छठ पर बिहार लौटना मुश्किल, दिल्ली-पटना फ्लाइट ₹25 हजार तक; ट्रेनों में नो रूम

छठ पर बिहार लौटने वालों की परेशानी बढ़ी। ट्रेनों में नो रूम और लंबी वेटिंग है, जबकि दिल्ली-पटना समेत कई रूट पर फ्लाइट किराया सामान्य से कई गुना बढ़ गया।
छठ पर बिहार लौटना मुश्किल, दिल्ली-पटना फ्लाइट ₹25 हजार तक; ट्रेनों में नो रूम
Photo Credit / Attribution: Google

पटना। दीपावली के बाद अब छठ महापर्व पर बिहार लौटने की तैयारी कर रहे लाखों प्रवासियों के सामने सफर सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और देश के दूसरे बड़े शहरों से बिहार आने वाली ट्रेनों में सीटों की मांग तेजी से बढ़ गई है। कई प्रमुख ट्रेनों में नो रूम की स्थिति बन चुकी है, जबकि अनेक ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है। जिन यात्रियों को ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा, वे मजबूरी में विमान का विकल्प तलाश रहे हैं। इसका सीधा असर हवाई किराये पर पड़ा है और पटना आने वाली उड़ानों के टिकट सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना महंगे हो गए हैं।

दिल्ली से पटना आने वाले यात्रियों की परेशानी सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है। हाल की बुकिंग स्थिति में छठ से पहले के पीक दिनों में दिल्ली-पटना फ्लाइट का शुरुआती किराया करीब 20 हजार रुपये तक पहुंच चुका है। कुछ तारीखों पर अलग-अलग उड़ानों और सीटों की उपलब्धता के हिसाब से किराया इससे भी अधिक हो सकता है। अगस्त में इसी रूट पर एकतरफा टिकट करीब 5 से 6 हजार रुपये के आसपास उपलब्ध था। यानी त्योहार के समय मांग बढ़ने के साथ किराये में करीब तीन गुना तक का अंतर दिखाई दे रहा है।

पटना आने वाली उड़ानों पर दबाव केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों से आने वाले यात्रियों को भी काफी अधिक किराया देना पड़ रहा है। हालिया बुकिंग आंकड़ों के अनुसार मुंबई-पटना रूट पर छठ के आसपास न्यूनतम किराया 23 हजार रुपये से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि कुछ तारीखों पर यह 35 हजार रुपये से भी अधिक हो सकता है। पुणे-पटना रूट पर भी किराया 26 हजार रुपये के पार बताया गया है। बेंगलुरु से पटना आने वाली कुछ पीक डेट की उड़ानों में किराया 25 हजार रुपये से अधिक पहुंच गया है।

चेन्नई से पटना आने वाले यात्रियों के लिए भी तस्वीर राहत देने वाली नहीं है। त्योहार के आसपास इस रूट पर एकतरफा टिकट 20 हजार रुपये से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि सामान्य दिनों में करीब 11 हजार रुपये से टिकट उपलब्ध होने की बात सामने आई है। यानी यात्रा की तारीख बदलने से किराये में बड़ा अंतर पड़ सकता है। यही वजह है कि बाहर रहने वाले बिहार के लोग अब लगातार अलग-अलग तारीखों, कनेक्टिंग फ्लाइट और दूसरे एयरपोर्ट के विकल्प तलाश रहे हैं।

त्योहार के दौरान हवाई टिकट की कीमतों में इतनी तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मांग और सीटों की उपलब्धता का अंतर है। एयरलाइंस की डायनेमिक प्राइसिंग व्यवस्था में जैसे-जैसे किसी उड़ान की सीटें कम होती जाती हैं, वैसे-वैसे बचे हुए टिकटों की कीमत बढ़ती जाती है। छठ बिहार और पूर्वांचल के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व है और इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग अपने गांव-घर लौटते हैं। ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में यात्रियों के बिहार आने से सीमित सीटों पर दबाव बढ़ जाता है।

