RBI ने 13 NBFC कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए, पश्चिम बंगाल की 11 कंपनियां सूची में शामिल

RBI ने सितंबर 2026 में 13 NBFC कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए। इनमें पश्चिम बंगाल की 11 और तमिलनाडु की 2 कंपनियां शामिल हैं। जानें पूरी सूची और वजह।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2026 में जारी आदेशों के तहत 13 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किए हैं। इनमें पश्चिम बंगाल की 11 और तमिलनाडु की दो कंपनियां शामिल हैं। अब ये कंपनियां NBFC के रूप में कारोबार नहीं कर सकेंगी।

Business: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 13 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। केंद्रीय बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इनमें 11 कंपनियां पश्चिम बंगाल और दो तमिलनाडु में पंजीकृत थीं। यह कार्रवाई RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत की गई है। रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद संबंधित कंपनियां NBFC के तौर पर वित्तीय कारोबार नहीं कर सकेंगी।

RBI ने 13 NBFC कंपनियों के रजिस्ट्रेशन किए रद्द

भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय कार्रवाई करते हुए 13 कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) रद्द कर दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में 9 अक्टूबर 2026 को जानकारी जारी की। हालांकि, संबंधित कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश सितंबर 2026 में अलग-अलग तारीखों पर जारी किए गए थे।

RBI के मुताबिक, इन 13 कंपनियों में से 11 के पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल में हैं, जबकि दो कंपनियां तमिलनाडु में स्थित हैं। यह कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA(6) के तहत की गई है। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द होने के बाद ये कंपनियां कानून के तहत परिभाषित नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन का कारोबार नहीं कर सकतीं।

रद्द किए गए रजिस्ट्रेशन वाली कंपनियों में नकोदर फाइनेंस, अजीतनाथ स्टील्स, एस्ट्रोल डीलकॉम, भाग्यश्री ट्रेडिंग, बू फाइनेंस कंपनी और ब्राइटेक्स फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं। इसके अलावा सजीली विनिमय, भूमिका फिस्कल सर्विसेज, ब्लू माउंट एक्सपोर्ट्स, डेल्टा कैपिटल मार्केट, राजेश फिस्कल सर्विसेज, सरला फाइनेंस और श्रेयांस व्यापार के नाम भी सूची में शामिल हैं।

10 कंपनियों ने खुद सरेंडर किए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट

RBI ने एक अलग घोषणा में बताया कि 10 NBFCs ने अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर किए हैं। इन मामलों में कंपनियों के कारोबार से बाहर निकलने, नियामकीय वर्गीकरण में बदलाव और कानूनी अस्तित्व समाप्त होने जैसे कारण सामने आए हैं। इनमें छह कंपनियों ने NBFC का कारोबार बंद करने के कारण अपने सर्टिफिकेट लौटाए।

इन छह कंपनियों में प्रगति फिनकैप, राजलक्ष्मी वाणिज्य, विवृति कैपिटल, MSJ कोलोनाइजिंग एंड लीजिंग कंपनी, PKSL इन्वेस्टमेंट और HCL कॉर्पोरेशन शामिल हैं। RBI ने इनके सरेंडर किए गए सर्टिफिकेट भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत रद्द कर दिए।

इसके अलावा PCR इन्वेस्टमेंट्स ने अनरजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में वर्गीकृत होने की जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर किया। नियमों के मुताबिक, पात्र CIC को RBI के तहत NBFC रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती।

विलय और कानूनी स्थिति में बदलाव भी बने कारण

रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करने वाली अन्य कंपनियों में अपर्णा इन्वेस्टमेंट, वंदना गृह निर्माण और रामसिसारिया बिल्डर्स शामिल हैं। अपर्णा इन्वेस्टमेंट ने अनरजिस्टर्ड टाइप-I NBFC के रूप में वर्गीकृत होने की शर्तें पूरी करने के बाद अपना सर्टिफिकेट लौटाया।

वहीं, वंदना गृह निर्माण और रामसिसारिया बिल्डर्स के मामलों में विलय, मर्जर, भंग होने या स्वेच्छा से नाम हटाए जाने के बाद कानूनी अस्तित्व समाप्त होने जैसी परिस्थितियां बताई गई हैं।

RBI की इन घोषणाओं से स्पष्ट है कि रजिस्ट्रेशन रद्द करने और कंपनियों की ओर से सर्टिफिकेट सरेंडर करने की प्रक्रियाएं अलग-अलग कारणों से हुई हैं। संबंधित कंपनियों की नियामकीय स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी केंद्रीय बैंक की आधिकारिक विज्ञप्तियों में देखी जा सकती है।

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