छत्तीसगढ़ में विसर्जन कुंड का पानी उतरा तो सामने आया POP मूर्तियों का सच, 5500 से ज्यादा का हुआ था विसर्जन

रायपुर में विसर्जन कुंड का पानी उतरने पर POP की कई मूर्तियां जस की तस मिलीं। यहां गणेश विसर्जन के दौरान 5500 से अधिक मूर्तियां विसर्जित हुई थीं।

रायपुर में गणेश विसर्जन के बाद खारुन नदी के किनारे बने विसर्जन कुंड का पानी उतरने पर कई POP की मूर्तियां जस की तस दिखाई दीं। यहां 5500 से अधिक मूर्तियों का विसर्जन किया गया था।

रायपुर: गणेश विसर्जन के बाद खारुन नदी के किनारे बने विशाल विसर्जन कुंड का पानी उतरने लगा तो POP से बनी मूर्तियों की स्थिति सामने आ गई। मिट्टी की मूर्तियों के पानी में घुलने के दावों के बीच कई POP की मूर्तियां जस की तस पड़ी मिलीं। इस विसर्जन कुंड में गणेश विसर्जन के दौरान 5500 से अधिक मूर्तियों का विसर्जन किया गया था।

पानी उतरने के बाद दिखीं जस की तस मूर्तियां

गणेश विसर्जन के बाद खारुन नदी स्थित महादेव कुंड में पानी का स्तर कम होने लगा। पानी उतरने के साथ ही कुंड में विसर्जित मूर्तियां दिखाई देने लगीं। इनमें मिट्टी से बनी कई मूर्तियां पानी में घुल चुकी थीं, जबकि POP से बनी कई मूर्तियां अपने मूल स्वरूप में ही पड़ी दिखाई दीं।

इससे मूर्तियों को लेकर किए जा रहे दावों पर सवाल खड़े हुए हैं। इलाके में पिछले कुछ वर्षों से लोगों को मिट्टी की मूर्तियों का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाता रहा है। इसके बावजूद विसर्जन कुंड में POP की मूर्तियों का बड़ी संख्या में नजर आना चिंता का विषय बताया जा रहा है।

5500 से ज्यादा मूर्तियों का हुआ था विसर्जन

गणपति विसर्जन के दिन खारुन नदी के पास बने महादेव कुंड में 5500 से अधिक मूर्तियों का विसर्जन किया गया था। शहर की सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा का विसर्जन भी इसी स्थान पर किया गया था। उस दौरान भारी बारिश और जलभराव के बीच लोगों ने गणपति बप्पा को विदाई दी थी।

अब मौसम सामान्य होने और नदी का पानी कम होने के बाद विसर्जन कुंड की स्थिति साफ दिखाई देने लगी है। पानी के नीचे मौजूद मूर्तियां धीरे-धीरे सतह पर नजर आने लगी हैं। इसी दौरान POP से बनी मूर्तियां भी जस की तस दिखाई दीं।

जागरूकता अभियान के बावजूद POP का इस्तेमाल

प्रशासन और विभिन्न संगठनों की ओर से पिछले कुछ वर्षों में POP की मूर्तियों के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। लोगों और मूर्तिकारों से पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियां बनाने और इस्तेमाल करने की अपील की जाती रही है।

इसके बावजूद इस बार विसर्जन कुंड में POP की मूर्तियां दिखाई देने के बाद जागरूकता अभियानों के असर पर सवाल उठ रहे हैं। खबर के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इलाके में POP की मूर्तियों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई भी सुस्त पड़ी है।

प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल

विसर्जन कुंड में POP की मूर्तियां मिलने के बाद प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मिट्टी की मूर्तियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाए जाने के बावजूद यदि POP की मूर्तियां बनाई और विसर्जित की जा रही हैं, तो इसके पीछे निगरानी की कमी भी एक कारण मानी जा रही है।

अब पानी पूरी तरह उतरने के बाद विसर्जन कुंड में मौजूद मूर्तियों की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। 5500 से अधिक मूर्तियों के विसर्जन वाले इस कुंड में POP की मूर्तियों का जस का तस रहना पर्यावरण और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े सवालों को सामने ला रहा है।

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