चीन की नई हाइपरसोनिक क्षमता से AWACS और टैंकर विमान को खतरा? जानें कितना खतरनाक है हथियार

China Hypersonic Weapon: चीन की नई हाइपरसोनिक क्षमता से AWACS, टैंकर और कमांड विमानों को हजारों किलोमीटर दूर से निशाना बनाने की आशंका है। जानें यह हथियार

चीन ने कथित तौर पर एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल विकसित किया है, जो हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने वाली हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लॉन्च करने में सक्षम हो सकता है।

China Hypersonic Missile: चीन अपनी मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियार क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहा है। इसी कड़ी में एक नई रिपोर्ट ने चीन की ऐसी सैन्य क्षमता की ओर ध्यान खींचा है, जो भविष्य में लंबी दूरी पर काम करने वाले महत्वपूर्ण सैन्य विमानों के लिए चुनौती बन सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने कुछ हाइपरसोनिक हथियारों में हवा से हवा में हमला करने की क्षमता विकसित की है।

इस तकनीक का संभावित इस्तेमाल केवल लड़ाकू विमानों के खिलाफ नहीं, बल्कि AWACS, एयरबोर्न कमांड पोस्ट, खुफिया निगरानी विमान और हवाई टैंकरों जैसे महत्वपूर्ण विमानों को निशाना बनाने के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे विमान आमतौर पर सीधे अग्रिम मोर्चे पर नहीं जाते, बल्कि दूर रहकर युद्धक विमानों को निगरानी, संचार, ईंधन और कमांड सपोर्ट प्रदान करते हैं।

चीन के हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल पर क्यों है नजर?

रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) विकसित किया है, जिसे लंबी दूरी तक ले जाकर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को लॉन्च करने की क्षमता से जोड़ा गया है। इससे इस तरह का प्लेटफॉर्म पारंपरिक लड़ाकू विमान या मिसाइल प्रणाली से अलग तरीके से काम कर सकता है।

बताया गया है कि कुछ चीनी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में भी हवा से हवा में हमला करने की क्षमता जोड़े जाने की कोशिश की गई है। साथ ही चीन अपनी कुछ मिसाइल प्रणालियों में एंटी-शिप क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

AWACS विमान के लिए क्यों बढ़ सकता है खतरा?

AWACS यानी Airborne Warning and Control System विमान आधुनिक हवाई युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये विमान काफी ऊंचाई पर रहकर बड़े क्षेत्र की निगरानी करते हैं और दुश्मन के विमानों की गतिविधियों की जानकारी लड़ाकू विमानों तक पहुंचाते हैं। इसी तरह एयरियल टैंकर युद्धक विमानों को हवा में ईंधन उपलब्ध कराते हैं। फ्लाइंग कमांड पोस्ट और खुफिया निगरानी विमान भी सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि लंबी दूरी से हाइपरसोनिक प्लेटफॉर्म इन विमानों को निशाना बनाने में सक्षम हो जाता है, तो युद्ध के दौरान किसी देश की हवाई निगरानी, कमांड और लॉजिस्टिक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

2,400 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक पहुंचने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, एक मिसाइल से लॉन्च किया गया हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल करीब 1,500 मील यानी लगभग 2,414 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। यह दूरी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। तुलना के तौर पर यह दूरी चीन से अमेरिकी क्षेत्र गुआम तक की दूरी के करीब बताई गई है। गुआम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है।

इसके अलावा चीन की DF-27 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली की रेंज को लेकर भी बड़े दावे किए जाते रहे हैं। ऐसी क्षमताओं के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती के साथ-साथ क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।

HGV को रोकना क्यों मुश्किल माना जाता है?

हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी तेज गति और दिशा बदलने की क्षमता शामिल है। सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल मुख्य रूप से पूर्व निर्धारित प्रक्षेपवक्र का पालन करती हैं, जबकि HGV वायुमंडल के भीतर ग्लाइड करते हुए अपनी दिशा में बदलाव कर सकते हैं। यही कारण है कि पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इनके संभावित प्रक्षेपवक्र का अनुमान लगाना कठिन हो सकता है। तेज गति के साथ यदि कोई हथियार अपनी दिशा भी बदलता रहे, तो उसे ट्रैक करने और समय पर इंटरसेप्ट करने की चुनौती बढ़ जाती है।

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