संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित हो रही है। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बातचीत की।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की नई पहल देखने को मिली है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि उनकी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दल राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देंगे।
हाल के दिनों में संसद के दोनों सदनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण कई बार कार्यवाही बाधित हुई है। ऐसे माहौल में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की आवश्यकता
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राजनीतिक दल एक-दूसरे के विरोधी होने के साथ-साथ दुश्मन भी बन जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों के साथ निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखना चाहती है।
रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही और इस दौरान संसद से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार विपक्ष के सुझावों और चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है, बशर्ते संसद की कार्यवाही बाधित न हो।
संसद में गतिरोध पर जताई चिंता
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी कहा कि देश के नागरिकों के बीच यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि संसद को चलने से रोकना किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संसद राष्ट्रीय नीतियों, कानूनों और जनहित के मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और इसका सुचारु संचालन लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संसद बार-बार बाधित होती है तो अंततः नुकसान जनता का होता है, क्योंकि महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत चर्चाओं में देरी होती है। उनके अनुसार, सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे संसद को प्रभावी ढंग से चलाने में योगदान दें।

गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर उठे सवालों का जवाब
हाल के दिनों में विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि कुछ महत्वपूर्ण बहसों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री नियमित रूप से संसद में उपस्थित रहते हैं और जब भी उनके मंत्रालय से संबंधित कोई विधेयक या चर्चा होती है, वह सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय परंपराओं के अनुसार वही मंत्री सदन में प्रमुख रूप से मौजूद रहता है, जिसके मंत्रालय से संबंधित विषय पर चर्चा या विधायी प्रक्रिया चल रही हो। इसलिए किसी मंत्री की अस्थायी अनुपस्थिति को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर नजर
इस बार का मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों और राष्ट्रीय मुद्दों के कारण विशेष महत्व रखता है। सरकार आर्थिक सुधारों, प्रशासनिक बदलावों और अन्य प्रमुख नीतिगत विषयों से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। वहीं विपक्ष विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो संसद में गतिरोध कम हो सकता है और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को गति मिल सकती है।












