हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए हेली टैक्सी सेवा को लेकर प्रशासन ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। 14 से 16 सितंबर तक भरमौर हेलीपैड से गौरीकुंड के लिए हेली टैक्सी सेवा अस्थायी रूप से बंद रहेगी। यह फैसला किसी तकनीकी समस्या के कारण नहीं, बल्कि मणिमहेश यात्रा से जुड़ी वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए लिया गया है। भद्रवाह से आने वाले श्रद्धालुओं के जत्थे और ऐतिहासिक छड़ी यात्रा के दौरान भरमौर में बड़ी भीड़ रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और धार्मिक आयोजनों को सुचारू रखने के लिए तीन दिन तक भरमौर से हेलीकॉप्टर संचालन रोकने का निर्णय लिया है।
इन तीन दिनों में मणिमहेश जाने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात यह है कि हेली टैक्सी सेवा पूरी तरह बंद नहीं होगी। श्रद्धालु भरमौर के बजाय होली हेलीपैड से गौरीकुंड के लिए हेलीकॉप्टर सेवा ले सकेंगे। प्रशासन की ओर से होली से गौरीकुंड के बीच हेली टैक्सी सेवा जारी रखने की व्यवस्था की गई है। यानी जिन यात्रियों ने हवाई सेवा के जरिए मणिमहेश पहुंचने की योजना बनाई है, उन्हें अपनी यात्रा की शुरुआत भरमौर के बजाय होली से करनी होगी।
प्रशासन के इस निर्णय के पीछे मणिमहेश यात्रा से जुड़ी परंपरा को भी अहम कारण माना जा रहा है। वर्षों से भद्रवाह क्षेत्र से आने वाली छड़ी यात्रा और श्रद्धालुओं के जत्थे भरमौर के होली पैड पर पहुंचते रहे हैं। यात्रा के इस महत्वपूर्ण चरण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रहती है। ऐसे में भरमौर हेलीपैड से हेलीकॉप्टर की लगातार आवाजाही होने पर भीड़ प्रबंधन और धार्मिक गतिविधियों के संचालन में परेशानी पैदा हो सकती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने तीन दिन के लिए भरमौर से हेली टैक्सी सेवा रोकने का फैसला किया है।
14 सितंबर से यह व्यवस्था लागू हो गई है और 16 सितंबर तक भरमौर से हेली टैक्सी सेवा उपलब्ध नहीं रहेगी। इस दौरान भरमौर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यदि हवाई यात्रा करनी है तो उन्हें होली हेलीपैड की ओर जाना होगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा कार्यक्रम बनाने से पहले इस बदलाव को ध्यान में रखें, ताकि मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।
होली हेलीपैड से गौरीकुंड तक हेली टैक्सी सेवा इस अवधि में श्रद्धालुओं के लिए मुख्य विकल्प रहेगी। हालांकि भरमौर की तुलना में होली से हवाई सेवा का किराया अधिक है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार होली से गौरीकुंड का किराया 6295 रुपये है, जबकि भरमौर से गौरीकुंड के लिए किराया 3828 रुपये निर्धारित है। यानी श्रद्धालुओं को होली से हेलीकॉप्टर लेने पर करीब 2467 रुपये अधिक खर्च करने होंगे।
ऐसे में यात्रियों को यात्रा का बजट बनाते समय इस अतिरिक्त खर्च को ध्यान में रखना होगा। खासतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए किराये का अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि तीन दिनों के लिए भरमौर से सेवा बंद रहने के कारण जिन लोगों के लिए समय महत्वपूर्ण है, उनके पास होली से हेली टैक्सी लेने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
होली पहुंचने के लिए भी श्रद्धालुओं को बहुत अधिक परेशानी नहीं होगी। भरमौर की ओर जाते समय खड़ामुख से होली के लिए सड़क मार्ग अलग होता है। खड़ामुख से होली की दूरी करीब 25 किलोमीटर बताई गई है। श्रद्धालु सड़क मार्ग से होली पहुंचकर वहां से गौरीकुंड के लिए हेली टैक्सी ले सकते हैं। इस तरह प्रशासन ने भरमौर से सेवा रोकने के बावजूद हवाई यात्रा का विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किया है।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा कारण उस अवधि में भरमौर में रहने वाली भीड़ है। मणिमहेश यात्रा के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु चंबा और भरमौर पहुंचते हैं। भद्रवाह से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी इस दौरान काफी रहती है। धार्मिक परंपराओं और छड़ी यात्रा के कारण भरमौर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में हेलीपैड को सामान्य रूप से संचालित करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रशासन ने इस निर्णय के जरिए धार्मिक परंपरा और आधुनिक यातायात सुविधा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। एक ओर श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है, वहीं दूसरी ओर हवाई सेवा के पूरी तरह बंद होने से होने वाली परेशानी को देखते हुए होली से हेली टैक्सी सेवा जारी रखने का विकल्प दिया गया है। यही वजह है कि तीन दिन की यह व्यवस्था यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है।
