JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक का मामला जांच के घेरे में है। CID पूछताछ में गिरफ्तार अभय तिवारी ने प्रश्न रटवाने और अभ्यर्थियों से कथित तौर पर लाखों रुपये लेने की जानकारी दी है। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
रांची: झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर कथित पेपर लीक का दावा सामने आने के बाद जांच तेज हो गई है। JPSC मेधा घोटाले में गिरफ्तार अभय तिवारी से CID की पूछताछ में परीक्षा से पहले प्रश्न उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों से कथित रकम लिए जाने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी अब मामले में जुड़े लोगों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की जांच कर रही है।
JSSC-CGL पेपर लीक के दावे से मचा हड़कंप
झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। JPSC मेधा घोटाले के मामले में गिरफ्तार अभय तिवारी से CID की पूछताछ के दौरान सितंबर 2024 में आयोजित JSSC-CGL परीक्षा के कथित पेपर लीक से जुड़े खुलासे होने का दावा किया गया है।

बताया जा रहा है कि पूछताछ में अभय तिवारी ने परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्न उपलब्ध कराने और उन्हें याद कराने से संबंधित जानकारी दी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और आधिकारिक साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही हो सकेगी।
CID अब कथित पेपर लीक की पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच का दायरा परीक्षा से पहले प्रश्न उपलब्ध होने से लेकर अभ्यर्थियों तक जानकारी पहुंचने और कथित आर्थिक लेन-देन तक फैला हुआ है।
अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने का दावा
पूछताछ से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कथित पेपर लीक के बाद कुछ अभ्यर्थियों से बड़ी रकम ली गई थी। जानकारी के मुताबिक करीब 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लिए जाने की बात सामने आई है। इस हिसाब से कथित तौर पर करीब 1.80 करोड़ रुपये के लेन-देन का दावा किया जा रहा है।
जांच एजेंसी इस कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम किसके माध्यम से ली गई, इसका इस्तेमाल कहां हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
बोकारो में अभ्यर्थियों को प्रश्न रटवाने का दावा
पूछताछ में कथित तौर पर करीब 65 प्रश्नों को अभ्यर्थियों को पहले से उपलब्ध कराने और उन्हें रटवाने की बात सामने आई है। दावा है कि बोकारो में एक व्यक्ति के घर पर कई अभ्यर्थियों को बुलाया गया था, जहां उन्हें प्रश्न और उत्तर याद कराए गए।
एक अन्य जानकारी के मुताबिक करीब 45 अभ्यर्थियों को वहां ले जाने की बात भी जांच के दौरान सामने आई है। CID अब इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वहां वास्तव में क्या हुआ था।
परीक्षा एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में वेबल कंपनी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पूछताछ के दौरान यह दावा सामने आया कि परीक्षा के प्रश्नपत्र की छपाई का काम वेबल कंपनी को मिला था।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रश्नपत्र तैयार होने और छपाई की प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कहीं सेंध लगी थी या नहीं। परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
मिथिलेश सिंह और उमाकांत प्रमाणिक के नाम सामने आए
CID की पूछताछ में मिथिलेश सिंह और उमाकांत प्रमाणिक के नाम भी सामने आने का दावा किया गया है। अभय तिवारी ने कथित तौर पर दोनों के संपर्क में होने की जानकारी दी है।
जांच एजेंसी अब इन लोगों के बीच संबंध और कथित पेपर लीक से किसी तरह का जुड़ाव था या नहीं, इसकी पड़ताल कर रही है। इस मामले में सामने आने वाले प्रत्येक दावे को उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों से सत्यापित किया जा रहा है।
खुद JSSC-CGL में सफल हुआ था अभय तिवारी
जांच में अभय तिवारी की अपनी परीक्षा सफलता को लेकर भी चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह खुद JSSC-CGL परीक्षा में सफल हुआ था और उसका रैंक 48 बताया गया है। उसके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी के भी सरकारी नौकरी में चयनित होने की जानकारी सामने आई है।
अब CID यह जांच कर रही है कि कथित पेपर लीक नेटवर्क में अभय तिवारी की भूमिका क्या थी और परीक्षा से जुड़े अन्य लोगों के साथ उसके संबंध किस स्तर तक थे।
फिलहाल JSSC-CGL परीक्षा की पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। CID की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और कथित नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।












