Pinarayi Vijayan के तिरुवनंतपुरम स्थित घर पर बुधवार, 27 मई 2026 को तड़के Enforcement Directorate ने छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।
नई दिल्ली: भारत में प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में है। Enforcement Directorate ने बुधवार सुबह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई, जो Cochin Minerals and Rutile Limited (CMRL) से जुड़ा बताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने राज्यभर में कुल 12 स्थानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। इनमें तिरुवनंतपुरम स्थित पूर्व मुख्यमंत्री का आवास भी शामिल है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई सुबह तड़के शुरू हुई, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
क्या है CMRL मनी लॉन्ड्रिंग मामला?
ईडी के अनुसार, मामला कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध फंड ट्रांसफर से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि Cochin Minerals and Rutile Limited से विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं को फर्जी खर्चों और संदिग्ध लेनदेन के माध्यम से धनराशि ट्रांसफर की गई। जांच के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी Veena Vijayan भी शामिल हैं।
एजेंसी का दावा है कि कथित तौर पर कुछ वित्तीय लाभार्थियों में उनका नाम भी सामने आया है। हालांकि, अभी तक किसी भी आरोप को अदालत में साबित नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रही है।

किन-किन जगहों पर हुई कार्रवाई?
ईडी ने तिरुवनंतपुरम, कोच्चि और कन्नूर समेत कई शहरों में छापेमारी की। अधिकारियों ने बताया कि सर्च ऑपरेशन उन परिसरों में चलाया गया जो कथित रूप से मामले से जुड़े व्यक्तियों और कंपनियों से संबंधित हैं। प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वित्तीय दस्तावेज और अन्य संभावित सबूतों की जांच की। फिलहाल एजेंसी ने आधिकारिक रूप से बरामद सामग्री का पूरा विवरण साझा नहीं किया है।
केरल की राजनीति में इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि वामपंथी नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। Communist Party of India (Marxist) से जुड़े नेताओं का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि मामले में पारदर्शी जांच होनी चाहिए और यदि वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।










