ईरान-इजरायल संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला दिया है। सोना, चांदी, शेयर और बॉन्ड अस्थिर हैं, जबकि क्रिप्टो अलग रुख दिखा रहा है। निवेशक अनिश्चितता में सुरक्षित और मुनाफ़ा दोनों पर ध्यान दे रहे हैं।
बिज़नेस न्यूज़: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के चलते दुनिया भर के फाइनेंशियल मार्केट्स अस्थिर हो गए हैं। ज्यादातर शेयर बाजार लाल निशान में बने हुए हैं और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच-बीच में शांति की उम्मीद जताने वाले बयान बाजार को अस्थायी राहत देते हैं, लेकिन संकेत बदलते ही बाजार फिर गिर जाते हैं।
इस तनाव का असर हर तरह के एसेट्स पर देखा जा रहा है। आम तौर पर संकट के समय सोना और चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, लेकिन इस बार ये भी दबाव में हैं। वहीं, बॉन्ड यील्ड्स बढ़ रही हैं और क्रिप्टोकरेंसी में हलचल बनी हुई है। निवेशक पुराने नियमों के अनुसार सेफ एसेट्स में पैसा नहीं लगा पा रहे हैं और बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
सोने में गिरावट, सुरक्षित निवेश पर असर
आम तौर पर जब वैश्विक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार स्थिति उलटी है। सोमवार, 23 मार्च को सोने की कीमत 8 प्रतिशत से ज्यादा गिर गई। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, सोना चार महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
स्पॉट मार्केट में सोना 6.3 प्रतिशत गिरकर 4,203.21 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। पूरे हफ्ते में सोने में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई, जो फरवरी 1983 के बाद सबसे तेज थी। इसका प्रमुख कारण अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर है। जब अन्य जगह अधिक रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालने लगते हैं और इसकी कीमत गिरती है।
चांदी में तेजी और उतार-चढ़ाव
चांदी भी ज्यादातर समय सोने के साथ ही चल रही है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव अधिक तेज हैं। महीने की शुरुआत में चांदी की कीमत 88–90 डॉलर प्रति औंस थी, लेकिन अब इसमें तेज गिरावट देखने को मिली है। हालिया बिकवाली में चांदी एक दिन में 8–9 प्रतिशत तक गिर गई। सोमवार को स्पॉट सिल्वर 6.1 प्रतिशत गिरकर 63.66 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था।
चांदी में ज्यादा हलचल इसलिए दिखती है क्योंकि यह निवेश और इंडस्ट्री दोनों में इस्तेमाल होती है। जंग का असर कम दिखाई दे रहा है, जबकि हाई यील्ड्स और पिछले साल की तेजी के बाद मुनाफावसूली ज्यादा असर डाल रही है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में तेजी
सरकारी बॉन्ड इस बार सेफ नहीं दिख रहे। 23 मार्च को अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी यील्ड 4.415 प्रतिशत तक पहुंच गए, जो पिछले आठ महीनों का हाई है। ईरान संघर्ष के बाद ये लगभग 44 बेसिस पॉइंट बढ़ गए हैं।
यील्ड बढ़ने का मतलब है कि बॉन्ड की कीमतें गिर रही हैं और लोग बॉन्ड बेच रहे हैं। इसका प्रमुख कारण बढ़ता महंगाई का डर और तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। महंगा तेल महंगाई बढ़ाता है और निवेशक मान रहे हैं कि फेड ब्याज दरें घटाने के मूड में नहीं है, बल्कि सख्ती जारी रख सकता है। इसी कारण बॉन्ड यील्ड्स बढ़ रही हैं।
शेयर बाजार पर असर
शेयर बाजार भी इस तनाव से दबाव में है। एशिया में जापान का निक्केई करीब 3.5 प्रतिशत नीचे है, साउथ कोरिया का कोपी इंडेक्स 5.8 प्रतिशत गिरा है और चीन का CSI300 2.4 प्रतिशत नीचे है। अमेरिका में S&P 500 साल की शुरुआत से करीब 5 प्रतिशत गिर चुका है, जबकि नैस्डैक में लगभग 6.9 प्रतिशत की गिरावट है। यूरोप के बड़े इंडेक्स भी दबाव में हैं। FTSE 100 अपने हालिया हाई से 10 प्रतिशत नीचे आकर करेक्शन जोन में है। भारत में भी बड़े इंडेक्स जंग बढ़ने के बाद से 10 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुके हैं।
क्रिप्टोकरेंसी का अलग रुख
क्रिप्टोकरेंसी इस बार शेयर बाजार के साथ कदम से कदम नहीं मिला रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि मार्च में बिटकॉइन करीब 8 प्रतिशत ऊपर है, जबकि स्टॉक मार्केट कमजोर दिख रहा है। मार्च की शुरुआत में बिटकॉइन 71,000 डॉलर तक पहुंचा था। सोमवार को यह करीब 68,500 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था।
क्रिप्टो की चाल इस बार मार्केट लिक्विडिटी और निवेशकों के फैसलों पर निर्भर है। यह न तो पूरी तरह सोने जैसा सुरक्षित ठिकाना बन रहा है, न ही शेयर बाजार की तरह पूरी तरह जोखिमपूर्ण।









