आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में धीरज बोम्मादेवरा ने जीता गोल्ड, डोला बनर्जी के बाद बने दूसरे भारतीय चैंपियन

धीरज बोम्मादेवरा ने आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में जापान के नाकानिशी जुन्या को शूट-ऑफ में हराकर गोल्ड जीता। वह डोला बनर्जी के बाद दूसरे भारतीय चैंपियन बने।

भारत के धीरज बोम्मादेवरा ने आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में जापान के नाकानिशी जुन्या को शूट-ऑफ में हराकर स्वर्ण पदक जीता। पांच सेट बाद 5-5 की बराबरी थी, लेकिन धीरज ने निर्णायक शूट-ऑफ में परफेक्ट 10 लगाकर खिताब अपने नाम किया।

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत के शीर्ष रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। रविवार को खेले गए रोमांचक फाइनल में धीरज ने जापान के नाकानिशी जुन्या को शूट-ऑफ में हराकर खिताब जीता। पांच सेट के बाद दोनों तीरंदाज 5-5 की बराबरी पर थे, लेकिन निर्णायक शूट-ऑफ में धीरज ने परफेक्ट 10 अंक हासिल कर जीत दर्ज की।

शूट-ऑफ में परफेक्ट 10 ने दिलाया खिताब

फाइनल मुकाबले में धीरज और नाकानिशी जुन्या के बीच शुरुआत से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला। जापानी तीरंदाज ने शुरुआती दौर में बढ़त बनाकर भारतीय खिलाड़ी पर दबाव डाल दिया था। हालांकि, धीरज ने लगातार शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को निर्णायक शूट-ऑफ तक पहुंचाया।

पांच सेट पूरे होने के बाद दोनों खिलाड़ियों का स्कोर 5-5 था। इसके बाद विजेता का फैसला शूट-ऑफ से हुआ। इस प्रक्रिया में दोनों तीरंदाजों को एक-एक तीर चलाने का मौका मिलता है और अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है।

निर्णायक क्षण में धीरज ने बेहद दबाव के बावजूद परफेक्ट 10 का निशाना लगाया। इसके जवाब में नाकानिशी जुन्या 9 अंक ही हासिल कर सके। इस तरह धीरज ने शूट-ऑफ में 10-9 से जीत दर्ज की और मुकाबला 6-5 से अपने नाम कर लिया।

दो बार पिछड़ने के बाद धीरज की शानदार वापसी

फाइनल में धीरज को शुरुआत में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। नाकानिशी जुन्या ने पहले दो सेट में प्रभावी प्रदर्शन करते हुए 3-1 की बढ़त हासिल कर ली थी। इसके बाद भारतीय तीरंदाज ने धैर्य बनाए रखा और तीसरे सेट में 29 अंक हासिल किए।

धीरज के इस प्रदर्शन से मुकाबला 3-3 की बराबरी पर आ गया। हालांकि, चौथे सेट में जापानी तीरंदाज ने एक बार फिर दबाव बनाया। जुन्या ने अपने तीनों तीर परफेक्ट निशाने पर लगाए और सेट जीतकर 5-3 की बढ़त हासिल कर ली।

अब धीरज के सामने मुकाबला बचाने की चुनौती थी। पांचवें सेट में जुन्या केवल 27 अंक हासिल कर सके, जबकि धीरज ने दबाव के बीच 28 अंक जुटाए। इस प्रदर्शन के साथ धीरज ने सेट अपने नाम किया और मुकाबला 5-5 से बराबर कर दिया।

इसके बाद शूट-ऑफ में धीरज ने 10 अंक का परफेक्ट निशाना लगाकर खिताब पर कब्जा कर लिया।

आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल जीतने वाले दूसरे भारतीय

इस ऐतिहासिक जीत के साथ धीरज बोम्मादेवरा आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के दूसरे तीरंदाज बन गए हैं। उनसे पहले डोला बनर्जी ने 2007 में दुबई में विमेंस इंडिविजुअल रिकर्व इवेंट का खिताब जीतकर यह उपलब्धि हासिल की थी।

इस लिहाज से धीरज की जीत भारतीय तीरंदाजी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पुरुष रिकर्व वर्ग में वर्ल्ड कप फाइनल का खिताब जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

