब्रोकरेज फिलहाल सेक्टर पर तटस्थ रुख रखते हुए भी आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है।

JK Cement बनी टॉप पिक

रिपोर्ट में सीमेंट सेक्टर पर न्यूट्रल रेटिंग दी गई है, लेकिन JK Cement को ‘बाय’ रेटिंग के साथ टॉप पिक बताया गया है। ब्रोकरेज का मानना है कि बेहतर मांग, कीमतों में सुधार और लागत नियंत्रण के चलते जेके सीमेंट आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। कंपनी की क्षेत्रीय उपस्थिति और प्रीमियम प्रोडक्ट मिक्स भी इसके पक्ष में जा सकता है। हालांकि निवेशकों को सेक्टर में स्टॉक चुनते समय कंपनी के फंडामेंटल, कर्ज स्तर और विस्तार योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

Leave a comment