चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए घर में रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से हानिकारक किरणों से बचाव करना आवश्यक है। 03 मार्च को दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक ग्रहण रहेगा, और इसका सूतक काल सुबह 09:06 बजे से लागू होगा।
Chandra Grahan 2026 Guidelines: 03 मार्च 2026 को भारत में लगने वाले चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर में रहना अनिवार्य है। यह धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक कारणों दोनों पर आधारित है। ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा, जबकि इसका सूतक काल सुबह 09:06 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। घर में रहने से गर्भ और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है।
चंद्र ग्रहण का सूतक काल और अवधि
चंद्र ग्रहण का सूतक काल गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। 03 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा, जबकि इसका सूतक काल सुबह 09:06 बजे से शाम 06:47 बजे तक होगा। सूतक काल की अवधारणा के अनुसार इस दौरान विशेष नियमों का पालन किया जाता है, जिसमें गर्भवती महिलाओं का घर में रहना सबसे प्रमुख है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में किसी भी ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने पर शिशु पर जन्मजात रोग या अंगों के विकास में बाधा का खतरा होता है। इसके अलावा, चंद्र ग्रहण के समय अनियंत्रित रहकर किसी भी कार्य में भाग लेना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए शास्त्रों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर में ही रहना चाहिए।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण ग्रहण के समय सावधानी क्यों जरूरी
विज्ञान भी ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी अपनाने की पुष्टि करता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, ग्रहण के समय पृथ्वी पर कुछ हानिकारक किरणें पहुंचती हैं। ये किरणें सीधे संपर्क में आने पर शरीर और गर्भ दोनों पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। गर्भ में पल रहे शिशु की अंग वृद्धि और स्वास्थ्य पर इन किरणों का असर पड़ सकता है। इसलिए वैज्ञानिक रूप से गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर में रहना और बाहर से आने वाली किरणों से बचाव करना सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए ग्रहण के समय विशेष सावधानी का पालन करना उनके और शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। घर में रहकर ध्यान, पूजा या ध्यान-समाधि जैसे क्रियाकलाप किए जा सकते हैं, जिससे मानसिक शांति भी बनी रहती है।

चंद्र ग्रहण 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव
धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण अशुभ मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय राहु और केतु के प्रभाव से जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर ग्रहण का असर अधिक माना जाता है। इस दौरान भोजन, यात्रा और अन्य गतिविधियों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण के समय पूजा, मंत्रों का पाठ और घर में शांति बनाए रखना शुभ माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को घर में रहकर आशीर्वाद, ध्यान और शांति से ग्रहण अवधि पूरी करने की सलाह दी जाती है।
नकारात्मक प्रभाव और सावधानियां
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं का बाहर जाना न केवल धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना जाता है, बल्कि यह शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा हो सकता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दौरान शिशु में जन्मजात रोग, अंगों की असामान्य वृद्धि और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
साथ ही वैज्ञानिक रूप से ग्रहण के समय आने वाली हानिकारक किरणों से बचाव करना आवश्यक है। यह सावधानी गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। इसलिए इस अवधि में घर में रहना, ध्यान करना और आवश्यक कार्यों से बचना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ग्रहण के दौरान पालन किए जाने वाले नियम
- गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहें।
- बाहर जाने, यात्रा करने और भारी कार्य करने से बचें।
- बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
- भोजन में साफ-सफाई और हल्का भोजन लें।
- घर में शांत और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।










