भारत के कई राज्यों में बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं और नीतियों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कई योजनाओं को लेकर मतभेद बने हुए थे।
नई दिल्ली: West Bengal में सरकार बदलने के बाद केंद्र सरकार की कई योजनाओं को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि जिन योजनाओं को पहले Mamata Banerjee सरकार ने लागू नहीं किया था या जिन पर केंद्र और राज्य के बीच मतभेद बने हुए थे, वे अब तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। इसी खींचतान के कारण जनगणना का पहला चरण भी शुरू नहीं हो पाया था, लेकिन नई सरकार के गठन के बाद इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
वहीं Tamil Nadu और Kerala में भी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न मुद्दों पर पहले जैसा टकराव कम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे कई लंबित परियोजनाओं और योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल में लंबित योजनाओं को मिल सकती है मंजूरी
पश्चिम बंगाल में लंबे समय से कई केंद्रीय योजनाएं राजनीतिक विवादों के कारण पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थीं। केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के बीच फंडिंग, लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं के नामकरण को लेकर लगातार विवाद बना रहा। विशेष रूप से आयुष्मान भारत योजना को राज्य सरकार ने लागू नहीं किया था। राज्य सरकार का तर्क था कि वह पहले से अपनी स्वास्थ्य बीमा योजना चला रही है।
इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को लेकर भी केंद्र और राज्य के बीच मतभेद रहे। इसके अलावा स्कूलों के आधुनिकीकरण से जुड़ी पीएम श्री योजना भी राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन गई थी। केंद्र सरकार का आरोप रहा कि कई योजनाओं के नाम बदले जा रहे थे या उनके क्रियान्वयन का श्रेय राज्य सरकार अपने स्तर पर ले रही थी। अब माना जा रहा है कि राजनीतिक माहौल बदलने के बाद इन योजनाओं को फिर से गति मिल सकती है।
जनगणना प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है असर

पश्चिम बंगाल में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी के कारण जनगणना का पहला चरण भी प्रभावित हुआ था। अधिकारियों के अनुसार प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब नई सरकार के गठन के बाद जनगणना कार्य जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। यह प्रक्रिया देश की आर्थिक और सामाजिक नीतियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
तमिलनाडु में शिक्षा नीति को लेकर लंबे समय से विवाद
दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में भी केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच कई नीतिगत मुद्दों पर मतभेद बने रहे। विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति, नीट परीक्षा और तीन-भाषा नीति को लेकर राज्य सरकार ने तीखा विरोध जताया था। राज्य सरकार का कहना था कि नई शिक्षा नीति क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय शिक्षा ढांचे को प्रभावित कर सकती है। वहीं केंद्र सरकार का तर्क था कि राष्ट्रीय स्तर की नीतियां छात्रों को बेहतर अवसर और प्रतिस्पर्धा प्रदान करेंगी।
तमिलनाडु ने पीएम श्री योजना के कार्यान्वयन को लेकर भी केंद्र से दूरी बनाए रखी थी। हालांकि अब राजनीतिक बदलावों के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद बढ़ने की संभावना दिखाई दे रही है।
केरल में भी कई योजनाओं पर बना रहा गतिरोध
केरल में भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच कई योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे। विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में समन्वय की कमी देखी गई। केंद्र सरकार का आरोप था कि कुछ योजनाओं को लागू करने में अनावश्यक देरी की जा रही थी, जबकि राज्य सरकारें अपने अधिकारों और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं का हवाला देती रही हैं।
राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद केंद्र सरकार इन राज्यों में लंबित योजनाओं को लागू करने के लिए नई पहल कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाती हैं, तो इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और आम नागरिकों को अधिक लाभ मिलेगा।









