रभंगा में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर आम वाहन चालकों से लगातार चालान वसूले जा रहे हैं। जिले में अलग-अलग नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई के बीच करीब 7 करोड़ रुपए के चालान का आंकड़ा सामने आया है। लेकिन इसी बीच पुलिस की डायल-112 सेवा से जुड़ी एक बाइक को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि डायल-112 की बाइक बिना हेलमेट और सिविल ड्रेस में चलाई जा रही थी, इसके बावजूद संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई नहीं की गई।
आम वाहन चालकों पर ट्रैफिक नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाए जाते हैं। हेलमेट नहीं पहनने, सीट बेल्ट नहीं लगाने, ओवरलोडिंग, गलत पार्किंग, तेज रफ्तार और अन्य नियमों के उल्लंघन पर चालान काटे जाते हैं। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों से जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
दरभंगा में चालान की बड़ी राशि सामने आने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि ट्रैफिक नियम सभी के लिए समान हैं या नहीं। आम वाहन चालकों से नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना वसूला जाता है तो पुलिस या सरकारी वाहन के चालक द्वारा नियम तोड़े जाने पर क्या उसी तरह कार्रवाई की जाती है? डायल-112 की बाइक को लेकर सामने आए मामले ने इसी सवाल को जन्म दिया है।
बताया जा रहा है कि डायल-112 की बाइक का इस्तेमाल आपातकालीन पुलिस सेवा के लिए किया जाता है। किसी घटना की सूचना मिलने पर पुलिस टीम बाइक से मौके पर पहुंच सकती है। ऐसे वाहनों का इस्तेमाल आमतौर पर पुलिसकर्मी त्वरित कार्रवाई और घटनास्थल तक पहुंचने के लिए करते हैं। लेकिन आरोप है कि संबंधित बाइक को सिविल ड्रेस में और बिना हेलमेट चलाया जा रहा था।
बिना हेलमेट बाइक चलाना सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर ट्रैफिक उल्लंघन माना जाता है। हेलमेट दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए सिर की सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है। दुर्घटना की स्थिति में हेलमेट गंभीर चोट से बचाने में मदद करता है। इसी वजह से पुलिस आम लोगों से लगातार हेलमेट पहनने की अपील करती है और उल्लंघन करने पर चालान भी काटती है।
ऐसे में पुलिस सेवा से जुड़ी बाइक के बिना हेलमेट चलने की तस्वीर या घटना सामने आने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अगर नियम तोड़ने वाला कोई आम नागरिक होता तो उसके खिलाफ चालान की कार्रवाई की जाती। इसलिए लोगों का सवाल है कि क्या सरकारी या पुलिस वाहन के मामले में भी समान नियम लागू किए जाते हैं।
दरभंगा में आम वाहन चालकों से करोड़ों रुपए का चालान वसूले जाने के बीच यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। लोग यह जानना चाहते हैं कि डायल-112 की बाइक को बिना हेलमेट चलाने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई विभागीय या ट्रैफिक कार्रवाई हुई है या नहीं।
यह भी महत्वपूर्ण है कि डायल-112 जैसी आपातकालीन सेवा में तैनात पुलिसकर्मियों को कई बार अचानक घटनास्थल पर पहुंचना पड़ता है। हालांकि आपातकालीन ड्यूटी का मतलब ट्रैफिक नियमों से पूरी तरह छूट होना नहीं माना जा सकता। कुछ परिस्थितियों में कानून या नियम विशेष प्रावधान दे सकते हैं, लेकिन सामान्य स्थिति में सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
पुलिसकर्मियों के लिए हेलमेट पहनना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सड़क पर लगातार गश्त और आपातकालीन ड्यूटी करते हैं। बाइक से घटनास्थल पर पहुंचने के दौरान दुर्घटना का खतरा आम वाहन चालकों की तरह ही रहता है। ऐसे में पुलिसकर्मी खुद सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे तो आम लोगों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
दरभंगा में करीब 7 करोड़ रुपए के चालान का आंकड़ा यह बताता है कि जिले में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर बड़ी संख्या में कार्रवाई की जा रही है। हालांकि चालान की राशि केवल पुलिस की कार्रवाई का आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग तरह के ट्रैफिक उल्लंघनों और वाहनों पर लगाए गए जुर्माने शामिल हो सकते हैं। इस राशि की अवधि और इसमें शामिल चालानों का पूरा विवरण आधिकारिक आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा।
आम वाहन चालक अक्सर शिकायत करते हैं कि ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर हेलमेट और अन्य नियमों को लेकर सख्ती करती है। कई जगहों पर वाहन चालकों को रोककर दस्तावेजों की जांच की जाती है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर चालान काटा जाता है। ऐसे में यदि पुलिस वाहन ही नियमों का पालन नहीं करता दिखाई देता है तो लोगों के बीच असमानता की भावना पैदा हो सकती है।
