गुजरात में दिवाली के दिन दुकानदार और कारोबारी अपने नए बही-खातों की पूजा करते हैं। इसे चोपड़ पूजन कहा जाता है। यह रिवाज कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। इसका संबंध लक्ष्मी पूजा और गुजराती नए साल से है।
Chopda Pujan 2026: दिवाली आने वाली है और गुजरात के बाजारों में इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। दुकानों में साफ-सफाई के साथ पुराने लेनदेन का हिसाब भी देखा जा रहा है। कई व्यापारी नए साल के लिए बही-खाते और रजिस्टर खरीद रहे हैं। दरअसल, गुजरात में दिवाली पर इन खातों की पूजा करने का पुराना रिवाज है। इसे चोपड़ पूजन कहते हैं। इस साल 8 नवंबर को चोपड़ पूजन होगा और 10 नवंबर को गुजराती नया साल मनाया जाएगा।
दिवाली पर नए बही-खातों की पूजा करने की क्या वजह है?
गुजरात में दिवाली के दिन व्यापारियों के घरों और दुकानों में एक खास पूजा होती है। लक्ष्मी-गणेश की पूजा के साथ नए बही-खाते भी रखे जाते हैं। यह रिवाज खासकर उन परिवारों में देखने को मिलता है, जो कई पीढ़ियों से व्यापार करते आ रहे हैं।
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गुजराती भाषा में हिसाब लिखने वाली किताब को चोपड़ कहा जाता है। पुराने जमाने में दुकानदारों के पास आज की तरह कंप्यूटर या मोबाइल ऐप नहीं होते थे। वे अपनी दुकान पर होने वाली हर खरीद-बिक्री का हिसाब बही में लिखते थे। किस ग्राहक को उधार सामान दिया, किससे कितने पैसे लेने हैं और किसका भुगतान बाकी है, सब कुछ इन्हीं किताबों में दर्ज रहता था।
दिवाली के आसपास व्यापारी सालभर के लेनदेन का हिसाब मिलाते थे। इसके बाद नए साल के लिए नई बही तैयार की जाती थी। लेकिन उसमें काम शुरू करने से पहले लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती थी। यही रिवाज आगे चलकर चोपड़ पूजन के नाम से पहचाना जाने लगा।
व्यापारियों का मानना है कि नए खातों की पूजा करके काम शुरू करना शुभ होता है। इस दिन वे माता लक्ष्मी से घर और कारोबार में बरकत की प्रार्थना करते हैं। भगवान गणेश से काम में आने वाली परेशानियां दूर रखने की कामना की जाती है। कई परिवारों में आज भी बड़े-बुजुर्ग इस पूजा को कराते हैं और घर के दूसरे सदस्य उनके साथ शामिल होते हैं।
दिवाली के अगले दिन नहीं, इस बार 10 नवंबर को क्यों होगा गुजराती नववर्ष?
गुजरात में दिवाली के आसपास नए साल का उत्साह भी शुरू हो जाता है। यहां दिवाली के बाद आने वाले नए साल को बेस्टु वरस कहा जाता है। इस दिन लोग सुबह से ही एक-दूसरे के घर जाकर नए साल की बधाई देते हैं। दुकानों और घरों में मिठाइयां बांटी जाती हैं।
आमतौर पर गुजराती नया साल दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है, लेकिन 2026 में दोनों त्योहारों के बीच एक दिन का अंतर रहेगा। इस साल दिवाली रविवार, 8 नवंबर को है। इसके अगले दिन 9 नवंबर को पड़तर दिवस रहेगा और मंगलवार, 10 नवंबर को गुजराती नववर्ष मनाया जाएगा।
गुजराती पंचांग के अनुसार, इस दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी। यही वजह है कि दिवाली पर होने वाले चोपड़ पूजन को कारोबारी साल के बदलाव से भी जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि, यह गुजराती समाज की धार्मिक और पारंपरिक मान्यता से जुड़ा नया साल है। सरकारी कामकाज और आयकर के लिए भारत में वित्त वर्ष पहले की तरह 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च को ही समाप्त होता है।
चोपड़ पूजन में व्यापारी कैसे करते हैं पूजा?
