CJI सूर्यकांत ने हिंदी, संस्कृत और हरियाणवी साहित्य से जुड़ाव पर साझा किए विचार, दिनकर की ‘रश्मिरथी’ को बताया सामाजिक न्याय का प्रतीक

CJI सूर्यकांत ने हिंदी, संस्कृत और हरियाणवी साहित्य से अपने जुड़ाव पर विचार साझा किए। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की ‘रश्मिरथी’ को सामाजिक न्याय का प्रतीक बताया

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक साहित्यिक आयोजन में अपने निजी जीवन, पारिवारिक परंपरा और भारतीय भाषाओं से अपने गहरे जुड़ाव पर विस्तार से बात की।

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश Suryakant ने बुधवार को अपने संबोधन में बताया कि उनकी परवरिश एक साहित्यिक वातावरण वाले परिवार में हुई है, जिसका उनके जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्हें संस्कृत, हिंदी और हरियाणवी साहित्य से विशेष लगाव है। सीजेआई सूर्यकांत ने यह बात राष्ट्रकवि Ramdhari Singh Dinkar के स्मृति व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में हिंदी में संबोधित करते हुए कही। 

अपने भाषण में उन्होंने भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा और उसकी सांस्कृतिक महत्ता पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि साहित्य ने उनके व्यक्तित्व और न्यायिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित किया है।

“मैं हमेशा हिंदी में सोचता और बोलता हूं”- मुख्य न्यायाधीश 

‘रश्मिरथी: सामाजिक न्याय का महाकाव्य’ विषय पर आयोजित आठवें स्मृति व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा हिंदी में बोलना और सोचना सहज और स्वाभाविक लगता है, क्योंकि उनकी जड़ें भारतीय भाषाई संस्कृति से गहराई से जुड़ी हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने अपने परिवार के साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके पिता मदन गोपाल शास्त्री स्वयं संस्कृत, हिंदी और हरियाणवी के प्रतिष्ठित लेखक थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता के पसंदीदा कवियों में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर विशेष स्थान रखते थे, जिनकी रचनाओं ने उनके बचपन पर गहरा प्रभाव डाला।

साहित्यिक माहौल में बीता बचपन

CJI सूर्यकांत ने कहा कि उनके बचपन का अधिकांश समय पंजाब और हरियाणा के लेखकों, कवियों और बुद्धिजीवियों के बीच साहित्यिक चर्चाओं में बीता।उन्होंने बताया कि यह वातावरण उन्हें न केवल साहित्य से जोड़ता था, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों की गहरी समझ भी देता था। मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रचनाओं की सराहना करते हुए उन्हें “युग-निर्माता कवि” बताया।

उन्होंने कहा कि दिनकर केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय चेतना और मानवीय मूल्यों को नई दिशा दी।

‘रश्मिरथी’ और सामाजिक न्याय का संदेश

CJI सूर्यकांत ने दिनकर की प्रसिद्ध कृति रश्मिरथी को केवल साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों का सशक्त प्रतीक बताया।उन्होंने कहा कि इस महाकाव्य में समानता, गरिमा और न्याय जैसे मूलभूत सिद्धांतों को गहराई से प्रस्तुत किया गया है, जो आज भी प्रासंगिक हैं। अपने संबोधन के अंत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि वास्तविक न्याय केवल अदालतों और कानूनों के माध्यम से ही नहीं प्राप्त किया जा सकता। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समाज में समानता, संवेदनशीलता और मानवीय गरिमा को अपनाना भी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Leave a comment