मणिमहेश यात्रा के दौरान हेली टैक्सी सेवा उन श्रद्धालुओं के लिए खास तौर पर उपयोगी रहती है, जो कठिन पहाड़ी रास्ते पर लंबी पैदल यात्रा करने में सक्षम नहीं होते या कम समय में गौरीकुंड तक पहुंचना चाहते हैं। बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले यात्रियों के लिए भी हवाई सेवा एक महत्वपूर्ण विकल्प मानी जाती है। ऐसे यात्रियों को अब 14 से 16 सितंबर के बीच भरमौर के बजाय होली से हेली टैक्सी लेने की योजना बनानी होगी।
हालांकि यात्रियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि हेलीकॉप्टर सेवा मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर रहती है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है और खराब मौसम की स्थिति में उड़ान संचालन प्रभावित हो सकता है। इससे पहले भी मणिमहेश यात्रा के दौरान मौसम खराब होने पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए यात्रा और हवाई सेवा से जुड़े फैसले लिए हैं। अगस्त में भी होली हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर पहुंचने के बाद हवाई सेवा की तैयारियां तेज की गई थीं, जबकि खराब मौसम और यात्रा मार्ग की परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी थी।
इसलिए हेली टैक्सी से मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ हेलीपैड तक पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें मौसम और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों पर भी नजर रखनी होगी। खासकर यात्रा के इन महत्वपूर्ण दिनों में भीड़ अधिक होने की संभावना है, इसलिए प्रशासन की ओर से जारी व्यवस्था का पालन करना जरूरी होगा।
एडीएम भरमौर विकास शर्मा ने श्रद्धालुओं से बदली हुई व्यवस्था को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनाने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों और बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षा संबंधी किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
तीन दिन बाद यानी 17 सितंबर से भरमौर हेलीपैड से हेली टैक्सी सेवा की व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल 14, 15 और 16 सितंबर के लिए श्रद्धालुओं को भरमौर से हवाई सेवा उपलब्ध नहीं होगी। इसलिए जिन यात्रियों ने इन तारीखों के दौरान हेलीकॉप्टर से मणिमहेश जाने की योजना बनाई है, उनके लिए होली हेलीपैड सबसे प्रमुख वैकल्पिक विकल्प है।
श्रद्धालुओं के लिए व्यावहारिक तौर पर यात्रा की योजना इस तरह बनाई जा सकती है कि वे खड़ामुख तक सड़क मार्ग से पहुंचें और वहां से करीब 25 किलोमीटर की दूरी तय कर होली जाएं। होली से गौरीकुंड के लिए हेली टैक्सी ली जा सकती है। हालांकि हेली टैक्सी के किराये और उड़ान की उपलब्धता को लेकर यात्रा से पहले संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी लेना जरूरी रहेगा।
मणिमहेश यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि हिमाचल के चंबा क्षेत्र की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा भी है। इसलिए प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं का सम्मान करना भी जरूरी होता है। भरमौर से तीन दिन हेली टैक्सी सेवा रोकने का फैसला इसी संतुलन का उदाहरण है। प्रशासन ने परंपरा के कारण मुख्य हेलीपैड से उड़ानें रोकी हैं, लेकिन श्रद्धालुओं को हवाई सुविधा से पूरी तरह वंचित नहीं किया गया है।
ऐसे में 14 से 16 सितंबर के बीच मणिमहेश यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं को भरमौर से हेली टैक्सी की उम्मीद लेकर नहीं चलना चाहिए। उन्हें वैकल्पिक रूप से होली हेलीपैड की योजना बनानी होगी। साथ ही होली से गौरीकुंड का किराया भरमौर की तुलना में अधिक होने के कारण यात्रा खर्च भी उसी हिसाब से तय करना होगा। प्रशासन की अपील और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने से श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।
फिलहाल मणिमहेश यात्रा के इन तीन दिनों में प्रशासन ने धार्मिक परंपरा, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। भरमौर से हेली टैक्सी सेवा अस्थायी रूप से रोकने के बावजूद होली से गौरीकुंड तक सेवा जारी रखकर श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक रास्ता खुला रखा गया है। अब यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी सुविधा के अनुसार सड़क मार्ग और होली हेलीपैड के विकल्प को ध्यान में रखकर कार्यक्रम बनाना होगा।











