दिल्ली के जगतपुर इलाके में बारिश के दौरान तीन स्कूली बच्चे ओवरफ्लो खुले नाले में गिर गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत साहस दिखाते हुए तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना का वीडियो CCTV में कैद हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जगतपुर क्षेत्र में बारिश के दौरान एक बड़ा हादसा टल गया, जब स्कूल से घर लौट रहे तीन स्कूली बच्चे पानी से भरे खुले और ओवरफ्लो नाले में गिर गए। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों की त्वरित प्रतिक्रिया और साहसिक प्रयासों की बदौलत तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में बारिश के दौरान खुले नालों, जलभराव और कमजोर नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्कूल से लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब तीनों बच्चे स्कूल से अपने घर लौट रहे थे। सुबह हुई भारी बारिश के कारण जगतपुर क्षेत्र की कई सड़कों पर पानी भर गया था और नाले ओवरफ्लो हो गए थे। बारिश के पानी से ढके होने के कारण बच्चों को यह अंदाजा नहीं लग सका कि सड़क के किनारे खुला नाला मौजूद है। चलते-चलते उनका संतुलन बिगड़ा और वे सीधे नाले में जा गिरे। गनीमत रही कि उस समय आसपास कई स्थानीय लोग मौजूद थे, जिन्होंने घटना होते ही तुरंत मदद के लिए दौड़ लगा दी।
स्थानीय लोगों ने दिखाई बहादुरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्चों के नाले में गिरते ही आसपास मौजूद लोगों ने बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने खुद जोखिम उठाकर नाले के किनारे पहुंचकर बच्चों का हाथ पकड़ा, जबकि अन्य लोगों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में सहयोग किया। कुछ ही मिनटों में तीनों बच्चों को नाले से बाहर निकाल लिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और समय रहते रेस्क्यू होने से संभावित बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई की व्यापक सराहना की जा रही है।
CCTV फुटेज में कैद हुई पूरी घटना
घटना स्थल के पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया। फुटेज में देखा जा सकता है कि बच्चे अचानक पानी से भरे हिस्से में गिर जाते हैं और आसपास मौजूद लोग तुरंत उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं। वीडियो में कई लोग मिलकर बच्चों को हाथ पकड़कर बाहर निकालते दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो बारिश के मौसम में खुले नालों से उत्पन्न खतरे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वर्षा के दौरान जलभराव होने पर सड़क और नाले के बीच का अंतर दिखाई नहीं देता। ऐसे में पैदल चलने वाले, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। यदि खुले नालों पर उचित बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं हो, तो ऐसे हादसों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान नगर प्रशासन को संवेदनशील स्थानों की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन से खुले नालों को सुरक्षित करने और जलनिकासी व्यवस्था में सुधार की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता। उनका मानना है कि यदि समय रहते बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। निवासियों ने यह भी कहा कि स्कूलों के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए क्योंकि इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे गुजरते हैं।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव और खुले नालों से जुड़े हादसे पहले भी सामने आते रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले उत्तर दिल्ली के मुखमेलपुर क्षेत्र की उत्तराखंड कॉलोनी में बारिश के पानी से जुड़े एक हादसे में दो बच्चों की जान चली गई थी। उस घटना ने भी शहर में जलनिकासी व्यवस्था और सुरक्षा उपायों पर गंभीर बहस छेड़ दी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि शहरी बुनियादी ढांचे को मौसम संबंधी चुनौतियों के अनुरूप अधिक सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने दिए सुरक्षा सुझाव
आपदा प्रबंधन और शहरी सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान कुछ सावधानियां अपनाकर ऐसे हादसों से बचा जा सकता है। बारिश के समय जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरने से बचना चाहिए। बच्चों को अकेले ऐसे रास्तों से नहीं भेजना चाहिए जहां खुले नाले या गहरे गड्ढे होने की संभावना हो। स्थानीय प्रशासन को भी खुले नालों की पहचान कर वहां मजबूत बैरिकेड, चेतावनी संकेत और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा नागरिकों से भी अपील की जाती है कि किसी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत राहत और बचाव एजेंसियों को सूचना दें।











