दिल्ली धमाका केस: क्या है तुर्किये का रोल और कौन है हैंडलर उकासा? जानिए पूरा मामला

दिल्ली धमाका केस: क्या है तुर्किये का रोल और कौन है हैंडलर उकासा? जानिए पूरा मामला

दिल्ली ब्लास्ट की जांच में एनआईए को तुर्किये कनेक्शन मिला है। आरोपी उमर का संपर्क अंकारा स्थित आतंकी हैंडलर उकासा से था। जांच में सामने आया कि धमाके की साजिश 2022 में रची गई थी और चार शहरों में ब्लास्ट की योजना थी।

New Delhi: दिल्ली में लाल किला के पास हुए ब्लास्ट की जांच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। 10 नवंबर की शाम हुए इस धमाके ने न केवल राजधानी बल्कि पूरे देश को हिला दिया था। अब जांच एजेंसी एनआईए (NIA) की शुरुआती जांच में पता चला है कि इस विस्फोट के तार तुर्किये (Turkey) से जुड़े हैं। जांच में सामने आया है कि ब्लास्ट में शामिल आरोपी उमर का सीधा संपर्क तुर्किये में बैठे एक हैंडलर से था, जिसका कोडनेम UKASA (उकासा) बताया जा रहा है।

अंकारा से मिल रहे थे आतंकी निर्देश

जांच अधिकारियों के मुताबिक, उमर लगातार तुर्किये की राजधानी अंकारा (Ankara) में बैठे उकासा से संपर्क में था। इसी व्यक्ति ने उमर को निर्देश दिए और दिल्ली ब्लास्ट की पूरी साजिश को अंजाम देने में मदद की। एनआईए के सूत्रों का कहना है कि उकासा ने न केवल उमर को बम प्लानिंग के निर्देश दिए, बल्कि उसे यह भी सिखाया कि डिजिटल फुटप्रिंट (Digital Footprint) से कैसे बचा जाए। इसके लिए उकासा ने उमर और उसके साथियों को एन्क्रिप्टेड एप्स जैसे Telegram और Signal पर बातचीत करने के निर्देश दिए थे।

2022 में तुर्किये में रची गई साजिश

एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी साजिश साल 2022 में तुर्किये में रची गई थी। उसी साल उमर और उसके तीन साथी तुर्किये गए थे। वहां उन्होंने करीब दो हफ्ते तक अंकारा में रहकर उकासा से मुलाकात की थी। इस दौरान उकासा ने उन्हें भारत में एक सीक्रेट सेल (Secret Cell) तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। यही सेल आगे चलकर दिल्ली ब्लास्ट की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में इस्तेमाल हुई।

उकासा था आतंकी संगठनों के बीच कड़ी

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि उकासा भारत में सक्रिय मॉड्यूल और आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM) तथा अंसार गजवत-उल-हिंद (AGUH) के बीच प्राथमिक कड़ी के रूप में काम कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्किये में बैठे उकासा ने भारत के अंदर आतंक फैलाने की रणनीति तैयार की थी और इसके लिए स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए जोड़ने का काम किया।

दिल्ली धमाके में तीन कारों का इस्तेमाल

जांच एजेंसियों ने यह भी खुलासा किया है कि दिल्ली ब्लास्ट को अंजाम देने के लिए आतंकियों ने तीन कारों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी। इनमें एक i20 कार, एक लाल EcoSport और एक Maruti Brezza शामिल थी। i20 कार का इस्तेमाल लाल किला के पास ब्लास्ट करने के लिए किया गया था। EcoSport कार को पुलिस ने बुधवार को बरामद कर लिया है, जबकि अब एजेंसियां तीसरी कार Brezza की तलाश में जुटी हैं। बताया जा रहा है कि सभी गाड़ियां अलग-अलग शहरों में इस्तेमाल की जानी थीं ताकि सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।