इस बार रेल टिकट का संकट भी हवाई किराये में बढ़ोतरी का बड़ा कारण बन रहा है। दिल्ली-एनसीआर से बिहार और झारखंड जाने वाली कई नियमित ट्रेनों में अभी से टिकट उपलब्ध नहीं हैं। संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में नवंबर की शुरुआत की कई तारीखों पर अलग-अलग श्रेणियों में नो रूम और वेटिंग की स्थिति दर्ज की गई है। तेजस राजधानी एक्सप्रेस में भी कई तारीखों पर लंबी वेटिंग चल रही है। बिहार संपर्क क्रांति और स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में भी सीटों का दबाव बना हुआ है।

दिल्ली से दरभंगा जाने वाले यात्रियों की स्थिति भी मुश्किल है। सरयू-यमुना एक्सप्रेस में नवंबर की कुछ तारीखों के लिए काफी लंबी वेटिंग दर्ज की गई है। दूसरी तरफ हावड़ा-रक्सौल एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में भी यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण वेटिंग काफी ऊपर पहुंच गई है। इसका मतलब यह है कि समस्या सिर्फ दिल्ली-पटना रेल रूट की नहीं है, बल्कि बिहार के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने वाले प्रमुख रेल मार्गों पर भी छठ से पहले यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

यात्रियों के लिए मुश्किल यह है कि ट्रेन में कंफर्म सीट नहीं मिल रही और विमान का टिकट बजट से बाहर होता जा रहा है। जिन परिवारों में दो, तीन या चार लोग साथ यात्रा करते हैं, उनके लिए फ्लाइट का खर्च काफी बड़ा हो जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पीक तारीख पर एक यात्री को पटना पहुंचने के लिए 20 से 25 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, तो चार लोगों के परिवार का केवल एक तरफ का हवाई किराया ही 80 हजार से एक लाख रुपये तक पहुंच सकता है। वापसी का टिकट अलग से लेना हो तो पूरा यात्रा बजट और बढ़ जाता है।

यही वजह है कि कई यात्री अब सीधे छठ के दिन या उससे ठीक पहले आने के बजाय कुछ दिन पहले बिहार पहुंचने की योजना बना रहे हैं। जिन लोगों के काम और छुट्टी की मजबूरी नहीं है, वे कम भीड़ वाली तारीख तलाश रहे हैं। बुकिंग पोर्टलों पर भी अलग-अलग तारीखों के बीच किराये में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ तारीखों पर अपेक्षाकृत कम किराये की सीटें उपलब्ध हैं, जबकि पीक दिनों में वही रूट काफी महंगा हो जाता है।

दिल्ली-पटना के मामले में यह अंतर खास तौर पर महत्वपूर्ण है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 7 नवंबर को दिल्ली से पटना की उड़ानों का शुरुआती किराया करीब 19 से 20 हजार रुपये तक पहुंच गया था। वहीं 10 नवंबर के लिए शुरुआती किराया और अधिक बताया गया। तुलना के लिए उसी अवधि में दिल्ली से दुबई जाने का शुरुआती किराया करीब 15 हजार रुपये के आसपास बताया गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि त्योहारी सीजन में बिहार आने की मांग किस स्तर तक पहुंच गई है।

बिहार लौटने वाले यात्रियों के लिए सिर्फ फ्लाइट ही महंगी नहीं हुई है। बसों में भी एडवांस बुकिंग बढ़ रही है। लंबी दूरी की एसी और नॉन-एसी बसों में दिल्ली, पंजाब, रांची, पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों से बिहार आने वाले यात्रियों की मांग बढ़ी है। ट्रेन में टिकट नहीं मिलने वाले लोग बस को वैकल्पिक साधन के तौर पर देख रहे हैं। इससे सड़क मार्ग पर भी भीड़ बढ़ने की संभावना है।

