हरतालिका तीज आज सोमवार को उदयातिथि के आधार पर मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य की कामना से निर्जला व्रत रखेंगी। चित्रा-स्वाति नक्षत्र के साथ ब्रह्म-ऐन्द्र योग का संयोग भी रहेगा।
पटना: हरतालिका तीज आज सोमवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना से निराहार और निर्जला व्रत रखेंगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार तृतीया-चतुर्थी के युग्म संयोग के साथ चित्रा-स्वाति नक्षत्र और ब्रह्म-ऐन्द्र योग का संयोग बन रहा है, जिसे शुभ माना गया है।
चित्रा-स्वाति नक्षत्र और ब्रह्म-ऐन्द्र योग का संयोग
हरतालिका तीज के मौके पर सोमवार को सुहागिन महिलाएं शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करेंगी। आचार्य राकेश झा के अनुसार, इस बार तीज पर चित्रा और स्वाति नक्षत्र का युग्म संयोग बन रहा है। इसके साथ ब्रह्म-ऐन्द्र योग का भी संयोग रहेगा।

सोमवार को तृतीया तिथि सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण उदयातिथि के मान से पूरे दिन तीज की पूजा की जाएगी। तीज की पूजा में तृतीया और चतुर्थी तिथि का संयोग होना महत्वपूर्ण माना गया है।
इस बार तृतीया और चतुर्थी के युग्म संयोग के कारण गौरी-गणेश योग और मातृ-पुत्र योग बनने की बात कही गई है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार ऐसे संयोग में व्रत और पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा
हरतालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी से प्रतिमा बनाकर पूजा करेंगी। इसके बाद वेदोक्त मंत्रों के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी और व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा सुनी जाएगी।
पूजा में गंगाजल, अक्षत, चंदन, बेलपत्र, ऋतुफल और पकवान आदि अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। मान्यता के अनुसार पार्थिव यानी मिट्टी की प्रतिमा बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना कल्याणकारी माना जाता है।
हरतालिका तीज को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और सुख-समृद्धि की कामना के साथ रखती हैं। इस दौरान कई महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करती हैं।
त्रेता युग से जुड़ी है हरतालिका तीज की परंपरा
पंडितों के अनुसार हरतालिका तीज की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर लंबे समय तक तप किया था।
मान्यता है कि माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी धार्मिक कथा से हरतालिका तीज के व्रत की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने लिंग पुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह व्रत तपस्या और निष्ठा से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करने से सौभाग्य, सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु, यश और वैभव की कामना की जाती है।











