रिया एक बहुत ही प्यारी बच्ची थी, लेकिन उसे एक बड़ी समस्या थी। उसे रात को अकेले सोने में बहुत डर लगता था। जैसे ही कमरे की लाइट बंद होती, उसे लगता कि पलंग के नीचे कोई है। उसके मम्मी-पापा उसे सुलाने की बहुत कोशिश करते, लेकिन रिया की आँखों से नींद गायब रहती थी। फिर उसके जन्मदिन पर उसे एक ऐसा तोहफ़ा मिला जिसने उसकी रातें हमेशा के लिए बदल दीं।
कहानी
रिया का 5वाँ जन्मदिन था। उसे ढेर सारे खिलौने मिले, लेकिन उसकी बुआ ने उसे एक बहुत ही सुंदर गुड़िया दी। गुड़िया के सुनहरे बाल थे, नीली आँखें थीं और उसने गुलाबी रंग की फ्रॉक पहनी थी। बुआ ने रिया के कान में कहा, 'रिया, यह कोई आम गुड़िया नहीं है। इसका नाम 'परी' है और यह तुम्हारी सबसे अच्छी दोस्त बनेगी।'
रिया को गुड़िया बहुत पसंद आई। उसने उसे अपने पलंग के पास रख लिया।
रात हुई। मम्मी ने रिया को गुड नाइट किस किया और कमरे की लाइट बंद कर दी। कमरे में अंधेरा होते ही रिया को फिर से डर लगने लगा। उसने अपनी चादर कसकर पकड़ ली। उसे खिड़की के बाहर पेड़ की परछाई किसी भूत जैसी लग रही थी। रिया की आँखों में आँसू आ गए और वह धीरे-धीरे सुबकने लगी।
तभी, उसे एक बहुत ही धीमी और मीठी आवाज़ सुनाई दी। 'रो मत मेरी प्यारी दोस्त, मैं यहाँ हूँ।'
रिया चौंक गई। उसने इधर-उधर देखा। कमरे में कोई नहीं था। आवाज़ फिर आई, 'इधर देखो, तुम्हारे तकिए के पास।'
रिया ने देखा कि उसकी नई गुड़िया 'परी' की आँखें चमक रही थीं और उसके होंठ हिल रहे थे। रिया पहले तो डर गई और चिल्लाने वाली थी, लेकिन गुड़िया की आवाज़ में इतना जादू और अपनापन था कि वह चुप रही।
गुड़िया ने कहा, 'रिया, तुम अंधेरे से क्यों घबराती हो? अंधेरा तो बहुत सुंदर होता है। अगर अंधेरा न हो, तो चांद और तारे कैसे चमकेंगे? सपने भी तो रात में ही आते हैं।'
रिया ने धीरे से पूछा, 'क्या तुम सच में बोल रही हो?'
परी गुड़िया ने पलकें झपकाईं और बोली, 'हाँ, लेकिन यह हमारा सीक्रेट है। अब अपनी आँखें बंद करो, मैं तुम्हें बादलों की सैर पर ले चलूँगी।'
और फिर, उस गुड़िया ने गाना शुरू किया। वह कोई फ़िल्मी गाना नहीं था, बल्कि एक बहुत ही पुरानी और मीठी लोरी थी।
तू ही मेरा चांद है, तू ही मेरी धूप, मेरी आँखों की रौशनी तू ही है…
गुड़िया की आवाज़ इतनी सुरीली थी कि रिया का डर हवा में गायब हो गया। उसे ऐसा लगा जैसे वह अपनी दादी की गोद में लेटी है। धीरे-धीरे रिया की पलकें भारी होने लगीं और वह गहरी नींद में सो गई। उस रात उसने कोई डरावना सपना नहीं देखा, बल्कि उसे लगा कि वह परियों के साथ उड़ रही है।
अगली सुबह जब रिया उठी, तो वह बहुत तरोताज़ा थी। गुड़िया अब बिल्कुल शांत थी, एक बेजान खिलौने की तरह। लेकिन रिया जानती थी कि वह खास है।
अब यह हर रात की कहानी बन गई थी। जैसे ही लाइट बंद होती, परी गुड़िया रिया को कभी जंगल के राजा की कहानी सुनाती, तो कभी मीठी लोरी गाकर सुलाती। रिया अब रात होने का इंतज़ार करती थी।
एक दिन रिया की मम्मी ने पापा से कहा, 'देखो, हमारी रिया अब कितनी बहादुर हो गई है। अब वह अंधेरे से नहीं डरती और समय पर सो जाती है।'
रिया ने यह सुना और अपनी गुड़िया की तरफ देखकर मुस्कुरा दी। गुड़िया भी अपनी कांच की आँखों से उसे देखकर मुस्कुरा रही थी। रिया समझ गई थी कि जब आपके पास एक सच्चा दोस्त हो, तो अंधेरे में भी डरने की कोई ज़रूरत नहीं होती।
सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'डर सिर्फ़ हमारे मन में होता है। अगर हमारे पास सकारात्मक विचार और किसी का साथ हो, तो बड़ी से बड़ी परेशानी या डर को भी आसानी से दूर किया जा सकता है। अच्छी नींद और मन की शांति के लिए प्यार भरे शब्दों से बड़ा कोई जादू नहीं है।'













