दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रहा। CJP नेताओं ने विमान से हिरासत में लिए जाने को अपहरण बताया। छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए।
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका, अभिजीत दीपके और सौरव दास ने पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। नेताओं का आरोप है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचते ही उन्हें विमान से उतारकर हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को अपहरण करार दिया और दावा किया कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रही है।
तीनों नेता करीब 23 घंटे हिरासत में रहने के बाद 11 अक्टूबर की सुबह रिहा हुए। इस बीच, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। कनॉट प्लेस और राजीव चौक से जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे SFI, AISA और अन्य छात्र संगठनों के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मारपीट करने का आरोप भी लगाया।
CJP नेताओं ने हिरासत को बताया अपहरण
CJP नेता आशुतोष रांका ने रिहाई के बाद आरोप लगाया कि वह, अभिजीत दीपके और सौरव दास शनिवार को विमान से दिल्ली पहुंचे थे। उनके मुताबिक, विमान के उतरने के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और वे निर्धारित विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों नेताओं को दिल्ली पहुंचने के कुछ ही समय बाद विमान के भीतर से हिरासत में लिया गया था। उनकी पार्टी ने इस घटना का वीडियो भी साझा किया था। यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले की गई, जिसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाना था।
रांका ने आरोप लगाया कि सरकार ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहे लोगों के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई कर रही है। हालांकि, नेताओं के इन आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के पीछे के कारणों को अलग-अलग समझना जरूरी है। दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा तथा यातायात में संभावित बाधा का हवाला दिया था।
सौरव दास बोले- देश में आपातकाल जैसे हालात
CJP नेता सौरव दास ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि देश में भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने मौजूदा स्थिति की तुलना आपातकाल जैसे हालात से की और आरोप लगाया कि सरकार अपने ही नागरिकों के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर रही है।
दास ने दावा किया कि दिल्ली में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती से ऐसा माहौल बन गया है, मानो राजधानी को छावनी में बदल दिया गया हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
दास के मुताबिक, हिरासत और प्रतिबंधों के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि प्रदर्शन को दिल्ली से बाहर दूसरे हिस्सों तक ले जाने की योजना बनाई जा सकती है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर उठ रहे विवाद पर बातचीत करने के बजाय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की जा रही है।
दास ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कथित भूमिका और ज्ञानेश कुमार को हटाने को लेकर भी दावा किया। हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए इसे CJP नेता का आरोप ही माना जाना चाहिए, न कि किसी संगठन की आधिकारिक स्थिति।
रत्ना सिंह ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश किसने दिए और सरकार को इस संबंध में स्पष्टीकरण देना चाहिए।
सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया और कुछ लोगों के प्रति पुलिस का रवैया अलग था। उन्होंने यह भी दावा किया कि घर लौटने के बाद भी सरकारी अधिकारी उनके आवास के नीचे मौजूद रहे।
इन आरोपों के संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर ही कार्रवाई की परिस्थितियों का पूरा आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल, CJP नेताओं ने कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार की जांच की मांग उठाई है।

दादी के निधन के बाद घर रवाना हुए अभिजीत दीपके
रिहाई के बाद अभिजीत दीपके ने बताया कि उनकी दादी का निधन हो गया है और वह परिवार के साथ रहने के लिए महाराष्ट्र स्थित अपने घर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिरासत के दौरान वह अपने रिश्तेदार से बात कराने का अनुरोध करते रहे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
आशुतोष रांका ने भी आरोप लगाया कि दीपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी देने के दौरान पुलिस कैमरा और माइक लेकर पहुंची थी। उनके अनुसार, इस परिस्थिति में परिवार से संपर्क करने की दीपके की कोशिशों को प्राथमिकता नहीं दी गई।
दीपके राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से मुलाकात के बाद उनके आवास से रवाना हुए। उन्होंने कहा कि वह परिवार के साथ रहने के लिए घर लौट रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लोगों ने देखा है और आंदोलन की अगली रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया
CJP नेताओं की रिहाई के बावजूद दिल्ली में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। SFI, AISA और अन्य छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तथा SIR प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को लेकर प्रदर्शन किया। कनॉट प्लेस और राजीव चौक से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
कुछ छात्र कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर मारपीट करने का आरोप लगाया। राजधानी के प्रमुख इलाकों में भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के कारण प्रदर्शनकारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। इससे पहले, पुलिस ने प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार कर दिया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। दूसरी ओर, सार्वजनिक स्थानों पर बड़े जमावड़े को लेकर पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इस मामले में कार्रवाई की वैधता और परिस्थितियों का मूल्यांकन उपलब्ध दस्तावेजों तथा संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर किया जाना चाहिए।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अद्यतन करने की प्रक्रिया है। CJP और अन्य प्रदर्शनकारियों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
विरोध करने वाले समूहों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का नाम अनुचित तरीके से नहीं हटना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों के निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए संबंधित आंकड़ों, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसलिए इस विवाद में प्रदर्शनकारियों की मांगों के साथ-साथ आधिकारिक पक्ष और प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को भी समझना जरूरी है।
आंदोलन आगे भी जारी रखने का ऐलान
CJP नेताओं ने कहा है कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। सौरव दास ने संकेत दिया कि प्रदर्शन को देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की कोशिश की जाएगी। संगठन के नेताओं का कहना है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जवाब चाहते हैं।
दिल्ली में लगातार दूसरे दिन हुए प्रदर्शन ने चुनाव आयोग की भूमिका, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदर्शनकारी अपनी अगली रणनीति क्या तय करते हैं, प्रशासन विरोध प्रदर्शनों को लेकर क्या कदम उठाता है और संबंधित आरोपों पर आधिकारिक पक्ष क्या सामने आता है।