रेलवे की ओर से यात्रियों के दबाव को कम करने के लिए स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली-एनसीआर से बिहार और झारखंड के लिए कई विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड ने 18 और विशेष ट्रेनों को मंजूरी दी है। दिल्ली-पटना रूट पर तेजस राजधानी और संपूर्ण क्रांति की क्लोन ट्रेनें चलाने का भी फैसला बताया गया है। इन ट्रेनों के संचालन से कुछ यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है, लेकिन पीक सीजन में मांग इतनी अधिक है कि सभी यात्रियों को तत्काल कंफर्म टिकट मिलना आसान नहीं होगा।

त्योहारों के समय बिहार लौटने वाले यात्रियों की परेशानी हर साल सामने आती है, लेकिन इस बार शुरुआती स्तर पर ही टिकटों पर दबाव दिखने लगा है। छठ की तारीख नजदीक आने के साथ यह दबाव और बढ़ सकता है। यात्रा विशेषज्ञ भी यात्रियों को अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय अपनी तारीख तय कर जल्द टिकट लेने की सलाह दे रहे हैं। खासकर जिन लोगों को परिवार के साथ यात्रा करनी है, उनके लिए एक-दो दिन आगे-पीछे की तारीख देखने से किराये में काफी अंतर मिल सकता है।

फ्लाइट से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट भी एक विकल्प बन सकती है। कई बार सीधे पटना की उड़ान महंगी होने पर दूसरे शहर के एयरपोर्ट तक फ्लाइट लेकर वहां से ट्रेन या सड़क मार्ग से बिहार पहुंचना कुल खर्च कम कर सकता है। हालांकि, इस तरह की यात्रा में समय और अतिरिक्त ट्रांसफर का खर्च भी जुड़ता है। इसलिए यात्रियों को केवल टिकट की कीमत नहीं, बल्कि पूरी यात्रा की लागत और समय देखकर फैसला करना होगा।

पटना एयरपोर्ट पर भी छठ और दीपावली के आसपास यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद, कोलकाता, लखनऊ और रांची जैसे शहरों से पटना आने वाले यात्रियों की संख्या त्योहार के पहले और दूसरे सप्ताह में तेजी से बढ़ने की संभावना है। यही वह समय है जब सीटों की उपलब्धता कम होने पर डायनेमिक फेयर और तेजी से ऊपर जा सकता है।

बाहर रहकर नौकरी, कारोबार या पढ़ाई करने वाले बिहार के लोगों के लिए छठ सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार और गांव से जुड़ने का बड़ा अवसर है। इसलिए महंगे किराये के बावजूद बड़ी संख्या में लोग घर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जिन परिवारों का बजट सीमित है, उनके लिए ट्रेन में सीट न मिलना और फ्लाइट का महंगा होना दोहरी परेशानी पैदा कर रहा है।

फिलहाल यात्रियों के सामने सबसे व्यावहारिक रास्ता यही है कि वे यात्रा की तारीख में थोड़ी लचीलापन रखें, अलग-अलग ट्रेनों और उड़ानों के किराये की तुलना करें और उपलब्ध स्पेशल ट्रेनों की जानकारी भी लेते रहें। छठ के बिल्कुल नजदीक टिकट कराने पर किराये में और बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि पीक तारीखों पर सीमित सीटों के लिए मांग लगातार बढ़ती है।

इस पूरे हालात ने एक बार फिर बिहार के सबसे बड़े पर्व छठ पर होने वाली वार्षिक घर वापसी की चुनौती सामने ला दी है। एक तरफ रेलवे यात्रियों की भीड़ को संभालने के लिए स्पेशल ट्रेनें बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हवाई सफर का खर्च कई यात्रियों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। ऐसे में लाखों प्रवासियों के लिए इस बार छठ पर घर पहुंचना सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि आर्थिक और परिवहन व्यवस्था से जुड़ी बड़ी चुनौती भी बन गया है।

Leave a comment