सीकर जिले में पुलिस ने ऑपरेशन एंटी वेनम 3.0 के तहत कार्रवाई करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से प्रतिबंधित कोडीन फॉस्फेट सिरप और बाइक बरामद हुई। पुलिस अब नशीली दवाओं की सप्लाई नेटवर्क को लेकर पूछताछ कर रही है।
सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन एंटी वेनम 3.0” के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो युवकों को प्रतिबंधित नशीली दवाओं के साथ गिरफ्तार किया है। खाटूश्यामजी सदर थाना पुलिस ने मंढा-खाटूश्यामजी रोड पर नाकाबंदी के दौरान आरोपियों को पकड़ा और उनके कब्जे से कोडीन फॉस्फेट युक्त सिरप की कई बोतलें बरामद कीं।
पुलिस ने इस कार्रवाई में सप्लाई के लिए इस्तेमाल की जा रही मोटरसाइकिल को भी जब्त कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक मेडिकल स्टोर संचालक भी शामिल बताया जा रहा है।
संदिग्ध बाइक की तलाशी में मिला प्रतिबंधित सिरप
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, खाटूश्यामजी सदर थाना क्षेत्र में मंढा-खाटूश्यामजी रोड पर ओल्ड राव होटल के पास नियमित नाकाबंदी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध बाइक को रोककर उसकी जांच की।
तलाशी के दौरान बाइक पर सवार दो युवकों के पास से प्रतिबंधित नशीली सिरप “WENREX” की सात बोतलें बरामद हुईं। इस सिरप में कोडीन फॉस्फेट और ट्रिप्रोलिडीन हाइड्रोक्लोराइड जैसे नियंत्रित तत्व पाए जाते हैं, जिनका दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाता है।

बरामद सिरप का कुल वजन लगभग 1 किलो 13 ग्राम बताया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान राजेश कुमार सैनी और राहुल कुमार कुमावत के रूप में की है। दोनों आरोपी सीकर जिले के मंढा गांव के निवासी हैं।
जांच में सामने आया कि आरोपी राहुल कुमार कुमावत मेडिकल स्टोर संचालक है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रतिबंधित दवाइयों की सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए की जा रही थी और इनका उपयोग कहां किया जाना था।
बिना वैध लाइसेंस के रखी गई थीं दवाएं
खाटूश्यामजी सदर थाना अधिकारी अमित कुमार नागोरा ने बताया कि आरोपियों के पास इन दवाइयों को रखने या परिवहन करने के लिए कोई वैध लाइसेंस या कानूनी दस्तावेज नहीं थे।
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने नशीली दवाओं और मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कोडीन आधारित सिरप क्यों है चिंता का विषय?
कोडीन फॉस्फेट आधारित सिरप सामान्य रूप से खांसी की दवा के रूप में उपयोग किया जाता है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नशे की लत पैदा कर सकता है। यही कारण है कि ऐसी दवाओं की बिक्री और परिवहन पर सख्त कानूनी नियंत्रण रखा जाता है।
हाल के वर्षों में राजस्थान समेत कई राज्यों में कोडीन आधारित सिरप का अवैध उपयोग और तस्करी बढ़ी है। विशेष रूप से युवाओं के बीच इन दवाओं का दुरुपयोग चिंता का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन के बिना ऐसी दवाओं का सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
पुलिस की पूछताछ में खुल सकते हैं बड़े नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान नशीली दवाओं की सप्लाई चेन से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि सिरप कहां से खरीदी गई और इसे किन क्षेत्रों में सप्लाई किया जाना था।
जिला पुलिस प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि इस मामले में किसी बड़े अवैध नेटवर्क की जानकारी मिलती है, तो आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है।
राजस्थान में नशे के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई
राजस्थान पुलिस पिछले कुछ समय से राज्यभर में नशे और अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है। “ऑपरेशन एंटी वेनम 3.0” इसी अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाना और अवैध सप्लाई नेटवर्क पर रोक लगाना है।
सीकर, जयपुर, जोधपुर और अन्य जिलों में पुलिस लगातार नाकाबंदी, छापेमारी और जांच अभियान चला रही है। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल दवाओं के दुरुपयोग पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।
स्थानीय स्तर पर बढ़ी चिंता
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ी है कि प्रतिबंधित दवाएं गांव और कस्बों तक पहुंच रही हैं। सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने प्रशासन से नशे के खिलाफ और सख्त कदम उठाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान और स्वास्थ्य शिक्षा भी इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी हैं।