डायल-112 की बाइक को लेकर सामने आया मामला इसी वजह से महत्वपूर्ण है। पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ नियमों का पालन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिसकर्मियों से खुद भी कानून और नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। वर्दी या सरकारी वाहन होने से सड़क सुरक्षा की जरूरत खत्म नहीं हो जाती।
इस मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि बाइक किस परिस्थिति में चलाई जा रही थी। क्या पुलिसकर्मी किसी आपातकालीन कॉल पर जा रहा था? क्या उस समय किसी विशेष परिस्थिति में हेलमेट पहनना संभव नहीं था? क्या बाइक डायल-112 की आधिकारिक ड्यूटी पर थी? इन सभी सवालों के जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच या स्पष्टीकरण से ही सामने आ सकते हैं।
यदि बाइक सामान्य ड्यूटी के दौरान बिना हेलमेट चलाई जा रही थी और इस संबंध में कोई वैध छूट लागू नहीं थी, तो संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई किए जाने की मांग उठ सकती है। वहीं यदि आपातकालीन परिस्थिति में किसी विशेष नियम के तहत छूट थी तो पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।
पुलिस विभाग के लिए यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि डायल-112 सीधे आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ी सेवा है। इस सेवा में तैनात पुलिसकर्मियों से तेज कार्रवाई के साथ अनुशासन की भी उम्मीद की जाती है। अगर वही पुलिसकर्मी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते नजर आते हैं तो इससे विभाग की छवि प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैफिक नियमों को लेकर एक समान नीति होनी चाहिए। अगर हेलमेट आम बाइक सवार के लिए जरूरी है तो पुलिसकर्मी के लिए भी इसे अनिवार्य बनाया जाना चाहिए, जब तक कि कानून में कोई स्पष्ट अपवाद न हो। इससे लोगों के बीच यह संदेश जाएगा कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं।
दरभंगा में ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। पुलिस और परिवहन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और वाहन चालकों को नियमों के प्रति जागरूक करना है। इसके लिए जरूरी है कि कार्रवाई में पारदर्शिता भी बनी रहे।
सिर्फ चालान काटने से ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बेहतर नहीं हो सकती। सड़क सुरक्षा के लिए वाहन चालकों में जागरूकता, बेहतर सड़क व्यवस्था, ट्रैफिक सिग्नल का पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल तथा नियमों का समान रूप से पालन जरूरी है। पुलिसकर्मी खुद नियमों का पालन करेंगे तो इसका असर आम वाहन चालकों पर भी पड़ेगा।
डायल-112 की बाइक से जुड़े मामले में अब संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि पुलिस प्रशासन जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाइक कौन चला रहा था, उस समय उसकी ड्यूटी क्या थी और हेलमेट नहीं पहनने की वजह क्या थी। इसके साथ ही यह भी पता चलेगा कि नियम उल्लंघन पाए जाने पर कोई कार्रवाई की गई या नहीं।
आम लोगों से करोड़ों रुपए के चालान वसूले जाने के बीच पुलिस वाहन पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप विभाग के लिए असहज सवाल खड़ा करता है। यदि कार्रवाई हुई है तो उसकी जानकारी सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस प्रशासन को इस बारे में स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है।
ट्रैफिक नियमों का उद्देश्य सिर्फ जुर्माना वसूलना नहीं है। इन नियमों का मुख्य मकसद लोगों की जान बचाना और सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है। यही नियम पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए भी उतने ही जरूरी हैं। इसलिए सरकारी और निजी वाहनों के लिए सुरक्षा मानकों में पारदर्शिता और समानता जरूरी है।
कुल मिलाकर, दरभंगा में आम वाहन चालकों से करीब 7 करोड़ रुपए के चालान की कार्रवाई के बीच डायल-112 की बाइक को बिना हेलमेट और सिविल ड्रेस में चलाए जाने का मामला सवाल खड़े कर रहा है। आम लोगों पर ट्रैफिक नियम तोड़ने पर चालान होता है, ऐसे में पुलिस वाहन के मामले में कार्रवाई हुई या नहीं, इसका स्पष्ट जवाब जरूरी है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में छूट थी तो पुलिस प्रशासन को उसे स्पष्ट करना चाहिए, ताकि ट्रैफिक नियमों को लेकर आम लोगों के बीच भरोसा बना रहे।