चार शहरों में हमले की थी योजना

एनआईए के सूत्रों ने बताया है कि यह हमला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। जांच में पता चला है कि आतंकियों ने भारत के चार शहरों में सिलसिलेवार धमाके (Serial Blasts) करने की योजना बनाई थी। इस साजिश में आठ संदिग्ध शामिल थे, जिन्हें चार ग्रुप में बांटा गया था। हर ग्रुप दो-दो सदस्यों का था और हर टीम को एक-एक शहर में विस्फोट करने का निर्देश दिया गया था। हर ग्रुप के पास कई IED (Improvised Explosive Device) थे, जिन्हें भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगाने की योजना थी।

दिल्ली धमाका कैसे हुआ

10 नवंबर की शाम लगभग 7:30 बजे दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक जोरदार धमाका हुआ। यह विस्फोट एक खड़ी i20 कार में हुआ था, जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। शुरुआती जांच में कार के टुकड़ों और बारूद के अवशेष मिले, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह सुनियोजित आतंकी हमला (Planned Terror Attack) था। पुलिस ने तुरंत पूरे इलाके को सील कर दिया और एनआईए को जांच सौंपी गई।

एनआईए की जांच में सामने आई साजिश

जांच के दौरान एनआईए ने उमर सहित कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। डिजिटल सबूतों की जांच से सामने आया कि उमर तुर्किये से मिले निर्देशों के मुताबिक काम कर रहा था। एजेंसी को टेलीग्राम और सिग्नल चैट्स से कई अहम संदेश मिले, जिनमें ब्लास्ट की तारीख, स्थान और टीमों के बीच समन्वय की बातें दर्ज थीं। सूत्रों के अनुसार, उकासा ने उमर को आदेश दिया था कि ब्लास्ट के बाद तुरंत सभी डिजिटल डिवाइस नष्ट कर दिए जाएं ताकि कोई डिजिटल सबूत न बचे।

तुर्किये में आतंकी गतिविधियों का नेटवर्क

तुर्किये हाल के वर्षों में कई आतंकी नेटवर्क्स का केंद्र बनता जा रहा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तुर्किये में मिडल ईस्ट के अलग-अलग आतंकवादी संगठनों के सदस्यों को शरण मिलती है। एनआईए अब तुर्किये की एजेंसियों से इस पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी मांग रही है। भारत ने तुर्किये से औपचारिक रूप से सहयोग की अपील की है ताकि उकासा और उसके साथियों की पहचान और गिरफ्तारी की जा सके।

डिजिटल तकनीक से बचने की तरकीबें

जांच में यह भी सामने आया है कि उमर और उसके साथियों को उकासा ने यह सिखाया था कि वे डिजिटल ट्रैकिंग (Digital Tracking) से कैसे बच सकते हैं। उन्होंने अपने फोन में वर्चुअल सिम, प्रॉक्सी सर्वर और VPN का इस्तेमाल किया। चैटिंग के लिए उन्होंने केवल एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया ताकि उनकी बातचीत किसी एजेंसी द्वारा ट्रैक न की जा सके। एनआईए अब साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से इन कम्युनिकेशन चैनलों को डिकोड करने की कोशिश कर रही है।

एजेंसियों की तलाश तेज

एनआईए ने दिल्ली, नोएडा, मेरठ और लखनऊ में कई जगह छापेमारी की है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भारत में उकासा के और कितने संपर्क हैं। एनआईए ने तुर्किये में भारतीय दूतावास के माध्यम से स्थानीय एजेंसियों को भी इस नेटवर्क की जानकारी दी है ताकि इस वैश्विक मॉड्यूल को जड़ से खत्म किया जा सके।

दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा

ब्लास्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने राजधानी के सभी संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट (High Alert) घोषित कर दिया है। रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, धार्मिक स्थल और भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। जांच एजेंसियों को यह भी शक है कि मॉड्यूल के बाकी सदस्य अभी देश में सक्रिय हो सकते हैं।

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