क्वार्टर-फाइनल में तुर्की के बर्किम ट्यूमर को हराया

वर्ल्ड कप फाइनल में खिताबी सफर के दौरान धीरज ने क्वार्टर-फाइनल में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद भारतीय तीरंदाज ने तुर्की के बर्किम ट्यूमर को सीधे सेटों में 7-1 से शिकस्त दी।

धीरज ने मुकाबले में शुरुआत से ही नियंत्रण बनाए रखा और अपने निशानों की निरंतरता के दम पर अगले दौर में जगह बनाई। क्वार्टर-फाइनल की यह जीत उनके आत्मविश्वास के लिए भी महत्वपूर्ण रही।

सेमीफाइनल में ओलिंपिक पदक विजेता को दी मात

क्वार्टर-फाइनल के बाद धीरज का सामना सेमीफाइनल में फ्रांस के ज्यां-चार्ल्स वेलाडोंट से हुआ। वेलाडोंट रियो ओलिंपिक के रजत पदक विजेता हैं और अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी में अनुभवी नाम माने जाते हैं।

धीरज ने सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए वेलाडोंट को 7-1 से हराया। इस जीत के साथ उन्होंने पहली बार आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल के खिताबी मुकाबले में जगह बनाई और अपने पहले ही फाइनल को स्वर्ण पदक में बदल दिया।

पहली बार फाइनल में पहुंचे और सीधे जीता खिताब

धीरज बोम्मादेवरा इससे पहले भी वर्ल्ड कप फाइनल में पदक के करीब पहुंच चुके थे। 2023 में वह सेमीफाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2024 में भी वह पदक हासिल नहीं कर सके थे।

इस बार उन्होंने पिछले प्रदर्शन से आगे बढ़ते हुए फाइनल में प्रवेश किया और खिताब जीतकर अपना अभियान ऐतिहासिक बना दिया। फाइनल में उनकी सबसे बड़ी ताकत दबाव में संयम बनाए रखना रही। दो बार पिछड़ने के बावजूद उन्होंने मुकाबला बराबरी पर पहुंचाया और शूट-ऑफ में निर्णायक निशाना लगाया।

अंताल्या में जीत से फाइनल का टिकट किया हासिल

धीरज ने तुर्की के अंताल्या में आयोजित वर्ल्ड कप स्टेज-3 जीतकर आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। फाइनल में जगह बनाने वाले आठ सदस्यीय एलीट फील्ड में भारत की ओर से केवल धीरज ही शामिल थे।

स्टेज-3 में मिली जीत ने उन्हें फाइनल के लिए मजबूत दावेदार बनाया था। उन्होंने फाइनल में अपने प्रदर्शन से इस उम्मीद को सही साबित किया और स्वर्ण पदक हासिल किया।

एशियाई खेलों में भारतीय रिकर्व टीम की करेंगे अगुआई

वर्ल्ड कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब धीरज बोम्मादेवरा का ध्यान एशियाई खेलों पर होगा। वह आगामी एशियाई खेलों में भारतीय रिकर्व टीम की अगुआई करेंगे।

धीरज का एशियाई खेलों में भी मजबूत रिकॉर्ड रहा है। पिछली बार हांगझू एशियाई खेलों में उन्होंने भारतीय टीम के साथ पुरुष टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता था। हालांकि, व्यक्तिगत स्पर्धा में उनका सफर क्वार्टर-फाइनल में समाप्त हो गया था।

इस बार वर्ल्ड कप फाइनल का स्वर्ण पदक उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे धीरज से एशियाई खेलों में भी भारतीय तीरंदाजी को पदक की उम्मीद होगी।

भारतीय तीरंदाजी के लिए बड़ी उपलब्धि

धीरज बोम्मादेवरा की वर्ल्ड कप फाइनल में जीत सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि भारतीय रिकर्व तीरंदाजी के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फाइनल में विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को हराने के बाद उन्होंने शूट-ऑफ जैसे दबावपूर्ण चरण में अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया।

नाकानिशी जुन्या के खिलाफ 5-5 की बराबरी के बाद 10-9 से शूट-ऑफ जीतना उनके प्रदर्शन का सबसे निर्णायक हिस्सा रहा। इस जीत के साथ धीरज ने भारत के लिए वर्ल्ड कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे तीरंदाज बनने की उपलब्धि हासिल की और अब उनकी नजर एशियाई खेलों में मजबूत प्रदर्शन पर होगी।

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