कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: शर्मिला धनखड़ ने जीता गोल्ड, भारत ने कई स्पर्धाओं में बढ़ाया पदकों का खाता

CJP ने चेतावनी दी कि मंगलवार तक गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो देशभर में फिर प्रदर्शन होगा। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और कानूनी मदद पर भी बड़ा बयान।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। शर्मिला धनखड़ ने पैरा शॉट पुट F57 में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा, जबकि सर्वेश कुशारे, अजय बाबू, ज्ञानेश्वरी यादव, बिंदियारानी देवी और शिल्पा शायला ने भी पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।

CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। महिलाओं की पैरा शॉट पुट F57 स्पर्धा में शर्मिला धनखड़ ने सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके इस गोल्ड के साथ भारत के खाते में दूसरा स्वर्ण पदक जुड़ गया। इसी स्पर्धा में शिल्पा के. शायला ने कांस्य पदक जीतकर भारत की सफलता को और मजबूत किया।

भारत ने दिनभर विभिन्न प्रतियोगिताओं में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज सहित कई पदक जीतकर अपनी कुल पदक संख्या 10 तक पहुंचा दी। इस प्रदर्शन के बाद भारतीय दल पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया।

शर्मिला धनखड़ ने सीजन बेस्ट थ्रो से जीता गोल्ड

महिलाओं की पैरा शॉट पुट F57 स्पर्धा में शर्मिला धनखड़ ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो किया। यह प्रदर्शन उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। F57 वर्ग उन पैरा एथलीटों के लिए होता है जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं या जिनकी मांसपेशियों की ताकत सीमित होती है। शर्मिला ने पूरे मुकाबले में शानदार संतुलन बनाए रखा और निर्णायक प्रयास में बेहतरीन दूरी हासिल कर भारत के लिए बहुमूल्य स्वर्ण पदक जीत लिया।

शिल्पा शायला को नाटकीय अंदाज में मिला ब्रॉन्ज

इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने 7.26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। शुरुआती परिणामों में उन्हें चौथे स्थान पर रखा गया था और नाइजीरिया की खिलाड़ी को कांस्य पदक दिया गया था। हालांकि भारतीय दल की आपत्ति के बाद अधिकारियों ने नाइजीरियाई खिलाड़ी के प्रयास की दोबारा समीक्षा की। जांच में उनका वैध माना गया थ्रो फाउल घोषित किया गया। संशोधित परिणाम जारी होने के बाद शिल्पा चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गईं और उन्हें कांस्य पदक प्रदान किया गया। पदक मिलने के बाद शिल्पा भावुक हो गईं और उन्होंने शर्मिला धनखड़ के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया। हालांकि नाइजीरिया इस फैसले के खिलाफ आधिकारिक अपील कर सकता है।

हाई जंप में सर्वेश कुशारे ने दिलाया सिल्वर

पुरुष हाई जंप फाइनल में भारत के सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। उन्होंने 2.28 मीटर पार करने की तीन कोशिशें कीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। जमैका के खिलाड़ी ने काउंटबैक के आधार पर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि इंग्लैंड के खिलाड़ी ने कांस्य पदक हासिल किया। सर्वेश का यह प्रदर्शन उनके लगातार बेहतरीन फॉर्म का प्रमाण है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

महाराष्ट्र के नासिक जिले के देवगांव के रहने वाले सर्वेश कुशारे का सफर प्रेरणादायक रहा है। सीमित संसाधनों के बीच उनके पिता ने खेत में मकई के छिलकों और कपास से अस्थायी लैंडिंग पिट बनाकर अभ्यास की व्यवस्था की थी। इसी संघर्ष और मेहनत का परिणाम है कि सर्वेश अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सबसे सफल हाई जंप खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं। इससे पहले वह डायमंड लीग में भी पदक जीतने वाले पहले भारतीय हाई जंपर बने थे।

अजय बाबू गोल्ड से केवल एक किलो दूर

पुरुष 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में भारत के अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम उठाकर गेम्स रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम का सफल प्रयास किया। मलेशिया के खिलाड़ी ने अंतिम प्रयास में 184 किलोग्राम उठाकर कुल 331 किलोग्राम के साथ नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया और केवल एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक जीत लिया। अजय को रजत पदक से संतोष करना पड़ा, लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद प्रभावशाली रहा।

ज्ञानेश्वरी यादव और बिंदियारानी देवी ने बढ़ाया भारत का गौरव

महिला 53 किलोग्राम वर्ग में ज्ञानेश्वरी यादव ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 88 किलोग्राम उठाकर गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। उनके प्रदर्शन ने साबित किया कि भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। वहीं 58 किलोग्राम वर्ग में बिंदियारानी देवी ने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। यह उनका लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है। इससे पहले उन्होंने 2022 संस्करण में रजत पदक जीता था।

वेटलिफ्टिंग में भारत का शानदार दबदबा

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग भारत का सबसे सफल खेल बनकर उभरा है। अजय बाबू के रजत पदक के साथ भारत इस खेल में छह पदक जीत चुका है। मीराबाई चानू, ऋषिकांत सिंह, ज्ञानेश्वरी यादव, राजा मुथुपांडी, बिंदियारानी देवी और अजय बाबू ने मिलकर भारत की झोली में महत्वपूर्ण पदक डाले हैं। विशेष रूप से मणिपुर के खिलाड़ियों का योगदान उल्लेखनीय रहा है। मीराबाई चानू, ऋषिकांत सिंह और बिंदियारानी देवी ने अकेले तीन पदक जीतकर राज्य की खेल प्रतिभा को एक बार फिर साबित किया।

अन्य स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम

बॉक्सिंग में सचिन सिवाच और अंकुश ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। वहीं पुरुष 110 मीटर बाधा दौड़ में तेजस शिरसे चोट से जूझते हुए आठवें स्थान पर रहे। पैरा एथलेटिक्स में राकेशभाई भट्ट और श्रेयांश त्रिवेदी फाइनल में क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर रहे। तैराकी में आर्यन नेहरा सातवें तथा साजन प्रकाश आठवें स्थान पर रहे।

पदक तालिका में मजबूत हुई भारत की स्थिति

भारत अब तक कुल 10 पदक जीत चुका है, जिसमें दो स्वर्ण सहित कई रजत और कांस्य पदक शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन से आने वाले दिनों में पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और पैरा स्पर्धाओं में भारतीय दल की मजबूत चुनौती यह संकेत देती है कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए यादगार साबित हो सकते हैं।

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