चोपड़ पूजन की तैयारी दिवाली से पहले ही शुरू हो जाती है। दुकानदार अपनी दुकान और पूजा की जगह साफ करते हैं। इसके बाद नए बही-खाते, रजिस्टर और कारोबार से जुड़े जरूरी सामान पूजा के लिए रखे जाते हैं।
कई परिवारों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ मां सरस्वती की भी पूजा की जाती है। नए खातों पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाया जाता है। कुछ व्यापारी बही के पहले पन्ने पर 'श्री' या 'शुभ-लाभ' लिखते हैं। फिर दीपक जलाकर फूल, मिठाई और दूसरी पूजा सामग्री चढ़ाई जाती है।
पूजा के दौरान परिवार के लोग भी शामिल होते हैं। व्यापारी अपने कारोबार की तरक्की और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। कई जगह पूजा पूरी होने के बाद नए खातों में पहला शुभ लेखन भी किया जाता है।
हालांकि, गुजरात के हर इलाके में चोपड़ पूजन का तरीका बिल्कुल एक जैसा नहीं है। कहीं परिवार के बड़े सदस्य पूजा करते हैं तो कहीं पंडित को बुलाया जाता है। कई व्यापारी अपने परिवार में वर्षों से चली आ रही रीति के अनुसार ही यह पूजा करते हैं।
कंप्यूटर के दौर में भी क्यों नहीं बदली चोपड़ पूजन की परंपरा?
पहले दुकानों का सारा हिसाब कागज की मोटी बही में रखा जाता था। अब छोटे दुकानदार भी मोबाइल और कंप्यूटर पर हिसाब रखने लगे हैं। बड़ी कंपनियों में तो पूरा काम अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर से होता है।
इसके बाद भी दिवाली पर नए बही-खातों की पूजा करने का रिवाज जारी है। कई कारोबारी आज भी दिवाली से पहले नए रजिस्टर खरीदते हैं। कुछ लोग अपने कंप्यूटर, लैपटॉप और कारोबार में इस्तेमाल होने वाले दूसरे उपकरणों को भी पूजा के समय रखते हैं।
गुजराती व्यापारी परिवारों के लिए यह पूजा सिर्फ नए हिसाब-किताब की शुरुआत नहीं है। वे इसे अपने काम और रोजी-रोटी के प्रति सम्मान जताने का मौका भी मानते हैं। इस परंपरा में सही तरीके से व्यापार करने, समय पर लेनदेन पूरा करने और ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की भावना भी जुड़ी है।
चोपड़ पूजन 2026 कब होगा और शुभ मुहूर्त कैसे जानें?
साल 2026 में चोपड़ पूजन रविवार, 8 नवंबर को दिवाली के अवसर पर किया जाएगा। गुजरात में व्यापारी आमतौर पर लक्ष्मी पूजा के साथ या स्थानीय पंचांग में बताए गए शुभ समय पर अपने बही-खातों की पूजा करते हैं।
पूजा का सही मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अहमदाबाद, सूरत, राजकोट या गुजरात के दूसरे शहरों में रहने वाले लोग पूजा से पहले स्थानीय पंचांग या अपने पुरोहित से समय की पुष्टि कर सकते हैं।
पंचांग के अनुसार पूजा के लिए दिन और शाम में अलग-अलग शुभ चौघड़िया मुहूर्त रहते हैं। हालांकि, सही समय शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है। इसलिए पूजा से पहले अपने क्षेत्र का मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
गुजराती नववर्ष 10 नवंबर को मनाया जाएगा। इसके बाद 14 नवंबर को लाभ पंचम का पर्व आएगा, जब कई व्यापारी नए साल में अपने कारोबार की नियमित शुरुआत करते हैं।
चोपड़ पूजन की खासियत यह है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ व्यापार की जिम्मेदारियों को भी महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि आज भी गुजरात के अनेक परिवारों और व्यापारियों के लिए यह दिवाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।




