फरीदाबाद में जल संरक्षण अभियान तेज, हर गांव में 5 जलाशय और 350 Rainwater Harvesting सिस्टम लगेंगे

फरीदाबाद में हर गांव में 5 जलाशय और 350 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे भूजल स्तर बढ़ाने और जल संकट कम करने में मदद मिलेगी।

फरीदाबाद में सरकार ने जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। मानसून के दौरान गांवों में नए जलाशय और शहरी क्षेत्रों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे भूजल स्तर सुधारने और जल संकट कम करने में मदद मिलेगी।

फरीदाबाद: जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद में व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत प्रत्येक गांव में पांच नए जलाशय बनाए जाएंगे, जबकि शहर के सामुदायिक केंद्रों और पार्कों में Rainwater Harvesting सिस्टम लगाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य भूजल स्तर बढ़ाना, वर्षा जल का बेहतर उपयोग करना और भविष्य में पानी की कमी से निपटना है।

भूजल संकट से निपटने के लिए शुरू हुई नई पहल

फरीदाबाद में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार ने जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। योजना के तहत बारिश के पानी को अधिकतम मात्रा में जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि आने वाले वर्षों में पेयजल संकट को कम किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का काम मानसून के दौरान ही शुरू किया जाएगा।

गांवों और शहरों में अलग-अलग स्तर पर होंगे कार्य

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक गांव में पांच नए जलाशय विकसित किए जाएंगे। इन जलाशयों में वर्षा का पानी एकत्र होगा, जो धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही इनका उपयोग सिंचाई और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए भी किया जा सकेगा। इन जलाशयों की देखरेख संबंधित पंचायतों को सौंपी जाएगी।

वहीं शहरी क्षेत्रों में पहले चरण में 50 सामुदायिक केंद्रों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां Rainwater Harvesting सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके अलावा शहर के करीब 300 पार्कों में भी ऐसे सिस्टम स्थापित करने की तैयारी चल रही है। नगर निगम प्रत्येक परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा ताकि भविष्य में रखरखाव की कमी के कारण ये सिस्टम निष्क्रिय न हों।

गिरते भूजल स्तर और बढ़ती मांग बनी चुनौती

फरीदाबाद में भूजल स्तर कई इलाकों में 500 फीट से भी नीचे पहुंच चुका है। जिले में जल आपूर्ति के लिए नगर निगम के लगभग 1,690 ट्यूबवेल संचालित हैं, लेकिन जलस्तर गिरने के कारण करीब 200 ट्यूबवेल खराब हो चुके हैं। ऐसे मामलों में नए स्थानों पर ट्यूबवेल लगाने पड़ रहे हैं, जिससे लागत और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

शहर की बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन लगभग 330 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, जबकि आपूर्ति करीब 280 एमएलडी ही हो पा रही है। दूसरी ओर, नगर निगम दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से 100 एमएलडी से अधिक पानी का शोधन भी कर रहा है, जिससे जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में प्रयास जारी हैं।

सरकार का मानना है कि वर्षा जल संरक्षण की यह पहल केवल भूजल स्तर बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मानसून के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने भी लोगों से जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाने और पानी की बचत को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की है।

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